कुडलौंगां गांव के वोटर छह किमी दूर जाते हैं वोट देने
Updated at : 27 Apr 2019 2:51 AM (IST)
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टंडवा : कुडलौंगां गांव(सराढू पंचायत) के वोटर छह किलोमीटर पैदल चल कर वोट देने जाते हैं. यह समस्या ग्रामीण 19 साल से झेल रहे हैं. ग्रामीणों ने पिछले लोकसभा चुनाव में गांव में ही बूथ बनाने की मांग की थी, पर अब तक ग्रामीणों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया. गांव के 75 वर्षीय […]
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टंडवा : कुडलौंगां गांव(सराढू पंचायत) के वोटर छह किलोमीटर पैदल चल कर वोट देने जाते हैं. यह समस्या ग्रामीण 19 साल से झेल रहे हैं. ग्रामीणों ने पिछले लोकसभा चुनाव में गांव में ही बूथ बनाने की मांग की थी, पर अब तक ग्रामीणों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया.
गांव के 75 वर्षीय जगदेव साव कहते हैं कि पहले विधानसभा या लोकसभा चुनाव में गांव में ही बूथ होता था. वर्ष 2000 के बाद यहां से बूथ हटा लिया गया. कुडलौंगां गांव की आबादी करीब 1500 है, जिसमें 600 वोटर हैं. ग्रामीणों ने बताया कि लंबी दूरी होने के कारण कई लोग वोट देने नहीं जाते हैं.
सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों को होती है. बुजुर्ग मतदाता जयबीर सिंह ने बताया कि माओवादियों के वोट बहिष्कार के कारण वर्ष 2000 में यहां वोट नहीं हुआ था, जिसके बाद से यहां पोलिंग बूथ हटा लिया गया.
ग्रामीण पंकज साहू, परमानंद मिश्रा, द्वारिका सिंह, रघुवीर साहू, नरेश साहू, संतु यादव आदि ने कहा कि वोट लोकतंत्र का महान पर्व है, इसलिए हमलोग वोट बहिष्कार तो नहीं करेंगे, लेकिन विधानसभा चुनाव में अगर बूथ गांव में नहीं दिया गया तो ग्रामीण वोट बहिष्कार करने के लिए सोचेंगे.
55 बूथों में पड़े थे मात्र 900 वोट
एक वक्त था जब टंडवा प्रखंड में उग्रवाद की तूती बोलती थी. उग्रवादियों के फरमान पर लोग वोट देने तक नहीं जाते थे, पर आज हालात कुछ और है. लोग निर्भीक होकर मतदान कर रहे हैं.
1998 लोकसभा चुनाव में माओवादियों ने वोट बहिष्कार की घोषणा की थी. इसके बावजूद भी लोगों ने वोट दिया था. वोट के बाद उग्रवादियों ने गाडिलौंग के महादेव यादव की अंगुली व नइमुद्दीन अंसारी का हाथ काट दिया था. जिसका असर वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में पड़ा था.
वर्ष 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में पुनः माओवादियों ने वोट बहिष्कार की घोषणा की, जिसका व्यापक असर चुनाव पर देखने को मिला. वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में टंडवा प्रखंड के 55 बूथों में मात्र 800 से 900 मतदान हुआ था. यह मत भी राहम गांव के तीन व नई पारम गांव के एक बूथ पर पड़ा था.
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