धारा 370 इफेक्ट : रांची में ब्याही दो कश्मीरी महिलाओं ने जतायी खुशी, कहा - कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा हो जायेगा
Updated at : 07 Aug 2019 7:54 AM (IST)
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कश्मीर में रहने और बसने का मिला हक : नीलू भगत रांची : रांची में ब्याही गयी कश्मीर की बेटी नीलू भगत के जीवन में पलभर में ही बड़ा बदलाव हो गया है. कश्मीर से धारा 370 और 35 ए हटने से जिंदगी की दिशा ही बदल गयी है. शादी के बाद कल तक बेगाना […]
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कश्मीर में रहने और बसने का मिला हक : नीलू भगत
रांची : रांची में ब्याही गयी कश्मीर की बेटी नीलू भगत के जीवन में पलभर में ही बड़ा बदलाव हो गया है. कश्मीर से धारा 370 और 35 ए हटने से जिंदगी की दिशा ही बदल गयी है.
शादी के बाद कल तक बेगाना सा लगनेवाला कश्मीर अब हकीकत में अपना हो गया है. अब कानूनन वो हक मिल गया है, जिसकी वह हकदार हैं. कल से पूरा परिवार सुखद अनुभव कर रहा है. नीलू कहती हैं : फैसले के बाद पलभर में सबकुछ बदल गया है. अब हकीकत में अपने कश्मीर में रहने-बसने का हक मिल गया है. पिता ने शादी के पहले ही सेब का गार्डेन गिफ्ट किया था, लेकिन इस पर से अधिकार चला गया था.
क्योंकि उन्होंने रांची के अजय भगत से शादी कर ली थी
पिता की काफी संपत्ति रहने के बावजूद वहां एक इंच जमीन पर भी हक नहीं रह गया था. वह कहती हैं : मायके से लगाव और झुकाव तो स्वाभाविक है. चूंकि कश्मीर में बचपन गुजरा, इसलिए भी वहां की मिट्टी से प्यार है. कल तक कानूनन कश्मीर बेगाना सा लगने लगा था, लेकिन अब वास्तव में बहुत खुशी मिली है.
कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा हो जायेगा
नीलू की शादी वर्ष 2012 में रातू रोड के अजय भगत से हुई थी. नीलू के पिता एम मल्लिक का घर श्रीनगर में लाल चौक के पास है. वह कहती हैं कि हम लोगों ने कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा हो जायेगा और हमारी जिंदगी बदल जायेगी. कश्मीर के बाहर शादी करने पर अपनी मिट्टी से सारी आस छूट गयी थी.
अब तो तुरंत कश्मीर पहुंचकर अपनी सेब की खेती देखने का मन कर रहा है. अब उस पर हमारा अधिकार होगा. हम वहां जायेंगे. वहां पिता की जमीन पर घर भी बना सकेंगे. मिट्टी से जुड़ सकेंगे. मेरी बेटी को भी संपत्ति पर अधिकार मिलेगा. यूं कहें कि हमें अपनी मिट्टी से दूर होने से बचा लिया गया.
370 का हटना सपनों का सच होने जैसा है : अनीता
रांची : पांच अगस्त हर कश्मीरी पंडित के लिए एक ऐतिहासिक दिन है और मैं इसका अपवाद नहीं हूं. मेरे लिए यह सपने के सच होने जैसा है, क्योंकि मैंने कभी नहीं सोचा था कि अनुच्छेद 370 को खत्म किया जा सकता है. यह कहना है अमेटी यूनिवर्सिटी, झारखंड में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत अनिता शेखर का. उन्होंने कहा कि जिस कश्मीर में मैंने जन्म लिया, पली-बढ़ी.
जो कश्मीर मेरा था, वहीं एक गैर कश्मीरी के साथ शादी के बाद मैंने अपनी मातृभूमि पर अधिकार खो दिया था. उस मातृभूमि पर, जहां की खूबसूरत वादियों में मैंने अपना बचपन बिताया था. श्रीमती शेखर ने कहा कि धारा 370 समाप्त होते ही अब मैं कम से कम अपनी जड़ों की यात्रा कर सकूंगी और एक जमीन भी खरीद सकती हूं.
श्रीनगर की विशाल डल झील की सुंदरता देख सकती हूं .कश्मीर की शांत वादियों को महसूस कर सकती हूं. हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का धन्यवाद, जिन्होंने हमें एक ऐसे स्थान से संबंधित होने का अधिकार दिया, जो मेरा सुंदर कश्मीर है.
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