क्रिसमस संदेश: जीवन का मूल उद्देश्य ईश्वर की सेवा करना है

Updated at : 24 Dec 2019 9:44 AM (IST)
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क्रिसमस संदेश: जीवन का मूल उद्देश्य ईश्वर की सेवा करना है

फादर प्रदीप केरकेट्टा अगर हम अपनी आध्यत्मिकता पर चिंतन करेंगे, तो हमें एहसास होगा कि हमारे जीवन का मूल उद्देश्य ईश्वर की सेवा व उसकी प्रशंसा करना है़ ईश्वर की सेवा का तात्पर्य बहुत विस्तृत है़ इस बात की पुष्टि मैं बाइबल के उन अंशों से करना चाहता हूं, जो ईश्वर की शिक्षा का मूल […]

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फादर प्रदीप केरकेट्टा
अगर हम अपनी आध्यत्मिकता पर चिंतन करेंगे, तो हमें एहसास होगा कि हमारे जीवन का मूल उद्देश्य ईश्वर की सेवा व उसकी प्रशंसा करना है़ ईश्वर की सेवा का तात्पर्य बहुत विस्तृत है़ इस बात की पुष्टि मैं बाइबल के उन अंशों से करना चाहता हूं, जो ईश्वर की शिक्षा का मूल आधार है़ ईश्वर ने दो बड़ी आज्ञाओं के बारे में बताया है़ अपने ईश्वर को प्यार करो और अपने पड़ोसियों को अपने समान प्यार करो़
अगर हम अपने पड़ोसी से प्यार करते हैं, तो हम अपने ईश्वर से प्यार करते है़ं यदि हम जिसके साथ रहते है उन्हीं से बैर करते हैं, तो कैसे कह सकते हैं कि हम ईश्वर से प्यार करते हैं?
ईश्वर ने हमें प्यार किया इसलिए उसने अपने एकलौते पुत्र को दुनिया में भेजा़ यह ईश्वर का मनुष्यों के प्रति प्यार का प्रमाण है़ ईश्वर को दुनिया में आने के लिए एक नारी की आवश्यकता थी़ इसी क्रम मरियम चुनी गई जो एक साधारण परिवार से थी़ ईसा, महान ईश्वर के पुत्र होने के नाते अगर चाहते तो राजघराने में जन्म ले सकते थे, मगर ईश्वर ने मरियम को ईश्वर की मां चुनकर गरीबों का मान बढ़ाया़ इस बात को मरियम अपने गुणगान के द्वारा प्रकट करती है़ इस सच्चाई को हम और ज्यादा समझेगें जब हम ईश्वर के जन्म के स्थान की चर्चा करेंगे़ं
पवित्र बाइबल में लिखा है कि ईसा का जन्म बेतलेहम में एक गौशाले में हुआ़ अर्थात बहुत ही गरीबी के हालात में हुआ़ एक राजा होते हुए भी ईसा को जन्म लेने के लिए अच्छी जगह नहीं मिली़ बहुत सारे धनी लोगों ने तो उनके जन्म के लिए जगह देने से इंकार कर दिया़ ऐसी निर्धनता व दयनीय दशा में जन्म लेकर को ईश्वर ने यह दर्शाया है कि उन्होंने खुद ही गरीबी स्वीकार किया़
आज का समाज, जिसमें हम रहते हैं वह भी बहुत भिन्न नहीं है़ यहां भी गरीबों की सुधी लेने वाले बिरले ही मिलते है़ं इस परिस्थिति में अगर ईसा यहां जन्म लेते, तो कितने लोग उन्हें स्वीकार कर पाते, कितने लोग उनके दु:ख-दर्द को समझ पाते?
शायद बहुत ही कम लोग़ इसी दूरी को कम करने, लोगों के बीच सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाने व लोगों में प्यार बांटने के लिए ईसा का आगमन हुआ़ इतना ही नहीं, ईसा के जन्म की खुशखबरी स्वर्गदूत ने सबसे पहले गड़ेरियों को ही सुनायी जो अपनी भेड़ों के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान में घूमते रहते थे़ इसने गड़ेरियों को खुशी व शांति दी़ ईश्वर के प्रति उनकी आस्था बढ़ी़ धन्यवाद स्वरुप उन्होंने ईश्वर को भेड़ चढ़ाकर उनका दंडवत किया़ ईश्वर ने गड़ेरियों का सम्मान कर हम सबों को यह संदेश दिया है कि ईश्वर गरीबों का मसीहा है़ ईश्वर ने अपने जन्म के साथ पूरे प्रकृति व मानव समुदाय को अपने में समाहित किया़
हरेक के लिए खुशी का पैगाम लाया़ निराशा में आशा जगाया़ पाप को दूर कर अंधकार रुपी अज्ञानता, नासमझी, ईर्ष्या, बेईमानी, लालच व घमंड को दूर कर प्रकाश रुपी ज्ञान, आपसी मेल- मिलाप, क्षमा, खुशी, शांति प्रदान की, ताकि हम सभी बालक यीशु की राह पर चल कर कमजोर व नि:सहाय लोगों का सहारा बन सके़ं
सचमुच क्रिसमस हम सबों के लिए यह संदेश देता है कि हम एक ऐसे समाज का निर्माण करें, जो प्रेम पर आधारित हो, जहां मानव मूल्यों की कद्र हो़ मानव समाज धर्म, जाति और रंग के आधार पर न बंटे़ हमारी उदारता इतनी हो कि हम जरूरतमंद लोगों की सेवा नि:स्वार्थ ढंग से कर सके़ं
आस- पास का सामाजिक वातावरण ऐसा बन जाए, जहां लोग एक- दूसरे को विश्वास की दृष्टि से देख सके़ं तब नि:संदेह सबका क्रिसमस आनंदमय होगा़ ईसा हमारे घर व दिल में बसेंगे और सभी अमन चैन से जी सकेंगे़ ईसा की तरह गरीबी का सामना करके भी आध्यात्मिकता में धनी बन जायेंगे़
लेखक एक्सआइएसएस रांची के सहायक निदेशक हैं
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