रांची : राहगीरों को ध्यान में रख सड़कों को डिजाइन करें
Updated at : 05 Dec 2019 9:15 AM (IST)
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रांची : भारत और राज्य सरकार की सहयोगी संस्था आइटीडीपी की ओर से समेकित शहरी विकास और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन प्रणाली पर बुधवार को प्रेस क्लब में कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस मौके पर संस्था के झारखंड हेड राजेंद्र वर्मा ने कहा कि रांची में यातायात को व्यवस्थित करने के लिए सरकार को सख्त […]
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रांची : भारत और राज्य सरकार की सहयोगी संस्था आइटीडीपी की ओर से समेकित शहरी विकास और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन प्रणाली पर बुधवार को प्रेस क्लब में कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस मौके पर संस्था के झारखंड हेड राजेंद्र वर्मा ने कहा कि रांची में यातायात को व्यवस्थित करने के लिए सरकार को सख्त कदम उठाने की जरूरत है.
सड़क पर पहला अधिकार पैदल चलनेवालों का होता है, उसी हिसाब से सड़कों को डिजाइन किया जाना चाहिए. लेकिन यहां की सड़कों को वाहन चालकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है. इस वजह से आम लोगों को सड़क पर सुरक्षित पैदल चलने में समस्या होती है. इस सोच को बदलने की जरूरत है.
इसके लिए राज्य सरकार के समक्ष चेन्नई का मॉडल रखा गया. चेन्नई के पौंडी बाजार की 1.7 किमी सड़क में कैरेज वे को कम कर टू लेन कर दिया गया. टू लेन में रोड के दोनों ओर 10-10 मीटर चौड़ा फुटपाथ बना दिया गया है.
इसका बड़ा फायदा यह हुआ कि दुकानदारों की बिक्री बढ़ गयी. महिलाएं-बुजुर्ग स्वयं को सुरक्षित महसूस करने लगे. इसे देखते हुए सरकार ने चेन्नई में और 10 जोन को इसी तर्ज पर विकसित करने का निर्देश दिया है. इसी तरह रांची में ट्रैफिक को व्यवस्थित करने के लिए सिटी बस पर जोर देना होगा.
23 रूट में 800 बस चलाने की जरूरत : राजेंद्र वर्मा ने कहा कि रांची में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को विकसित करने का प्लान तैयार कर सरकार को दिया गया है. इस पर काम चल रहा है. शहर के 23 रूटों को चिह्नित किया गया है, जहां सर्कल के अनुसार सिटी बसें चलेंगी.
इसके लिए करीब 800 सिटी बस चलाने की जरूरत है. पहले फेज में 200 से 250 सिटी बसों से इस सेवा की शुरुआत होगी. इसके बाद धीरे-धीरे इसकी संख्या में बढ़ोतरी की जायेगी. आइटीडीपी के एक्सपर्ट फराज अहमद ने कहा कि किसी भी सड़क को कुछ गाड़ियों के लिए नहीं बनाया जा सकता. सड़क का डिजाइन ऐसा होना चाहिए कि उसका इस्तेमाल सभी लोग समान रूप में करें. खासकर वैसे लोगों के लिए जिन्हें हमेशा से नजरअंदाज कर दिया जाता रहा है, जैसे- बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और दिव्यांग.
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