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रांची : निजी इंजीनियरिंग कॉलेज के 3000 छात्रों की परीक्षा पर संशय के बादल

Updated at : 12 Jun 2019 8:21 AM (IST)
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रांची : निजी इंजीनियरिंग कॉलेज के 3000 छात्रों की परीक्षा पर संशय के बादल

शकील अख्तर एफिलिएशन नहीं मिलने के कारण अब यूनिवर्सिटी परीक्षा नहीं ले पायेगी रांची : निजी व पीपीपी मोड पर चलनेवाले इंजीनियरिंग कॉलेजों के 3000 से अधिक छात्रों के परीक्षा पर संशय बरकरार है. इसमें 500 से अधिक वैसे छात्र हैं, जिनका प्लेसमेंट हो चुका है और उन्हें पहली जुलाई को योगदान देना है. लेकिन […]

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शकील अख्तर
एफिलिएशन नहीं मिलने के कारण अब यूनिवर्सिटी परीक्षा नहीं ले पायेगी
रांची : निजी व पीपीपी मोड पर चलनेवाले इंजीनियरिंग कॉलेजों के 3000 से अधिक छात्रों के परीक्षा पर संशय बरकरार है. इसमें 500 से अधिक वैसे छात्र हैं, जिनका प्लेसमेंट हो चुका है और उन्हें पहली जुलाई को योगदान देना है.
लेकिन राज्य सरकार की ओर से संबद्धता (एफिलिएशन) नहीं प्रदान करने के कारण अब तक परीक्षा नहीं हो सकी है. छात्रों के भविष्य पर पड़नेवाले कुप्रभाव को देखते हुए रामगढ़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग सहित अन्य ने हाइकोर्ट में रिट याचिका दायर की है.
राज्य में लागू नियम के तहत निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों को एफिलिएशन नहीं मिलने की स्थिति में संबंधित यूनिवर्सिटी परीक्षा नहीं ले सकती है. सरकार द्वारा एफिलिएशन नहीं देने से कोल्हान, विनोबा भावे सहित अन्य विश्वविद्यालयों ने परीक्षा लेने से इनकार कर दिया है. विनोबा भावे विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा लेने से इनकार करने के बाद रामगढ़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने इसे हाइकोर्ट में चुनौती दी है.
कॉलेज की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर के कॉलेज को बीटेक कोर्स (इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर और सिविल इंजीनियरिंग) के शैक्षणिक सत्र को एफिलिएशन नहीं देने का आदेश जारी किया गया है.
कॉलेज ने ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन(एआइसीटीइ) के अनुमोदन (एप्रूवल) के बाद 15 मई से पहले शैक्षणिक सत्र 2016-17 और 2017-18 के एफिलिएशन के लिए विश्वविद्यालय में आवेदन दिया. साथ ही इसके लिए विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित फीस की रकम भी जमा की. कॉलेज के आवेदन को विश्वविद्यालय द्वारा अनुमोदन के लिए सरकार के पास निर्धारित समयसीमा में भेजा जाना था, लेकिन विश्वविद्यालय ने समय पर सरकार के पास नहीं भेजा.
राज्य में एफिलिएशन का प्रावधान व सुप्रीम कोर्ट का आदेश
राज्य में तकनीकी कॉलेजों के एफिलिएशन देने का प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप नहीं है. ज्या गोकुल एजुकेशनल ट्रस्ट बनाम केरल सरकार के मामले (2589 /2000) की सुनवाई के बाद अपने आदेश में यह कहा कि विभिन्न तकनीकी कोर्स के लिए अधिसूचित केंद्रीय अधिनियम के तहत संबंधित कोर्स के लिए एफिलिएशन, एक्सेटेंशन देने के लिए विश्वविद्यालय ही सक्षम है.
इसमें राज्य सरकार के अनुमोदन की जरूरत नहीं है. इस आदेश में एफिलिएशन देने के लिए अंतिम तिथि 15 मई निर्धारित की गयी है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने आदेश जारी कर मेडिकल कॉलेजों के एफिलिएशन का अधिकार विश्वविद्यालय को दे दिया. लेकिन उच्च तकनीकी शिक्षा विभाग ने एफिलिएशन देने के मामले में अपनी शक्ति बरकरार रखी. इसकी वजह से इंजीनियरिंग कॉलेजों के एफिलिएशन के आवेदन को विश्वविद्यालय द्वारा सरकार के पास अनुमोदन के लिए भेजा गया.
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश में निर्धारित तिथि 15 मई के बाद आवेदन मिलने को आधार बना कर एफिलिएशन देने से इनकार कर रही है. सरकार के अनुमोदन के बाद रांची और कोल्हान विश्वविद्यालय की ओर से एक-एक साल के लिए एफिलिएशन देने का प्रावधान किया है.
जबकि सरकार के अनुमोदन के बाद कोल्हान विश्विद्यालय द्वारा इंजीनियरिंग कॉलेजों को चार साल के लिए एफिलिएशन देनेे का प्रावधान किया गया है. राज्य सरकार द्वारा 2018 में गठित टेक्निकल यूनिवर्सिटी द्वारा 2018-19 से इंजीनियरिंग कॉलेजों को एक ही साथ चार साल के लिए एफिलिएशन दिया जा रहा है.
विश्वविद्यालय ने समय पर नहीं निभायी जिम्मेवारी, सरकार रखेगी अपना पक्ष
सरकार ने देर होने का हवाला देते हुए एफिलिएशन के मुद्दे पर अपनी सहमति नहीं दी है. याचिका में कहा गया है कि विश्वविद्यालय ने अपनी जिम्मेवारी समय पर नहीं निभायी, एेसे में कॉलेज के छात्र इसका खामियाजा क्यों भुगतें.
याचिका में रजिस्ट्रार द्वारा जारी आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया गया है, ताकि इन छात्रों की परीक्षा आयोजित की जा सके. अदालत ने कॉलेज की ओर से दायर याचिका पर सरकार को अपना पक्ष पेश करने का निर्देश दिया है.जिससे मामला पूरी तरह साफ हो सके. फिलहाल इस निर्देश से हजारों छात्रों की पढ़ाई को लेकर सवाल खड़े किये जा रहे हैं.
एफिलिएशन नहीं मिलने से इनकी नहीं हो रही परीक्षा, बढ़ गयी परेशानी
रामगढ़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के 2016-17 बैच के छठे और 2017-18 बैच के चौथे सेमेस्टर
केके कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट के चौथे सेमेस्टर
राम गोविंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के 2015-16 बैच के आठवें, 2016-17 बैच के छठे और 2017-18 बैच के चौथे सेमेस्टर
आरवीएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के 2015-16 बैच के आठवें, 2016-17 के छठे और 2017-17 के चौथे सेमेस्टर
पीपीपी मोड (राज्य सरकार और निजी भागीदारी) से चलनेवाले दुमका इंजीनियरिंग कॉलेज के 2015-16 बैच के सातवें सेमेस्टर
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