अनियमितता उजागर : मुनाफे के लिए अस्पताल ने डॉक्टर की लिखी दवा का ब्रांड बदल दिया
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :07 Dec 2019 7:36 AM (IST)
विज्ञापन

औषधि निदेशालय की टीम ने राज अस्पताल में की जांच, अनियमितता उजागर रांची : राज्य औषधि निदेशालय द्वारा गठित जांच टीम ने राज अस्पताल की जांच कर उसकी रिपोर्ट निदेशालय को सौंप दी है. रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं. टीम ने पाया है कि डॉक्टर अस्पताल में भर्ती मरीज को जिस […]
विज्ञापन
औषधि निदेशालय की टीम ने राज अस्पताल में की जांच, अनियमितता उजागर
रांची : राज्य औषधि निदेशालय द्वारा गठित जांच टीम ने राज अस्पताल की जांच कर उसकी रिपोर्ट निदेशालय को सौंप दी है. रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं.
टीम ने पाया है कि डॉक्टर अस्पताल में भर्ती मरीज को जिस ब्रांड की दवा लिखते हैं, अस्पताल की फार्मेसी अपने मुनाफा के लिए उस ब्रांड को ही बदल देती है. इसका खुलासा अस्पताल में भर्ती हुए सुशील मिंज, एसडी राम व स्वर्ण कुजूर को डाॅक्टर द्वारा लिखी गयी दवा की सूची व अस्पताल की फार्मेसी द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूची का मिलान करने पर हुआ. टीम ने जब एमआरडी विभाग से मरीज के रिकाॅर्ड को मंगा कर देखा, तो इसकी पुष्टि हो गयी. वहीं डॉक्टरों को अगले दिन वार्ड में राउंड के दौरान दवा का ब्रांड बदले जाने की जानकारी मिलती है.
जांच में हड्डी इंप्लांट की खरीद में भी गड़बड़ी पायी गयी. अस्पताल में हड्डी का ऑपरेशन कराने आयी सरस्वती देवी के बिल की जांच टीम ने की, तो पता चला कि मेसर्स अग्रवाल सर्जिकल से हड्डी इंप्लांट को खरीदा गया है, लेकिन इंप्लांट मरीज के नाम पर नहीं, बल्कि डाॅक्टर के नाम पर मंगाया गया है.
मरीज को डॉक्टर के नाम का बिल ही जारी किया गया है. वहीं हृदय के मरीज के लिए मंगाये गये स्टेंट की खरीद में भी गड़बड़ी पायी गयी. उपकरण का स्टॉक रखने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता है, लेकिन जांच में लाइसेंस का कोई प्रमाण नहीं मिला है.
गौरतलब है कि प्रभात खबर में एक अक्तूबर को ‘दवा कंपनियों से सांठगांठ कर मरीजों को लूटने में लगे हैं कॉरपोरेट अस्पताल’ शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी. इसके बाद राज्य औषधि निदेशालय ने तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया था. छह अस्पतालों की जांच करने का आदेश दिया गया था. सूत्र बाताते हैं कि चिह्नित किये गये अस्पतालों की जांच हो गयी है, जिसमें से हिल व्यू अस्पताल, साईं अस्पताल व राज अस्पताल की रिपोर्ट निदेशालय को सौंप दी गयी है.
टीम ने जांच रिपोर्ट निदेशालय को सौंप दी है
स्टेंट व इंप्लांट की खरीद-बिक्री हम नहीं करते हैं. इसलिए मरीज के नाम से इंप्लांट मंगाया जाता है. इसमें डॉक्टर का नाम भी रहता है. डॉक्टर ने जिस ब्रांड की दवा लिखी, अगर वह हमारे पास नहीं है तो हम मल्टीनेशनल ब्रांड का वैकल्पिक कंपोजिशन देते हैं. एक मरीज के बिल में अधिक दवा का बिल हुआ था, लेकिन यह लिपिकीय भूल थी, जिसे सुधार लिया गया था.
योगेश गंभीर, संचालक, राज अस्पताल
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




