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रांची : पहले "2500 में आता था एक ट्रक बालू, अब "4500 लग रहे

Updated at : 13 Oct 2019 1:42 AM (IST)
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रांची : पहले "2500 में आता था एक ट्रक बालू, अब "4500 लग रहे

स्टॉक किया हुआ बालू भी मिल रहा है ब्लैक में रांची : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने झारखंड में 10 जून से 15 अक्तूबर तक बालू घाटों से बालू की निकासी पर रोक लगा रखा है. इसके बावजूद बालू की कालाबाजारी हो रही है. मौजूदा स्थिति यह है कि एक ट्रैक्टर बालू लेने के लिए […]

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स्टॉक किया हुआ बालू भी मिल रहा है ब्लैक में
रांची : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने झारखंड में 10 जून से 15 अक्तूबर तक बालू घाटों से बालू की निकासी पर रोक लगा रखा है. इसके बावजूद बालू की कालाबाजारी हो रही है. मौजूदा स्थिति यह है कि एक ट्रैक्टर बालू लेने के लिए लोगों को 1500 रुपये ज्यादा चुकाने पड़ रहे हैं.
10 जून के पहले टर्बो ट्रक से बालू की कीमत 2500 थी, वही बालू आज 4500 रुपये में मिल रहा है. जबकि एक ट्रैक्टर बालू की कीमत पहले 1500 रुपये थी उसकी कीमत अब तीन हजार रुपये हो गयी है. एक डंफर बालू की कीमत जहां मई में नौ से 10 हजार रुपये थी, अब बढ़कर 17 हजार रुपये हो गयी है.
दूसरी ओर रोक के बावजूद बालू घाटों से चोरी-छिपे बालू की निकासी हो रही है. जिलों में लगातार अवैध बालू पकड़े जा रहे हैं. रांची जिले में ही पिछले तीन महीने में 92 केस पकड़े गये हैं. इनसे 15 लाख सीएफटी बालू जब्त किया गया, जिसकी नीलामी हाल में ही करायी गयी है. इससे 80 लाख 74 हजार रुपये जिला खनन कार्यालय को मिले.
बरसात में बालू की किल्लत न हो इसके लिए राज्य सरकार बालू स्टॉक करने के लिए डीलर लाइसेंस देती है. इन्हें स्टॉकिस्ट कहा जाता है.
ये स्टॉकिस्ट 10 जून तक बालू का स्टॉक रखते जाते हैं. 10 जून के बाद बालू स्टॉकिस्ट के माध्यम से ही मिलता है. रांची में पांच स्टॉकिस्ट को लाइसेंस मिला हुआ है. इनके द्वारा ही स्टॉक किये हुए बालू की आपूर्ति की जा रही है. रांची के छापर में एसकेएस मिनरल, ब्रह्मदेव प्रसाद, सोनाहातू में मिहिजाम वाइन ट्रेडर्स, चान्हो में डुमारो सैंड माइनिंग प्रोजेक्ट्स व तमाड़ में संजय कुमार मोदक को स्टॉकिस्ट लाइसेंस मिला हुआ है.
स्टॉकिस्ट करते हैं ब्लैक
झारखंड सरकार द्वारा जो बालू की दर निर्धारित की गयी है, उसके अनुसार एक सौ सीएफटी की दर 400 रुपये है. एक टर्बो 709 ट्रक में 130 सीएफटी बालू की क्षमता है.
इसके भाड़ा आदि खर्च जोड़कर दर करीब 2200 से 2500 रुपये तक ही आती है. जबकि आज की तिथि में इस दर पर कहीं भी बालू की आपूर्ति नहीं हो रही है. एक बालू कारोबारी ने बताया कि दर बढ़ने का कारण है कि स्टॉकिस्ट द्वारा बालू की क्राइसिस कर दी गयी है. मांग के अनुरूप बालू की आपूर्ति नहीं हो रही है. इस कारण बालू की कालाबाजारी बढ़ गयी है. हाइवा में भी आधे बालू की आपूर्ति की जा रही है.
अवैध ढुलाई जारी, स्पेशल ब्रांच ने भी किया है आगाह
राजधानी रांची से सटे इलाकों में अवैध तरीके से बालू, पत्थर और कोयले का अवैध उत्खनन हो रहा है. स्पेशल ब्रांच के एसपी (सुरक्षा) ने अवैध उत्खनन वाले स्थान और कारोबारियों के बारे में विस्तार से रिपोर्ट तैयार की है.
स्पेशल ब्रांच ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि रांची जिला के आसपास के इलाकों में कोयला, बालू और पत्थर का अवैध उत्खनन किया जा रहा है. उत्खनन करनेवाले व्यक्तियों के बारे में जांच-पड़ताल कर इसकी जानकारी स्पेशल ब्रांच को देने को कहा गया है. इसकी सूची भी डीएमओ को सितंबर माह में ही भेज दी गयी थी. डीएमओ द्वारा लगातार छापेमारी की जा रही है.
डीएमओ के अलावा एसडीओ, सीओ को भी अवैध बालू जब्त करने का अधिकार प्राप्त है. अबतक 92 वाहन जब्त किये जा चुके हैं. 15 अक्तूबर के बाद से एनजीटी की पाबंदी हट जायेगी पर रांची में बालू का लाइसेंसी अब कोई नहीं है. जेएसएमडीसी द्वारा निविदा कर दी गयी है. जबतक निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं होती तब तक स्टॉकिस्ट से ही बालू की आपूर्ति होती रहेगी. फिलहाल बालू की किल्लत नहीं है. पर्याप्त स्टॉक है.
रविकांत सिंह, डीएमओ, रांची
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