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एक्शन में हेमंत सरकार : राज्यसभा चुनाव 2016 में गड़बड़ी का मामला, एडीजी अनुराग निलंबित

Updated at : 15 Feb 2020 7:08 AM (IST)
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एक्शन में हेमंत सरकार : राज्यसभा चुनाव 2016 में गड़बड़ी का मामला, एडीजी अनुराग निलंबित

रांची : रघुवर सरकार के चहेते एडीजी अनुराग गुप्ता को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने निलंबित कर दिया है. राज्यसभा चुनाव 2016 में श्री गुप्ता की संदिग्ध भूमिका और गड़बड़ी के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग के निर्देश पर रांची के जगन्नाथपुर थाना में गृह विभाग के अफसर ने 29 मार्च 2018 को प्राथमिकी दर्ज करायी […]

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रांची : रघुवर सरकार के चहेते एडीजी अनुराग गुप्ता को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने निलंबित कर दिया है. राज्यसभा चुनाव 2016 में श्री गुप्ता की संदिग्ध भूमिका और गड़बड़ी के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग के निर्देश पर रांची के जगन्नाथपुर थाना में गृह विभाग के अफसर ने 29 मार्च 2018 को प्राथमिकी दर्ज करायी थी.
उस वक्त वे विशेष शाखा के एडीजी थे. लेकिन तत्कालीन रघुवर सरकार ने इनको निलंबित नहीं किया. वहीं सरकार बदलते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सीआइडी एडीजी अनुराग गुप्ता को यह कहते हुए निलंबित करने का आदेश दिया कि वे पद पर रहते हुए जांच को प्रभावित कर सकते हैं.
फिलवक्त जगन्नाथपुर थाने में दर्ज मामले में अनुराग गुप्ता को क्लीन चिट नहीं मिली है. मामले में इनके खिलाफ गृह विभाग ने विभागीय कार्रवाई भी शुरू की थी. इसके लिए विशेष शाखा के एडीजी अजय कुमार सिंह को संचालन पदाधिकारी बनाया गया था. नियमत: एडीजी रैंक के अफसर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए डीजी रैंक का अफसर होना चाहिए था. लेकिन इस मामले में डीजी रैंक के अफसर को संचालन पदाधिकारी नहीं बनाया गया था.
2018 में जगन्नाथपुर थाना में दर्ज हुआ था मामला: मामले में चुनाव आयोग के प्रधान सचिव वीरेंद्र कुमार ने रांची पहुंचकर मामले की गहन जांच की थी. इसके बाद तत्कालीन मुख्य सचिव को आयोग ने पत्र लिखकर एडीजी अनुराग गुप्ता, सीएम के तत्कालीन सलाहकार अजय कुमार सहित अन्य पर केस दर्ज करने को कहा था. जांच के बाद 13 जून 2017 को निर्वाचन आयोग ने अनुराग गुप्ता के खिलाफ प्राथमिकी और विभागीय कार्यवाही शुरू का आदेश दिया गया था. इसके बाद 2018 में मामला दर्ज किया गया था.
सीडी में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को धमकाने की बातचीत है िरकाॅर्ड: राज्यसभा चुनाव 2016 में कथित गड़बड़ी की शिकायत को लेकर 2017 में एक सीडी जारी की गयी थी. सीडी में भाजपा प्रत्याशी को वोट देने के लिए पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और एडीजी अनुराग गुप्ता की बातचीत दिखायी गयी थी.
पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस विधायक निर्मला देवी को वोट देने से रोकने के लिए उनके पति और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को एडीजी अनुराग गुप्ता ने दो दिन में 26 बार फोन कर लालच और धमकियां दी. सीडी में एक जगह योगेंद्र साव से गुप्ता कहते हैं कि अभी तीन-चार साल रघुवर सरकार रहेगी, आपको बहुत ऊंचाई तक ले जायेंगे.
राज्यसभा चुनाव 2016 में गड़बड़ी का मामला, बाबूलाल ने लगाये थे गंभीर आरोप
लोस चुनाव के पहले राज्य निकाला विस चुनाव में ले ली थी छुट्टी
राज्यसभा चुनाव 2016 में गड़बड़ी और आरोपों के बाद अनुराग गुप्ता पर चुनाव आयोग की पैनी नजर थी. इस वजह से 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने तत्कालीन सरकार को आदेश दिया था कि श्री गुप्ता को 24 घंटे के अंदर राज्य से बाहर करें. इसके बाद इनको दिल्ली के झारखंड भवन में पदस्थापित किया गया था. इसके बाद गृह विभाग ने तत्काल आदेश जारी कर श्री गुप्ता को दिल्ली जाने का आदेश दिया था. तत्काल गुप्ता शाम की फ्लाइट पर दिल्ली रवाना हो गये थे. इस चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव के समय गुप्ता ने विवादों से बचने के लिए खुद लंबी छुट्टी ले ली थी. चुनाव संपन्न होने के बाद इन्होंने फिर से योगदान दिया था.
सेवा नियमावली का किया उल्लंघन
गृह विभाग ने भारतीय पुलिस सेवा 1990 बैच के अधिकारी अनुराग गुप्ता को निलंबित करने का आदेश 14 फरवरी 2020 को जारी किया है. निलंबन की अवधि में उनका मुख्यालय पुलिस मुख्यालय झारखंड निर्धारित किया गया है. आदेश में कहा गया है कि राज्यसभा चुनाव 2016 के दौरान अनुराग गुप्ता द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर वोटरों के मताधिकार का प्रयोग करने में हस्तक्षेप करने और चुनाव प्रभावित करने का आरोप प्रथम दृष्टया सही पाये जाने के फलस्वरूप विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी. अनुराग गुप्ता का आचरण अखिल भारतीय सेवा नियमावली के प्रतिकूल है. इस आरोप की गंभीरता के मद्देनजर ही निर्वाचन आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव 2019 में उन्हें राज्य से बाहर जाने का निर्देश दिया था. ऊपर वर्णित राजनीतिक तटस्थता के उल्लंघन संबंधी आरोप की संवेदनशीलता के मद्देनजर अनुराग गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है.
कब-कब क्या हुआ मामले में
29 मार्च 2018: गृह विभाग के निर्देश पर जगन्नाथपुर थाना में धारा 171 (बी) ई 171 (c)(f) के तहत केस दर्ज किया गया
24 अप्रैल 2018: मामला असंज्ञेय होने के कारण न्यायालय से अनुसंधान की अनुमति मांगी गयी. जिसके बाद अनुसंधान की अनुमति मिली. इसके बाद केस के वादी अविनाश चंद्र ठाकुर का दोबारा बयान लिया गया.
12 जून 2018: केस में रिकॉडिंग के संबंधित मूल यंत्र प्राप्त कर एफएसएल से जांच कराने लिए बाबूलाल मरांडी, योगेंद्र साव, निर्मला देवी को नोटिस जारी करने के लिए न्यायालय में प्रतिवेदन समर्पित किया गया
19 जून 2018: घटना में प्रयुक्त मोबाइल नंबर के सीडीआर के लिए तकनीकी शाखा को प्रतिवेदन भेजा गया.
21 जून 2018: एयरटेल कंपनी की ओर पुलिस को बताया गया घटना के समय का सीडीआर उनके पास नहीं है. क्योंकि लाइसेंस की शर्त के अनुसार उनके सर्वर में एक साल तक सीडीआर रहता है. इसी तरह का जवाब बीएसएनल कंपनी द्वारा भी दिया गया.
कब-कब क्या हुआ मामले में
15 जुलाई 2018: केस में गवाह मंटू सोनी का बयान लिया गया. जिसमें उसने बताया कि उसने कभी भी अनुराग गुप्ता या अजय कुमार से बात नहीं की है. उसने यह भी बताया था कि वह घटना के समय अनुराग गुप्ता को नहीं जानता था.
03 अगस्त 2018: केस में बाबूलाल मरांडी का बयान लिया गया. जिन्होंने बताया कि मूल यंत्र योगेंद्र साव के पास है.
04 अगस्त 2018: निर्मला देवी और योगेंद्र साव को नोटिस जारी किया गया.
25 अगस्त 2018: बयान लेने के लिए योगेंद्र साव के संपर्क करने पर पुलिस का संपर्क नहीं हुआ.
29 अगस्त 2018: बार- बार नोटिस भेजने के बावजूद केस के अनुसंधान में योगेंद्र साव द्वारा असहयोग करने के संबंध में न्यायालय में प्रतिवेदन भेजा गया.
02 नवंबर 2018: योगेंद्र साव का बयान लेने के लिए अखबार में विज्ञापन प्रकाशित कराया गया.
10 दिसंबर 2018 : अवर सचिव विनय कुमार का बयान लिया गया. उन्होंने अपने बयान में केस में किसी तरह की पूर्व में शिकायत मिलने या जानकारी होने की बात से इनकार किया.
22 दिसंबर 2018: केस के सुपरविजन में बेड़ो डीएसपी ने लिखा कि प्राथमिकी का मूल आधार ऑडियो सीडी है. जिसमें कहीं भी अनुराग गुप्ता या अजय कुमार द्वारा योगेंद्र साव को किसी पार्टी या सरकार के पक्ष में मतदान करने की बात नहीं है. पैसे के लेने- देने से संबंधित भी कोई बात नहीं है. इसके अलावा केस में आये अन्य तथ्य और साक्ष्य के आधार पर केस को सही करार देने पर डीएसपी ने निर्णय लिया.
09 मार्च 2019: केस में ट्रांसक्रिप्ट सीडी को गुजरात एफएसएल के पास भेजने के लिए न्यायालय से आदेश प्राप्त करने के लिए प्रतिवेदन भेजा गया.
14 मार्च 2019: केस में सिटी एसपी ने जांच रिपोर्ट जारी की. उन्होंने भी कोई साक्ष्य या गवाह के बयान केस में समर्थन में नहीं दिये जाने के कारण केस को जांच में डाल दिया और कोई निर्णय नहीं लिया. उन्होंने भी योगेंद्र साव से मूल यंत्र लेकर एफएसएल से जांच कराने का निर्देश दिया.
नवंबर 2019 : केस में पुलिस ने ट्रांसक्रिप्ट सीडी के संबंध में एफएसएल से रिपोर्ट प्राप्त की. एफएसएल ने अपने रिपोर्ट में रिकॉर्ड में 27 स्थान पर कट और छेड़छाड़ से संबंधित तथ्य की जानकारी पुलिस की दी थी. केस में साक्ष्य से संबंधित कोई ठोस तथ्य नहीं मिलने के कारण पुलिस ने अभी तक केस में कोई निर्णय नहीं लिया.
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