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रांची : छह लोगों को मिल सकती थी रोशनी, रखे-रखे खराब हो गये कॉर्निया

Updated at : 04 Sep 2019 8:52 AM (IST)
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रांची : छह लोगों को मिल सकती थी रोशनी, रखे-रखे खराब हो गये कॉर्निया

राजीव पांडेय रांची : देश भर में नेत्रदान पखवाड़ा चलाया जा रहा है. लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक करने के लिए रैलियां और कार्यक्रम हो रहे हैं. लेकिन, राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में यह अभियान फेल होता नजर आ रहा है. दरअसल, रिम्स आइ बैंक में रखे-रखे छह स्वस्थ कॉर्निया खराब हो […]

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राजीव पांडेय
रांची : देश भर में नेत्रदान पखवाड़ा चलाया जा रहा है. लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक करने के लिए रैलियां और कार्यक्रम हो रहे हैं. लेकिन, राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में यह अभियान फेल होता नजर आ रहा है. दरअसल, रिम्स आइ बैंक में रखे-रखे छह स्वस्थ कॉर्निया खराब हो गये. इसके लिए रिम्स का नेत्र रोग विभाग और आइ बैंक दोनों ही जिम्मेदार हैं.
तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव निधि खरे ने रिम्स के आइ बैंक को जीवंत किया था. शुरुआत 15 सितंबर 2018 से हुई, जब दो युवतियों को कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया गया था. उसके बाद श्रीमती खरे ने रिम्स आइ बैंक को 100 काॅर्निया ट्रांसप्लांट का लक्ष्य दिया था. इसके बाद रिम्स आइ बैंक को 51 काॅर्निया मिले.
ये सभी कॉर्निया मृत मरीजों के परिजनों की सहमति से निकाले गये थे. इनमें 26 कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया गया. शेष 25 कॉर्निया को आइ बैंक में सुरक्षित रख दिया गया. इनमें से छह कॉर्निया बिल्कुल स्वस्थ थे और इनसे किसी दृष्टिहीन व्यक्ति की आंखों की रोशनी आ सकती थी. लेकिन, ज्यादा दिन तक रखे रहने से छह स्वस्थ कॉर्निया खराब हो गये.
रिम्स नेत्र रोग विभाग व आइ बैंक की लापरवाही का नतीजा
25 में से 19 कॉर्निया खराब थे : आइ बैंक
रिम्स आइ बैंक के अधिकारी कहते हैं कि 25 में से 19 कॉर्निया खराब थे. स्वस्थ कॉर्निया लगाये जाने तक मरीज की आंख में इन्हें लगाया जा सकता था. इनमें से कुछ कॉर्निया को शोध व शिक्षण कार्य के लिए दिया गया है. वहीं, छह स्वस्थ कॉर्निया के लिए ग्रहणकर्ता की तलाश की जा रही थी, लेकिन ग्रहणकर्ता नहीं मिलने से ये खराब हो गये.
दूसरे आइ बैंक को कॉर्निया देने की अनुमति मांगी
रिम्स आइ बैंक ने स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा है कि ग्रहणकर्ता नहीं मिलने से आइ बैंक में रखे-रखे स्वस्थ कॉर्निया भी खराब हो जा रहे हैं. अगर सरकार अनुमति देती है, तो हम उन आइ बैंक को कॉर्निया दे देंगे, जिनके पास ग्रहणकर्ता पहले से तैयार हैं. इससे काॅर्निया का सदुपयोग हो पायेगा.
मृत्यु के छह घंटे में कॉर्निया सुरक्षित करना जरूरी
नेत्र विशेषज्ञ की मानें, तो मृत व्यक्ति के कॉर्निया को छह घंटे के भीतर सुरक्षित करना जरूरी है. अगर समय रहते उसका सही से रखरखाव नहीं किया गया, तो कॉर्निया खराब हो जाता है.
इसके अलावा अगर परिजन व्यक्ति के मृत होने पर अांखों को बंद नहीं करते हैं, ताे भी कॉर्निया खराब हो जाता है.
14 दिनों में खराब हो जाता है कॉर्निया
नेत्र के विशेषज्ञों की मानें, तो कॉर्निया ग्रहण करने (मृत व्यक्ति से लेने) के 14 दिनों के भीतर उसे ट्रांसप्लांट कर देना चाहिए. रिम्स में री-एजेंट कॉर्निसेल आने के बाद यह संभव हो पाया है.
दान के रूप में लिये जानेवाले कॉर्निया में से 50 फीसदी अक्सर खराब ही रहते हैं. हमारे पास ग्रहणकर्ता नहीं थे, जिससे कुछ काॅर्निया खराब हो गये. सरकार को पत्र लिखा गया है कि यह अनुमति दी जाये कि अगर काॅर्निया बचा है, तो निजी आइ बैंक को भेजा जाये. जागरूकता का प्रयास तो लगातार किया जा रहा है.
डॉ वीवी सिन्हा, विभागाध्यक्ष, नेत्र रोग विभाग, रिम्स
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