सुनिए झारखंड के नायकों को : खेल नीति बनी भी, तो लागू नहीं हो सकी

Updated at : 11 Nov 2019 1:36 AM (IST)
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सुनिए झारखंड के नायकों को : खेल नीति बनी भी, तो लागू नहीं हो सकी

रोजगार के लिए पलायन कर रहे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दीपिका कुमारी :झारखंड अलग राज्य बने 19 साल हो गये, लेकिन अब तक सरकार की ओर से खिलाड़ियों को नौकरी देने के लिए अब तक कोई गंभीर प्रयास नहीं किया गया है. यहां एक बार खेल नीति बनी भी, तो लागू नहीं हो सकी. दोबारा […]

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रोजगार के लिए पलायन कर रहे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी

दीपिका कुमारी :झारखंड अलग राज्य बने 19 साल हो गये, लेकिन अब तक सरकार की ओर से खिलाड़ियों को नौकरी देने के लिए अब तक कोई गंभीर प्रयास नहीं किया गया है. यहां एक बार खेल नीति बनी भी, तो लागू नहीं हो सकी. दोबारा उसमें संशोधन किया गया, लेकिन अब तक लागू नहीं हो पाने से खिलाड़ियों को कोई फायदा नहीं हुआ.
इसका परिणाम यह हुआ कि जिस राज्य ने देश को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दिये, वहां से पलायन शुरू हो गया. राज्य में कोई भी सरकार हो, उसे खिलाड़ियों के लिए रोजगार का सृजन करना चाहिए. तभी जाकर यहां के खिलाड़ी दूसरे राज्यों या दूसरे विभागों का रुख नहीं करेंगे. इसी से यहां पलायन भी रुकेगा.
इसके अलावा सरकार को पदक विजेता खिलाड़ियों को उचित सम्मान देने की ओर भी ध्यान देना चाहिए. हरियाणा, दिल्ली, ओड़िशा समेत अन्य राज्यों में पदक विजेता खिलाड़ियों को काफी कैश अवार्ड दिया जाता है. वहीं झारखंड में कैश अवार्ड की राशि काफी कम होती है. वो भी कई वर्षों बाद दी जाती है. राज्य सरकार को चाहिए कि यहां भी कैश अवार्ड की राशि बढ़ायी जाये.
सरकार ने यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम तो बनवा दिये, लेकिन खिलाड़ियों के विकास के बारे में नहीं सोचा. सरकार के इस रवैये से निराशा होती है. मेरा मानना है कि राज्य में सरकार जिसकी भी बने, वह खिलाड़ियों के इन मुद्दों पर ध्यान दे और इन्हें दूर करें, ताकि स्थानीय खिलाड़ी प्रोत्साहित हों और उनका पलायन भी रुके.
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वोटर चुनाव में अपने मत का इस्तेमाल जरूर करें और दूसरों को भी मतदान करने के लिए प्रेरित करें. मतदान करना आपका अधिकार है. एक-एक वोट की कीमत समझें. आपके सही निर्णय से ही राज्य को सही प्रतिनिधि मिल पायेगा.
दीपिका भारत की शीर्ष रिकर्व तीरंदाज है. दो बार वह ओलिंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी है. बिल्कुल निचले पायदान से उन्होंने तीरंदाजी की शुरुआत की और देश-विदेश में कई पदक जीते. 2006 में मेक्सिको में वर्ल्ड आर्चरी में गोल्ड जीता. फिर 2009 में अमेरिका में हुई 11वीं यूथ आर्चरी चैंपियनशिप का खिताब जीता. 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण, 2011 में इस्तांबुल और 2012 में टोक्यो में रजत हासिल किया. 2016 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
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