रांची रिम्स का आइसोलेशन वार्ड बदहाल, जहां हो रहा है इलाज वहीं पनप रही बीमारी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Jul 2019 8:24 AM
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रांची : बरसात का मौसम शुरू होने के साथ ही रिम्स में मच्छर जनित बीमारियों (डेंगू, मलेरिया और चिकिनगुनिया) के शिकार लोग पहुंचने लगे हैं. ऐसे मरीजों के इलाज के लिए रिम्स के ग्राउंड फ्लोर में आइसाेलेशन वार्ड बनाया गया है, लेकिन चिंता की बात यह है कि आइसोलेशन में ही गंदगी और जलजमाव की […]
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रांची : बरसात का मौसम शुरू होने के साथ ही रिम्स में मच्छर जनित बीमारियों (डेंगू, मलेरिया और चिकिनगुनिया) के शिकार लोग पहुंचने लगे हैं. ऐसे मरीजों के इलाज के लिए रिम्स के ग्राउंड फ्लोर में आइसाेलेशन वार्ड बनाया गया है, लेकिन चिंता की बात यह है कि आइसोलेशन में ही गंदगी और जलजमाव की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यहां इलाज करानेवाले मरीज कैसे स्वस्थ होंगे?
वार्ड का कॉरीडोर और वार्ड तो साफ है, लेकिन शौचालय जानेवाले रास्ते में तालाब के आकार क्षेत्र है, जिसमें कचरा व कबाड़ जमा है. वहीं, रास्ते में जलजमाव भी है. शौचालय तक पहुंचने के लिए मरीज व उनके परिजनों ने ईंट रख दी हैं, ताकि पानी में पैर नहीं पड़े. शौचालय की खिड़की की दीवार की ग्रिल टूटी है, जिससे बाहर से मच्छर-मक्खी वार्ड में पहुंचते हैं.
अस्पताल परिसर में जगह-जगह पड़े कबाड़ में बरसात का पानी जमा होने लगा है, जिसमें मच्छरोंके लार्वा पनप रहे हैं. इसके अलावा रिम्स के बेसमेंट में भी पानी जमा होने लगा है. आशंका जतायी जा रही है कि जब बरसात अपने चरम पर होगी, तो हालात और भी बदतर हो जायेंगे.
क्लिनिकल मलेरिया से पीड़ित पांच जवान है भर्ती : रिम्स के आइसोलेशन वार्ड में क्लिनिकल मलेरिया से पांच पीड़ित जवानों का इलाज चल रहा है. जवानों की स्थिति स्थिर है, लेकिन पांचों जवानों का डेंंगू व चिकनगुनिया की जांच के लिए ब्लड सैंपल भेजा गया है. जांच रिपोर्ट आने के बाद दवाएं शुरू की जायेंगी.
इमरजेंसी के गेट पर ही जमा है पानी
रिम्स के इमरजेंसी के प्रवेश द्वार पर ही बारिश का पानी जमा है, जिसे पार करने में मरीज व उनके परिजनों को परेशानी हो रही है. सबसे ज्यादा परेशानी महिला व बच्चों को रही है. वह फिसल कर गिर रहे हैं. सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि उन्होंने कई लोगों को फिसलने से बचाया है. प्रवेश द्वार से पानी हटाना चाहिए. बरसात में यहां पानी जमा न हो, यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए.
साफ-सफाई के लिए एजेंसी को जिम्मेदारी दी गयी है. अाइसोलेशन वार्ड साफ-सुथरा होना ही चाहिए, क्योंकि यहां संक्रमित मरीजों का इलाज किया जाता है. एजेंसी को निर्देश दिया जायेगा कि वह बरसात में परिसर की अतिरिक्त साफ-सफाई कराये.
डाॅ दिनेश कुमार सिंह, निदेशक, रिम्स
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