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सितंबर तक होगा लघु जलापूर्ति योजनाओं का निर्माण

Updated at : 21 Jun 2019 2:31 AM (IST)
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सितंबर तक होगा लघु जलापूर्ति योजनाओं का निर्माण

रांची : सरकार राज्य के सभी आदिम जनजाति, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति समुदाय के 13,500 टाेलों में सौर ऊर्जा आधारित लघु जलापूर्ति योजनाओं का निर्माण कर रही है. इस वर्ष सितंबर माह के अंत तक योजनाएं पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की सचिव अाराधना पटनायक ने मुख्यमंत्री […]

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रांची : सरकार राज्य के सभी आदिम जनजाति, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति समुदाय के 13,500 टाेलों में सौर ऊर्जा आधारित लघु जलापूर्ति योजनाओं का निर्माण कर रही है. इस वर्ष सितंबर माह के अंत तक योजनाएं पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है.

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की सचिव अाराधना पटनायक ने मुख्यमंत्री जन जल योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए आयोजित कार्यशाला में अभियंताओं को संबोधित करते हुए यह बातें की.
श्रीमती पटनायक ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति के नये स्रोतों का निर्माण व पुराने स्रोतों का सुदृढ़ीकरण कर सभी घरों में नल से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए काम किया जा रहा है.
चरणबद्ध तरीके से कार्ययोजना तैयार कर वर्ष 2022 तक राज्य के सभी टोलों और बसाहट में पाइप से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाना है. सितंबर तक सौर ऊर्जा आधारित ट्यूबलर स्टील के गैल्वेनाइज्ड फ्रेम आधारित संरचना वाली 13,500 लघु जलापूर्ति योजनाओं के जरिये शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जानी है. उन्होंने कहा कि इसमें अभियंताओं को अहम भूमिका निभाते हुए योजनाओं को धरातल पर लागू करने में गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करना होगा.
किसी भी हाल में गुणवत्ता से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. संवेदकों का चयन पुराने कार्य अनुभव व कुशलता को ध्यान रखते हुए किया जाये. आनेवाले तीन महीनों में मिशन मोड में काम करना होगा. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के ेsअभियंता प्रमुख श्वेताभ कुमार ने कहा कि कई राज्यों में स्टील के गैल्वेनाइज्ड फ्रेम आधारित संरचना वाले और सौर ऊर्जा से संचालित लघु जलापूर्ति योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है.
सुदूर क्षेत्रों व सतही जल के अभाव वाले इलाकों में सौर ऊर्जा आधारित लघु जलापूर्ति योजनाओं से पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है. योजना के गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन व प्रासंगिकता को ध्यान में रखते हुए मानक तैयार किये गये हैं. कार्यशाला में विभाग के सभी कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता व विभिन्न स्थानों से आये सोलर पैनल एवं सोलर पंप निर्माता व उससे संबंधित तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए.
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