रांची : 2019 से 24 घंटे बिजली की घोषणा फेल

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 May 2019 8:52 AM

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तत्कालीन ऊर्जा सचिव एसकेजी रहाटे और वर्तमान एमडी राहुल पुरवार ने की थी घोषणा रांची : तत्कालीन ऊर्जा सचिव एसकेजी रहाटे और वर्तमान जेबीवीएनएल के अध्यक्ष राहुल पुरवार ने 29 जनवरी 2016 को सूचना भवन में प्रेस कांफ्रेंस कर घोषणा की थी कि वर्ष 2019 से राज्य के सभी हिस्सों में 24 घंटे बिजली मिलेगी. […]

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तत्कालीन ऊर्जा सचिव एसकेजी रहाटे और वर्तमान एमडी राहुल पुरवार ने की थी घोषणा
रांची : तत्कालीन ऊर्जा सचिव एसकेजी रहाटे और वर्तमान जेबीवीएनएल के अध्यक्ष राहुल पुरवार ने 29 जनवरी 2016 को सूचना भवन में प्रेस कांफ्रेंस कर घोषणा की थी कि वर्ष 2019 से राज्य के सभी हिस्सों में 24 घंटे बिजली मिलेगी. लेकिन, स्थिति यह है कि राजधानी रांची में भी यह मयस्सर नहीं है. इनकी घोषणाएं फेल हो गयी. रांची समेत राज्य के लगभग 13 जिलों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह धवस्त हो चुकी है.
रांची में 400 करोड़ की लागत से विद्युत सुदृढ़ीकरण की योजना आरएपीडीआरपी शुरू की गयी थी.
यह योजना भी वर्ष 2016 में आरंभ की गयी थी. तब दावा किया गया था कि योजना पूरी होते ही रांची में अबाधित बिजली मिलेगी. आज योजना का 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है.
स्थिति यह है कि सबसे ज्यादा पावर कट से रांची के लोग परेशान हैं. आज की तिथि में 24 जिलों में किसी भी जिलों में 24 घंटे बिजली नहीं मिल रही है. 13 जिलों में बिजली की स्थिति बदतर है. थोड़ी भी आंधी आयी बिजली गुल, थोड़ी गरमी बढ़ी तो बिजली गुल. न बिजली काटने का समय न आने का समय लोगों को पता रहा है. पिछले चार साल में बिजली की उपलब्धता की स्थिति पर गौर करें, तो किसी भी जिले में 24 घंटे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो पायी है.
जबकि पूरी सरकार कभी वर्ष 2017 से तो कभी 2018 तो कभी 2019 से बिजली निर्बाध आपूर्ति की घोषणा करते हैं. फिलहाल राजधानी में वितरण निगम 23 घंटे बिजली देने का दावा कर रहा है. लेकिन स्थिति सबके सामने है. राज्य के अन्य जिलों गिरिडीह, गढ़वा, लातेहार, पलामू, चतरा, चाईबासा, गुमला, लोहरदगा, खूंटी, गोड्डा, साहेबगंज, देवघर और दुमका में आठ से 10 घंटे बिजली की आपूर्ति नहीं होती है.
सेंट्रल पूल और निजी कंपनियों पर निर्भरता
चार साल में बिजली की सुधार के लिए नहीं की गयी कोई वैकल्पिक व्यवस्था
झारखंड में 600 मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन होता था चार साल पहले
सेंट्रल पूल और निजी कंपनियों से बिजली लेकर मांग पूरी करने का हो रहा प्रयास
इस वित्तीय वर्ष में हर माह लगभग 545 करोड़ की बिजली खरीद रहा है जेबीवीएनएल
कहां से कितनी बिजली मिल रही
टीवीएनल 370 मेगावाट तक
इनलैंड पावर 52 मेगावाट तक
सीपीपी 12 मेगावाट तक
सेंट्रल सेक्टर से 550 से 650 मेगावाट तक
आधुनिक 186 मेगावाट
एसइआर 38 मेगावाट
आइइएक्स 80 से 100 मेगावाट
कुल मांग 1300 मेगावाट
आपूर्ति 1100 से 1150 मेगावाट तक
कमी 150 से 200 मेगावाट तक
अघोषित बिजली कटौती से लोग परेशान
रांची : राजधानी में ऐसा कोई भी दिन नहीं है, जब लोगों को बिजली कटौती के कारण परेशान न होना पड़े. डेढ़ दशक बीतने के बावजूद बिजली विभाग का 24 घंटे बिजली देने का दावा धरातल पर नहीं उतरा.
पूरे राज्य की बात तो छोड़ ही दीजिए, राजधानी को भी कभी जीरो पावर कट नहीं मिला है. गर्मी हो या बरसात लोग हर मौसम में बिजली कटौती से परेशान हैं. इधर, एक सप्ताह से लगातार बिजली की ट्रिपिंग व अघोषित कटौती काफी बढ़ गयी है. लगातार हो रही बिजली की कटौती ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. लोग इनवर्टर और जेनेरेटर पर निर्भर हो गये हैं. बिजली गुल होने के बाद पता नहीं होता है कि बिजली दोबारा कब आयेगी.
कमजोर ट्रांसमिशन नेटवर्क
बिजली विभाग का दावा है कि शहर के अंदर बिजली सुधार के सभी काम पूरे कर लिये गये हैं. रांची में हर दिन फुल लोड करीब 260 से 280 मेगावाट बिजली मिलती है, इतनी बिजली शहर में 24 घंटे के लिए पर्याप्त है.
अंधेरे में रहती है ज्यादातर सड़कें
शहर की प्रमुख सड़कों को छोड़कर लिंक रोड और कॉलोनी की दूसरी सड़कें अंधेरे में ही रहती हैं. प्रमुख सड़कों में सोलर स्ट्रीट लाइटें लगी हैं, पर बिजली गुल रहने से कनेक्टिंग सड़कों पर अंधेरा पसरा रहता है.
विभाग के दावे फेल, उत्पादन में सुधार नहीं
वितरण निगम द्वारा नयी सरकार बनने के साथ 2014 से ही बिजली की स्थिति को सुधारने के बड़े-बड़े दावे किये. राजस्व भी बढ़ाया गया, लेकिन इस दिशा में सुधार होने की बजाय स्थिति और बिगड़ती ही गयी है.
बार-बार ट्रिप कर जा रहा है ग्रिड
ओवर लोड के कारण आये दिन ग्रिड ट्रिप हो रहा है. सोमवार को हटिया, कांके और नामकुम ग्रिड सात से ज्यादा बार ट्रिप हुआ. रिम्स सहित वीआइपी इलाकों व अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रोस्टिंग से आपूर्ति की जा रही है.
बिजली की किल्लत से इंडस्ट्री की हालत खस्ता
बिजली नहीं रहने के कारण सबसे बुरी स्थिति की माइक्रो स्माल इंडस्ट्री की है. बिजली के अभाव में इंडस्ट्री ने उत्पादन घटा दिया है. झारखंड चेंबर, जेसिया, रांची चेंबर ने सरकार से बिजली आपूर्ति व्यवस्था को निजी हाथों में सौंप देने की मांग की है. इंडस्ट्री के लोगों का आरोप है कि उपभोक्ताओं को बिजली वितरण निगम के भरोसे छोड़ दिया गया है. राहुल पुरवार से निगम का कामकाज संभल नहीं रहा है, ऐसी सूरत में उन्हें इस्तीफा देकर बिजली आपूर्ति व्यवस्था को जुस्को (जमशेदपुर यूटिलीटीज एंड सर्विस कंपनी) की तर्ज पर निजी हाथों में सौंप देना चाहिए.
कांग्रेस ने लगाये भ्रष्टाचार के आरोप
कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा 24 घंटा बिजली का सपना एक धोखा साबित हुआ है. पार्टी ने ध्वस्त हो चुकी बिजली व्यवस्था के लिए निजी कंपनी पॉली कैब पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाये हैं. कांग्रेस प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि मेंटेनेंस और निर्माण का जिम्मा संभाल रही इस कंपनी ने नीचे से ऊपर तक रिश्वत पहुंचाने का काम किया है. कंपनी अपनी कार्य प्रणालियों की वजह से चर्चा में रहने के बाद भी कभी ब्लैक लिस्ट नहीं हुई. 20 मई को बिजली विभाग के सामने आंदोलन करेंगे.
गर्मी में लगभग 200 मेगावाट की मांग बढ़ी
गर्मी में राज्यभर में लगभग 200 मेगावाट की मांग बढ़ गयी है. ऐसे में वितरण निगम के लिये मांग पूरा करना चुनौती बन गयी है. इसके पीछे तर्क दिया गया है एनएचपीसी (नेशनल हाइडल पावर कॉरपोरेशन) पन बिजली परियोजना से लगभग 300 मेगावाट बिजली मिलती है. राज्य की बिजली व्यवस्था सेंट्रल पूल और निजी कंपनियों पर पूरी तरह से टिकी हुई है.
पिछले चार साल में बिजली की सुधार के लिए ऐसी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गयी, जिससे 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सके. चार साल पहले झारखंड में 600 मेगावाट से अधिक बिजली का उत्पादन होता था. आज इसके आधे से भी कम हो रहा है. सेंट्रल पूल और निजी कंपनियों से बिजली लेकर जैसे-तैसे मांग पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है. इस वित्तीय वर्ष झारखंड बिजली वितरण निगम हर महीने लगभग 545 करोड़ रुपये की बिजली खरीद कर आपूर्ति कर रहा है.
रांची. बूटी मोड़, रामगढ़ रोड, बीआइटी रोड, शिरडो सब स्टेशन से सोमवार को दोपहर 3:00 बजे से शाम 7:45 बजे (4:45 घंटे) तक बिजली गुल रही. विभाग के अधिकारी ने कहा कि रिंगरोड के समीप 33 केवी का केबल पंक्चर कर जाने के कारण बिजली बंद हो गयी थी.
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