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रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रिम्स में चल रही नियुक्ति की प्रक्रिया पर लगाई रोक, दिए जांच के आदेश

Updated at : 07 Feb 2020 8:55 AM (IST)
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रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रिम्स में चल रही नियुक्ति की प्रक्रिया पर लगाई रोक, दिए जांच के आदेश

रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रिम्स में चल रही नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए पूरे मामले की जांच का आदेश दिया है. विधायक बंधु तिर्की के नेतृत्व में ट्राइबल मेडिकल एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर रिम्स में नर्स, ओटी असिस्टेंट और वार्ड अटेंडेंट समेत अन्य पदों पर बहाली में आरक्षण […]

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रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रिम्स में चल रही नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए पूरे मामले की जांच का आदेश दिया है. विधायक बंधु तिर्की के नेतृत्व में ट्राइबल मेडिकल एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर रिम्स में नर्स, ओटी असिस्टेंट और वार्ड अटेंडेंट समेत अन्य पदों पर बहाली में आरक्षण प्रक्रिया और नियुक्ति नियमावली का पालन नहीं करने की शिकायत की.
इस पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने रांची स्थित रिम्स में नर्स, लैब टेक्नीशियन, ओटी असिस्टेंट, वार्ड अटेंडेंट और अन्य पदों पर चल रही बहाली की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक स्थगित करने का निर्देश रिम्स के निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह को दिया है. मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सचिव को अपने स्तर पर पूरे मामले के तथ्यों की जांच करने का निर्देश दिया है.
10 को होगी उच्चस्तरीय बैठक : मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले की समीक्षा के लिए 10 फरवरी को उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गयी है. बैठक में स्वास्थ्य मंत्री , मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सचिव और रिम्स के निदेशक मौजूद रहेंगे. इस बैठक में रिम्स की बहाली प्रक्रिया को लेकर विस्तार से चर्चा होगी. मुख्यमंत्री से मुलाकात करनेवालों में डॉ निशित एक्का, डॉ लियो, डॉ हिरेंद्र बिरवा और डॉ पंकज बोदरा शामिल थे.
डॉक्टरों की प्रमुख शिकायत
ट्राइबल मेडिकल एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को बताया कि रिम्स में हो रही नियुक्तियों में अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों को कम करके प्रकाशित किया जा रहा है. ग्रेड ए नर्स के 362 पदों के लिए निकाले गये विज्ञापन में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं किया गया है और वार्ड अटेंडेंट के 119 पदों में सिर्फ 16 ही अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. यह भी शिकायत की गयी कि ओटी असिस्टेंट के लिए अनुसूचित जनजाति के 10 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, लेकिन अनुभव को आधार बनाकर एक को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया. एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से इन सभी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द कर किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने और दोषियों पर उचित कार्रवाई करने की मांग की है.
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