बहनों ने राखी बांधकर किया मुफीज का स्वागत
Updated at : 13 Aug 2019 7:54 AM (IST)
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रांची : हिंदपीढ़ी खेत मोहल्ला निवासी मुफीज आलम उर्फ सितारे ढाई साल बाद सोमवार को अपने परिवार से मिल पाये. इस मौके पर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था. उनके घर आने पर दोनों बहनों इसरत परवीन और नुसरत परवीन ने ऊपर वाले का शुक्रिया जताया. दोनों बहनों ने एक साथ बकरीद और रक्षाबंधन का […]
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रांची : हिंदपीढ़ी खेत मोहल्ला निवासी मुफीज आलम उर्फ सितारे ढाई साल बाद सोमवार को अपने परिवार से मिल पाये. इस मौके पर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था. उनके घर आने पर दोनों बहनों इसरत परवीन और नुसरत परवीन ने ऊपर वाले का शुक्रिया जताया. दोनों बहनों ने एक साथ बकरीद और रक्षाबंधन का त्योहार मनाया़
उन्होंने कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास का हम लोग जितना शुक्रिया अदा करें, कम है़ उनके कारण ही हमें दोगुनी नहीं, बल्कि चौगुनी खुशी मिली है़ झारखंड सरकार के प्रयास से तीन महीने से कंपनी द्वारा जबरन नहीं आने देने की समस्या का समाधान हो पाया.
झारखंड के मुख्यमंत्री और राज्यपाल के प्रयास ने हमारे भाई को दूर देश से अपने वतन लाकर परिवार से मिला दिया़ इतनी खुशी मिली है कि हम पूरे मोहल्ले में मिठाई बांटेंगे़ बकरीद का दिन भी है़ पूरे मोहल्ले को दावत तो रहेगा ही़ पूरे मोहल्ले के लोगों ने मुफीज को गले ही नहीं लगाया,बल्कि उसे कंधे पर उठाकर जश्न मनाया़
हिंदपीढ़ी से लेकर डाेरंडा तक मनाया गया जश्न
हिंदपीढ़ी में मुफीज का अपना घर है, जबकि उनकी बहन इसरत का ससुराल डोरंडा में है़ मुफीज के आने की खुशी में हिंदपीढ़ी से लेकर डोरंडा तक जश्न का माहौल था़ बहन इसरत और नुसरत ने भाई के घर आने की खुशी में मिठाई और राखी की थाल सजाकर रखी थी़ भाई के घर आते ही उन्हें मिठाई खिलायी और राखी बांधकर गंगा जमुनी तहजीब का परिचय दिया़
बहन इसरत परवीन ने बताया कि मुफीज भाइयों में छोटा है़ साजिद आलम और खुर्शीद आलम के बाद तीसरे नंबर पर मुफीज आलम है़ं उनके बाद दोनों बहनें इसरत व नुसरत परवीन है़ं सभी भाई-बहन काफी प्रेम से रहते हैं. पिता सफदर आलम और माता कुरैसा आलम का कुछ दिन पहले निधन हो चुका है़ उनका दादी घर लोअर बाजार थाना क्षेत्र की कलाल टोली में है़
दोस्त की दुआ व अिधकारियों की मेहनत रंग लायी
मुफीज ने बताया कि दो साल चार महीना पहले वह रांची से सऊदी गये थे़ 12 अप्रैल को जब उन्होंने घर आने के लिए वेतन मांगा, तो जहां वह काम करते थे, वहां के मालिक ने वेतन नहीं दिया. इसके विपरीत 20 हजार याल का सोना चोरी करने का आरोप लगाकर केस कर दिया़ उसके बाद 40 दिन तक उन्हें पुलिस ने अपने पास रखा़ किसी तरह उन्होंने अपने घरवालों से संपर्क किया और सारी बात बतायी़ उनकी बहन, भाई और दोस्त सतीश गोराईं ने मुख्यमंत्री से गुहार लगायी़ उन्होंने भारत मंत्रालय से गुहार लगायी़
मुफीज के धुर्वा सेक्टर दो निवासी दोस्त सतीश गोराईं ने बताया कि उन्हें जब जानकारी मिली, ताे साजिद आलम, खुर्शीद आलम व मुफीज की बहनों को साथ लेकर राज्यपाल व मुख्यमंत्री से मुलाकात की. मुख्यमंत्री के निर्देश पर दिल्ली में आप्त सचिव केपी बलियान, एडीजी अनिल पालटा और रमेश गु्प्ता आदि ने मदद की , जिसके कारण मुफीज घर लौट सके.
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