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रांची : पूर्व स्वास्थ्य सचिव प्रदीप कुमार के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट

Updated at : 10 May 2019 8:54 AM (IST)
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रांची : पूर्व स्वास्थ्य सचिव प्रदीप कुमार के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट

रांची : मनी लाउंड्रिंग के आरोप में सक्षम अदालत ने पूर्व स्वास्थ्य सचिव प्रदीप कुमार के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया है. साथ ही मनी लाउंड्रिंग में मदद करने के आरोपी ठेकेदार श्यामल चक्रवर्ती की अग्रिम जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. इडी द्वारा दायर आरोप पत्र में वर्णित तथ्यों के […]

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रांची : मनी लाउंड्रिंग के आरोप में सक्षम अदालत ने पूर्व स्वास्थ्य सचिव प्रदीप कुमार के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया है. साथ ही मनी लाउंड्रिंग में मदद करने के आरोपी ठेकेदार श्यामल चक्रवर्ती की अग्रिम जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. इडी द्वारा दायर आरोप पत्र में वर्णित तथ्यों के आधार पर पीएमएलए के विशेष न्यायाधीश ने पूर्व स्वास्थ्य सचिव के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया है.
इडी ने प्रदीप कुमार पर मनी लाउंड्रिंग के सहारे अपने पारिवारिक सदस्यों के नाम पर संपत्ति खरीदने का आरोप लगाया है. साथ ही यह भी कहा है कि जिन लोगों ने जेनरल पावर ऑफ एटर्नी के माध्यम संपत्ति खरीदी, उन लोगों ने खरीदी गयी संपत्ति को कभी देखा ही नहीं है. यहां तक कि राजेंद्र कुमार ने भी पूछताछ के दौरान अपने भाई डॉक्टर प्रदीप कुमार के माध्यम से ही संपत्ति खरीदे जाने की जानकारी मिलने का बात कही है. जांच में पाया गया कि प्रदीप कुमार ने राजेंद्र कुमार के नाम पर बेंगलुरु में 4000 वर्ग फुट जमीन खरीदी. इसके अलावा उदयपुर में भी 1650 वर्ग फुट का फ्लैट खरीदा.
बेंगलुरु में जमीन खरीदने के लिए उसके मालिक वीएस विजेंद्र को 15 लाख रुपये का भुगतान किया गया. यह संपत्ति राजेंद्र कुमार के नाम पर खरीदने के लिए श्रीमती जयम्मा मल्लिकार्जुन को जेनरल पावर ऑफ एटर्नी दी गयी थी. इस संपत्ति के लिए राजेंद्र कुमार के बैंक ऑफ इंडिया स्थित खाता (491010100007052) से भुगतान किया गया था. राजेंद्र कुमार के इस बैंक खाते विभिन्न संदेहास्पद स्रोतों से पैसे आये थे.
जसकन प्लाजा में अपने नाम पर खरीदा एक फ्लैट
प्रदीप कुमार ने जसकन प्लाजा में अपने नाम पर एक फ्लैट खरीदा है. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (डोरंडा ब्रांच) में ‘जसकन इंटर बिल्ड’ और ‘एएचसी प्राइवेट लिमिटेड’ नामक कंपनियों द्वारा बनाये गये ज्वाइंट वेंचर का खाता (380301010011103) था. इस बैंक खाते में जिस दिन 6.28 लाख रुपये नकद जमा हुआ था, उसी दिन उसे चेक के माध्यम से ट्रांसफर कर दिया गया था.
पूछताछ के दौरान जसकन के पार्टनर धरमेंद्र कुमार धीरज खाते में जमा किये गये नकद राशि के स्रोत का ब्योरा नहीं दे सके. पूछताछ में धर्मेंद्र ने बताया कि उसने यह राशि प्रदीप को बतौर कर्ज दी गयी है. हालांकि, इसके लिए किसी तरह का लोन एग्रिमेंट नहीं किया गया है. धर्मेंद्र कुमार ने प्रदीप कुमार के भाई राजेंद्र कुमार के लिए भी 9.84 लाख रुपये की व्यवस्था की थी. हालांकि, धर्मेंद्र ने राजेंद्र कुमार के साथ जान पहचान होने की बात से भी इनकार किया था. जांच में पाया गया कि नाजायज धन से संपत्ति अर्जित करने की कार्रवाई की सही साबित करने के लिए मनी लाउंड्रिंग का सहारा लिया गया.
ठेकेदार श्यामल चक्रवर्ती की अग्रिम जमानत याचिका रद्द
मनी लाउंड्रिंग के आरोपी ठेकेदार श्यामल चक्रवर्ती की अग्रिम जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. रांची हाइकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद इस आरोपी ठेकेदार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी.
अभियुक्त की ओर से इस मामले की पैरवी 10 अधिवक्ताओं की टीम ने की. न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की अदालत में मामले की सुनवाई हुई. इसके बाद कोर्ट में आरोपी की ओर से दायर एसएलपी खारिज कर दी. सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए एसएलपी खारिज कर दी कि हाइकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है.
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