100 अंकों की हो परीक्षा, विषय में भी बदलाव किया जाये : पारा शिक्षक

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रांची : एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने प्रस्तावित नियोजन एवं सेवा शर्त नियमावली का विरोध किया है. मोर्चा का कहना है कि नियमावली से शिक्षकों की मांग पूरी नहीं होगी. मोर्चा के संजय दुबे ने कहा है पारा शिक्षक 18 वर्षों से सेवा दे रहे हैं. सरकारी शिक्षक बनने के लिए भी इतनी कठिन […]

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रांची : एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने प्रस्तावित नियोजन एवं सेवा शर्त नियमावली का विरोध किया है. मोर्चा का कहना है कि नियमावली से शिक्षकों की मांग पूरी नहीं होगी. मोर्चा के संजय दुबे ने कहा है पारा शिक्षक 18 वर्षों से सेवा दे रहे हैं. सरकारी शिक्षक बनने के लिए भी इतनी कठिन प्रक्रिया नहीं अपनायी जाती है.

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शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद 10 वर्ष की सेवा, फिर शिक्षक पात्रता परीक्षा और इसके बाद सीमित आकलन परीक्षा में सफल होना अनिवार्य किया गया है. सीमित आकलन परीक्षा में पास मार्क्स भी 60 फीसदी है और परीक्षा दो पाली में होगी. उन्होंने कहा कि परीक्षा की प्रक्रिया को सरल किया जाये.
परीक्षा 100 अंकों की हो और पास मार्क्स 35 निर्धारित किया जाये. विषयों में भी बदलाव हो. शिक्षक पात्रता परीक्षा में सफल पारा शिक्षकों को सीमित परीक्षा में शामिल होने से छूट दी जाये. मामले में शीघ्र ही मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री रघुवर दास से मिलेगा. मोर्चा के हृषिकेश पाठक ने कहा है कि नियमावली में कहा गया है कि नियोजन व सेवा शर्त नियमावली समग्र शिक्षा अभियान के प्रभावी रहने तक ही मान्य होगी.
ऐसे में समग्र शिक्षा अभियान के समाप्त होने के बाद पारा शिक्षकों का क्या होगा? इस संबंध में नियमावली में कुछ भी नहीं है. पारा शिक्षकों का प्रशिक्षण नहीं बल्कि योगदान देने की तिथि को सेवा की गणना की जाये. पारा शिक्षक इस नियमावली का विरोध करेंगे.
10 नवंबर तक आपत्ति दर्ज करा सकते हैं पारा शिक्षक
इधर, प्रस्तावित नियोजन एवं सेवा शर्त नियमावली झारखंड शिक्षा परियोजना की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है. पारा शिक्षक 10 नवंबर तक इसपर अापत्ति दर्ज करा सकते हैं. पारा शिक्षकों की आपत्ति पर विचार होगा. इसके बाद नियमावली को अंतिम रूप मिलेगा.
नियमावली में परीक्षा में पास करने के लिए न्यूनतम 60 फीसदी अंक अनिवार्य है. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग और दिव्यांग अभ्यर्थियों को पांच फीसदी की छूट मिलेगी. वहीं आदिम जनजाति के अभ्यर्थियों को दो फीसदी की अतिरिक्त छूट का प्रावधान है.
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