गंदगी से पटे हैं शहर के तालाब, अधिकारियों को नहीं है ख्याल

Updated at : 16 Jan 2020 2:09 AM (IST)
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गंदगी से पटे हैं शहर के तालाब, अधिकारियों को नहीं है ख्याल

रांची : पूरे देश में इन दिनों स्वच्छता सर्वेक्षण चल रहा है. इसे लेकर आम लाेगों से शहर को साफ-सुथरा रखने की अपील की जा रही है. प्रचार वाहन व होर्डिंग लगा कर लोगों से अपील की जा रही है कि वे शहर को गंदा न करें. निगम की इस अपील का असर दिखने लगा […]

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रांची : पूरे देश में इन दिनों स्वच्छता सर्वेक्षण चल रहा है. इसे लेकर आम लाेगों से शहर को साफ-सुथरा रखने की अपील की जा रही है. प्रचार वाहन व होर्डिंग लगा कर लोगों से अपील की जा रही है कि वे शहर को गंदा न करें. निगम की इस अपील का असर दिखने लगा है. पहले ही तुलना में अब कूड़ा उठाव का कार्य व्यवस्थित हुआ है.

लेकिन शहर के तालाबों व जलाशयों की हालत खस्ता है. छठ के दौरान जहां शहर के तालाब व घाटों की साफ-सफाई की गयी थी, अब तालाबों में गंदगी का अंबार लगा है. घाटों की स्थिति भी बदतर है. शहर के सबसे प्रमुख तालाब बड़ा तालाब की हालत, तो खस्ताहाला है. पूरा तालाब जलकुंभी और पूजन सामग्री के मलबे से अटा पड़ा है.
छठ के दौरान बनी थी व्यवस्था, लेकिन धरातल पर नहीं उतरी : 2019 में रांची नगर निगम द्वारा छठ के दौरान पूरे शहर में 35 छठ घाटों की सफाई की गयी थी. इसके बाद निगम अधिकारियों ने एक व्यवस्था बनायी थी. इसमें था कि भविष्य में भी छठ घाट सुंदर रहें, इसलिए जिस वार्ड में जलाशय व तालाब हैं, उस वार्ड के सुपरवाइजर को इन घाटों की सफाई व्यवस्था बहाल रखनी होगी. लेकिन छठ खत्म होने के बाद घाटों को सुपरवाइजरों ने भी भुला दिया.
वर्ष 2017 में हुआ था 12 तालाबों का सौंदर्यीकरण
रांची नगर निगम द्वारा वर्ष 2017 में राजधानी के 12 तालाबों का सौंदर्यीकरण किया गया था. तालाबों के सौंदर्यीकरण में 18 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गयी थी. इस दौरान तालाबों के गहरीकरण के साथ-साथ तालाब के चारों अोर घाट का भी निर्माण किया गया था. इस दौरान तालाब के किनारे पौधरोपण भी किया गया था.
संक्रांति पर सूना रहा स्वर्णरेखा का तट
रांची . मकर संक्रांति पर बहते हुए जल में स्नान कर दान पुण्य करने की परंपरा है. संक्रांति एवं कार्तिक पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु केतारी बागान स्थित स्वर्णरेखा नदी में स्नान करने आते हैं और स्नान करने के बाद महादेव मंदिर में पूजा करते हैं.पूजन कार्य के बाद श्रद्धालु दान पुण्य करते हैं.
इस वर्ष नदी का पानी दूषित व गंदा होने के कारण नदी श्रद्धालु अपने घरो से स्नान कर मंदिर पहुंचे थे, तो कुछ लोग मंदिर के समीप लगे नगर निगम के जलमीनार में स्नान कर पूजा की. पूजा करने आयी महिलाओं ने बताया कि पानी काफी गंदा हो चुका है, साथ ही बदबू आती है. यही वजह है कि लोग स्नान करने से कतराते हैं.बताया कि नदी का पानी इतना दूषित हो चुका है कि उसमें हाथ धोने का भी मन नहीं करता.
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