लोक कलाकारों को नहीं मिला उचित सम्मान
Updated at : 10 Nov 2019 12:19 AM (IST)
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मधु मंसूरी हंसमुख : लोककला राजनीतिक व समाज को प्रभावित करती है, जिसका राजनीति से हमेशा सरोकार रहता है. लोक कलाकार के माध्यम से कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए राजनीतिक दल कलाकारों को याद करते हैं, जिसमें लोक कलाकार व गायक बढ़ -चढ़ कर हिस्सा भी लेते हैं. लेकिन राज्य गठन के 19 साल […]
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मधु मंसूरी हंसमुख : लोककला राजनीतिक व समाज को प्रभावित करती है, जिसका राजनीति से हमेशा सरोकार रहता है. लोक कलाकार के माध्यम से कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए राजनीतिक दल कलाकारों को याद करते हैं, जिसमें लोक कलाकार व गायक बढ़ -चढ़ कर हिस्सा भी लेते हैं.
लेकिन राज्य गठन के 19 साल के बाद भी लोक कलाकारों, गायकों को उचित सम्मान नहीं मिल पाया है. राजनीतिज्ञों द्वारा गायकों को केवल मनोरंजन का साधन समझा गया. जिससे बहुतायत लोग गुमनाम जिंदगी जीने को विवश हो जाते हैं. हाल ही में मशहूर बांसुरी वादक कमलेश कच्छप की तंगी की हालत में मौत हो गयी.
उसे देखनेवाला कोई नहीं था. सरकार को लोक कलाकार, गायक को मंच दिलाने का काम करना चाहिए. आज वर्ग, धर्म, जाति के सहारे समाज को बांट कर राजनीतिज्ञ खुद को ऊपर उठाने का प्रयास कर रहे हैं, जो समाज के लिए घातक है. पक्ष-विपक्ष के राजनेता इसे समझें तथा राज्य के विकास में दलगत भावना से ऊपर उठ कर जनता के हित में काम करें. जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास के प्रति ठोस निर्णय एवं क्षेत्रीय भाषा का पाठ्यक्रम स्कूली स्तर पर लागू करें.
वोट की अपील
वोट करें तथा दूसरे
को प्रेरित करें : हंसमुख
विधानसभा चुनाव में अपना मत का प्रयोग अवश्य करें. साथ ही दूसरे लोगों को मतदान करने के लिए प्रेरित करें. मतदान करना आपका अधिकार है. एक-एक वोट की कीमत को समझें. आपके सही निर्णय से ही राज्य को सही उम्मीदवार मिल पायेगा.
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