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रांची में राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने नेशनल ट्राइबल फेस्टिवल का किया उद्घाटन

Updated at : 23 Aug 2019 1:31 PM (IST)
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रांची में राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने नेशनल ट्राइबल फेस्टिवल का किया उद्घाटन

रांची : झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को रांची के मोरहाबादी स्थित जनजातीय कल्याण शोध संस्थान में तीन दिवसीय नेशनल ट्राइबल फेस्टिवल का उद्घाटन किया. डॉ रामदयाल मुंडा के 80वें जन्म दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से आदिवासी सभ्यता-संस्कृति को विश्व में अलग पहचान […]

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रांची : झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को रांची के मोरहाबादी स्थित जनजातीय कल्याण शोध संस्थान में तीन दिवसीय नेशनल ट्राइबल फेस्टिवल का उद्घाटन किया. डॉ रामदयाल मुंडा के 80वें जन्म दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से आदिवासी सभ्यता-संस्कृति को विश्व में अलग पहचान मिलेगी. उन्होंने कहा कि जनजातीय संग्रहालय को और बड़ा होना चाहिए.

राज्यपाल ने कहा कि सरकार की ओर से जो स्वयं सहायता समूह बने हैं, काफी अच्छा काम कर रहे हैं. उससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है. जनजातीय समाज जो उत्पाद बना रहा है, उसे बाजार मिल रहा है, महिलाएं सशक्त हो रही हैं. श्रीमती मुर्मू ने लेखकों से अनुरोध किया कि वे जनजातीय समाज की कला-संस्कृति के बारे में ज्यादा से ज्यादा लिखें, ताकि देश-विदेश के लोग जनजातीय समाज के बारे में जान सकें.

महामहिम ने मीडिया से अपील की कि वे जनजातीय कल्याण शोध संस्थान के पुस्तकालय के बारे में लोगों को जानकारी दें. उन्होंने कहा कि इस पुस्तकालय में 3,000 से अधिक पुस्तकें हैं. लोगों को इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है. मीडिया लोगों तक इस बात को पहुंचायें, ताकि लोग पुस्तकालय में आने के लिए प्रेरित हों.

तीन दिनों तक चलनेवाले इस फेस्टिवल में देश के कोने-कोने से जनजातीय साहित्यकार भाग लेंगे. संस्थान के निदेशक रणेंद्र कुमार ने कहा कि तीन दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में आदिवासी कविता, आदिवासी कहानी, आदिवासी उपन्यास, नाटक एवं अन्य गद्य विधाएं सहित आलोचना पर साहित्यकार अपनी बात रखेंगे.

इसमें विनोबा भावे विवि के कुलपति, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विवि के कुलपति, रांची विवि के कुलपति सहित अन्य गणमान्य अतिथियों का संबोधन होगा. ‘आदिवासी साहित्य विकास परंपरा’ पर परिचर्चा होगी. कार्यक्रम में अनुज लुगुन, प्रेमी मोनिका तोपनो, सुषमा असुर, नितीशा खलखो, जितराय हांसदा, भोगला सोरेन, विनोद कुमरे, डॉ मिथिलेश, प्रो एल खियांग्ते अपनी बात रखेंगे.

‘आदिवासी पुरखा साहित्य’ विषय पर जोराम गेलाम नावाम, डॉ गिरिधारी राम गौंझू, निसन रानी जमातिया, सुशीला धुर्वे, मनसिंद बड़ामुद, गणेश मुर्मू, जमुना बीनी तादर, शांति खलखो, नारायण उरांव, निर्मला पुतुल, धनेश्वर मांझी, डॉ सुरेश जगन्नाधाम, डॉ जिंदर सिंह मुंडा, संतोष कुमार सोनकर वक्तव्य देंगे.

समारोह के दौरान ‘आदिवासी मातृ भाषाओं का साहित्य’ विषय पर परिचर्चा होगी. इसमें वाल्टर भेंगरा, डॉ महेश्वरी गावित, कविता कर्मकार, दिनकर कुमार, डॉ इग्नासिया टोप्पो, प्रमोद मीणा व बीरबल सिंह अपने विचार रखेंगे.

‘आदिवासी साहित्य आैर इतिहास’ पर डॉ महेश्वरी गावित, प्रो एल खियांग्ते, डॉ सिकरादास तिर्की, कमल कुमार तांती, मेरी हांसदा, सुशीला धुर्वे, राकेश कुमार सिंह, दौलत रजवार, राहुल सिंह व नंदलाल सिंह भूमिज अपनी बात रखेंगे. जनजातीय नृत्य, नाटक का मंचन व फिल्म का प्रदर्शन भी होगा.

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