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मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा- आदिवासियों का एक ही बार बनेगा जाति प्रमाण पत्र, हमेशा मान्य होगा

Updated at : 29 Jun 2019 2:03 AM (IST)
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मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा- आदिवासियों का एक ही बार बनेगा जाति प्रमाण पत्र, हमेशा मान्य होगा

रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि आदिवासियों का जाति प्रमाण पत्र एक ही बार बनेगा, जो पूरे जीवन में मान्य होगा. प्रोजेक्ट भवन में बीडीओ और सीओ के साथ आयोजित बैठक में श्री दास ने कहा : लोग जाति प्रमाण पत्र के लिए परेशान हैं. अधिकारी प्रमाण पत्र जारी करने में कोताही […]

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रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि आदिवासियों का जाति प्रमाण पत्र एक ही बार बनेगा, जो पूरे जीवन में मान्य होगा. प्रोजेक्ट भवन में बीडीओ और सीओ के साथ आयोजित बैठक में श्री दास ने कहा : लोग जाति प्रमाण पत्र के लिए परेशान हैं. अधिकारी प्रमाण पत्र जारी करने में कोताही न करें.

खतियान में नाम न हो, तो गांवों में ग्राम सभा और शहरी क्षेत्र में वार्ड समिति द्वारा जाति से संबंधित स्वीकृति के बाद जाति प्रमाणपत्र से संबंधित आवेदन के आधार पर प्रमाणपत्र निर्गत करें. आवेदकों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए.

मुख्यमंत्री ने मानकी मुंडा, ग्राम प्रधान, डाकुआ, जोगमांझी समेत अन्य को सरकार द्वारा निर्धारित सम्मान राशि का भुगतान एक सप्ताह के अंदर करने का निर्देश दिया. कहा कि पहचान के लिए संबंधित मुखिया, मानकी मुंडा, ग्राम प्रधान अपने स्तर से जांच करें.
अंचल अधिकारी छूट गये लोगों की सूची तैयार कर उनको लाभान्वित करने का प्रस्ताव दें. 30 सितंबर तक ग्राम सभा से अनुमोदित योजनाओं को धरातल पर उतारे. लोग असंतुष्ट होते हैं, तो सरकार बदनाम होती है.
आजाद भारत में लोगों पर शासन नहीं, उनकी सेवा करनी चाहिए. लालफीताशाही नहीं चलेगी. लोकतंत्र में शासन, प्रशासन और जनता के बीच रिश्ता होना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को वित्तीय सहायता प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना का लाभ समय पर उपलब्ध कराना है.
सभी अंचल अधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी इस बात को गंभीरता से लें. किसानों द्वारा दिये गये आवेदनों का निष्पादन एक सप्ताह के अंदर होना चाहिए. अधिकारी दलित और आदिवासी किसानों पर विशेष ध्यान दें. नया भारत और नया झारखंड बनाने के लिए कार्य संस्कृति में बदलाव जरूरी है. उन्होंने किसानों को जुलाई में योजना का प्रथम किस्त और दुर्गा पूजा के समय दूसरा किस्त देने का लक्ष्य निर्धारित किया.
बैठक में ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा, भू-राजस्व मंत्री अमर कुमार बाउरी, मुख्य सचिव डीके तिवारी, अपर मुख्य सचिव सह विकास आयुक्त सुखदेव सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ सुनील कुमार वर्णवाल, ग्रामीण विकास सचिव अविनाश कुमार, भू-राजस्व सचिव केके सोन व सचिव पंचायती राज प्रवीण टोप्पो समेत राज्य के सभी बीडीओ और सीओ उपस्थित थे.
जंगल में रहनेवाले लोगों को सुविधा देना प्राथमिकता : मुख्यमंत्री ने कहा है कि जंगल में रहनेवाले लोगों को सड़क, पानी, बिजली जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है. जंगलों में रहनेवाले लोगों को वन पट्टा दे दिया गया है. अब उन तक सुविधाएं भी पहुंचानी है. श्री दास वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की समीक्षा बैठक में बोल रहे थे.
उन्होंने डीएफओ से जंगल में जरूरत के मुताबिक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिया. मुख्यमंत्री ने इस वर्ष सात जुलाई से छह अगस्त तक आयोजित किये जाने वाले नदी सह वन महोत्सव से ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने के निर्देश दिये. बैठक में वन विभाग के अपर मुख्य सचिव इंदुशेखर चतुर्वेदी, सीएम के प्रधान सचिव डॉ सुनील बर्णवाल, पीसीसीएफ संजय कुमार आदि उपस्थित थे.
सीएम ने कहा
आवेदकों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए
शासन, प्रशासन और जनता के बीच रिश्ता होना चाहिए
असुंता से घूस मांगने की खबर पर सीएम हुए नाराज
श्री दास ने पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी असुंता लकड़ा से जमीन की रसीद निर्गत करने के लिए घूस मांगने की खबर पर नाराजगी जतायी. उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं का सामने आना शर्मनाक है. देश काे गौरवान्वित करनेवाली अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी को भी अफसरों, कर्मचारियों ने नहीं बख्शा. इस तरह की घटना बरदाश्त करने लायक नहीं है. ऐसे में मामलों में निश्चित रूप से कार्रवाई होनी चाहिए.
घूस मांगने के मामले की सीओ करेंगे जांच : असुंता लकड़ा से घूस मांगे जाने के मामले की जांच अरगोड़ा सीओ रवींद्र कुमार करेंगे. उन्होंने बताया कि किस कर्मचारी ने उनसे पैसे की मांग की थी और कितना पैसा मांगा गया था, इसकी जांच की जायेगी. गौरतलब है कि असुंता लकड़ा से अरगोड़ा अंचल में मालगुजारी की रसीद कटवाने के लिये पैसे मांगे गये थे. इससे पहले भी वह रसीद कटवाने के लिये दो बार अंचल कार्यालय का चक्कर लगा चुकी थीं. तीसरी बार में उनकी जमीन की रसीद काटी गयी.
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