रांची : आवेदन जमा करने के 12 साल बाद हेडमास्टर की नियुक्ति के लिए हुई काउंसेलिंग, सेवानिवृत्त हो गये, तब आया बुलावा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 Aug 2019 9:37 AM

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रांची : राज्य के हाइस्कूल में प्रधानाध्यापक की नियुक्ति के लिए चयनित अभ्यर्थियों की बुधवार को काउंसेलिंग हुई. माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने काउंसेलिंग के लिए 59 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति को लेकर प्रमाण पत्रों की जांच के लिए बुलाया था. जिसमें से 38 अभ्यर्थी शामिल हुए. 21 अभ्यर्थी काउंसेलिंग में नहीं पहुंचे. प्रमाण पत्रों की […]

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रांची : राज्य के हाइस्कूल में प्रधानाध्यापक की नियुक्ति के लिए चयनित अभ्यर्थियों की बुधवार को काउंसेलिंग हुई. माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने काउंसेलिंग के लिए 59 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति को लेकर प्रमाण पत्रों की जांच के लिए बुलाया था. जिसमें से 38 अभ्यर्थी शामिल हुए.
21 अभ्यर्थी काउंसेलिंग में नहीं पहुंचे. प्रमाण पत्रों की जांच जिला स्कूल सभागार में हुई. काउंसेलिंग में शामिल होने आये कई अभ्यर्थियों की उम्र सीमा गुजर गयी थी. कुछ अभ्यर्थियों ने बताया कि वे तीन-चार साल पहले ही सेवानिवृत्त हो गये. अब सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें काउंसेलिंग में शामिल होने के लिए बुलाया गया है. काउंसेलिंग में शामिल लगभग दर्जनभर अभ्यर्थियों के सेवानिवृत्त होने की उम्र एक से दो वर्ष बची हुई है. कुछ तो नियुक्ति के छह माह के अंदर ही सेवानिवृत्त हो जायेंगे. राज्य के हाइस्कूलों में 257 प्रधानाध्यापक की नियुक्ति के लिए वर्ष 2006 में आवेदन आमंत्रित किये गये थे.
वर्ष 2007 में नियुक्ति के लिए परीक्षा हुई. वर्ष 2009 में मेरिट लिस्ट जारी की गयी. पहली मेरिट लिस्ट के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई, लेकिन दूसरी लिस्ट में चयनित अभ्यर्थियों का मामला लटक गया. इसके बाद कुछ अभ्यर्थी हाइकोर्ट चले गये. हाइकोर्ट के आदेश के बाद कुछ अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई. इसके बाद निदेशालय ने नियुक्ति परीक्षा में चयनित 59 और अभ्यर्थियों का नाम काउंसेलिंग के लिए जारी किया.
अधिकतम उम्र सीमा 50 वर्ष
हाइस्कूल हेडमास्टर नियुक्ति परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों की अधिकतम उम्र सीमा 50 वर्ष थी. ऐसे में एक जनवरी 2006 को जिन अभ्यर्थियों की उम्र 48 से 50 वर्ष तक थी, वैसे अभ्यर्थी परीक्षा में सफल होने के बाद भी नियुक्ति से वंचित हो गये. शिक्षक प्रधानाध्यापक बनने से पहले ही सेवानिवृत्त हो गये. उल्लेखनीय है कि प्रधानाध्यापक बनने के लिए दस वर्ष का शैक्षणिक अनुभव होना भी अनिवार्य था.
अब नहीं मिलेगा कोई मौका
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि वैसे अभ्यर्थी जो काउंसेलिंग में शामिल नहीं हुए, उन्हें भविष्य में कोई और अवसर नहीं दिया जायेगा.
केस स्टडी
तीसरे स्थान पर रहे लेकिन नहीं हुई नियुक्ति
भारत भूषण श्रीवास्तव हाइस्कूल प्रधानाध्यापक नियुक्ति के लिए जारी मेरिट लिस्ट में तीसरे स्थान पर थे, पर उनकी नियुक्ति नहीं हुई. श्री श्रीवास्तव की नियुक्ति का मामला विधानसभा में भी उठा था. प्रधानाध्यापक नियुक्ति की काउंसेलिंग के लिए जारी लिस्ट में भारत भूषण श्रीवास्तव का भी नाम शामिल था. वे बुधवार को जिला स्कूल पहुंचे थे. उन्होंने बताया कि वे मई 2016 में ही सेवानिवृत्त हो गये. उन्होंने कहा कि चयन के बाद भी उनकी नियुक्ति इतने वर्षों तक नहीं की गयी, सरकार उसकी क्षतिपूर्ति करें.
शिक्षा विभाग का लगाती रही चक्कर
सर्वोदय हाइस्कूल नवाडीह पलामू की शिक्षिका एल पन्नाकाउंसेलिंग में शामिल होने रांची अायी थीं. बताया कि चयनित होने के बाद भी उनकी नियुक्ति नहीं हुई. वे शिक्षा विभाग का चक्कर लगाती रहीं. 31 मई 2016 को सेवानिवृत्त हो गयी. उसने बताया कि वह काउंसेलिंग में तो शामिल हुई, पर उसकी नियुक्ति होने की संभावना नहीं है.
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