मेडिकल उपकरणों का बार कोड उखाड़ा, तो होगी कार्रवाई
20 Apr, 2019 2:06 am
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रांची : स्वास्थ्य सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी ने राज्य के तीनों मेडिकल कॉलेज सह अस्पतालों के निदेशक या अधीक्षक तथा सभी जिला अस्पतालों के सीएमअो को पत्र लिख कर निर्देश दिया है कि उनके मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों में लगे बायो मेडिकल उपकरण के आइडेंटिफिकेशन स्टीकर (बार कोड) न उखाड़े जायें. एेसा करने का […]
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रांची : स्वास्थ्य सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी ने राज्य के तीनों मेडिकल कॉलेज सह अस्पतालों के निदेशक या अधीक्षक तथा सभी जिला अस्पतालों के सीएमअो को पत्र लिख कर निर्देश दिया है कि उनके मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों में लगे बायो मेडिकल उपकरण के आइडेंटिफिकेशन स्टीकर (बार कोड) न उखाड़े जायें.
एेसा करने का प्रयास करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. प्रभात खबर में नौ अप्रैल को इससे संबंधित खबर के छपने के बाद सचिव ने यह पत्र जारी किया है. दरअसल, राज्य भर में लगे मेडिकल उपकरणों के सर्वे के बाद इनकी गणना व पहचान के लिए इस पर उक्त स्टिकर लगाये गये हैं.
खराब उपकरणों को ठीक करने के लिए चयनित कंपनी मेडिसिटी हेल्थकेयर सर्विसेस प्रा लि, हैदराबाद ने यह स्टिकर लगाया है. रिम्स सहित विभिन्न अस्पतालों के बारे मेडिसिटी पहले से कहती रही है कि यहां की वायरिंग सही नहीं है.
विभिन्न अस्पतालों में अर्दिंग नहीं है तथा वोल्टेज अप-डाउन होता है. कई उपकरण एेसे हैं, जो वोल्टेज में थोड़ा भी उतार-चढ़ाव झेल नहीं पाते. इस संबंध में भी सचिव ने लिखा है कि उपकरणों के बेहतर संचालन के लिए टर्मिनल वोल्टेज, न्यूट्रल टू अर्द वोल्टेज व वोल्टेज फ्लक्चुएशन को ठीक किया जाये.
यह है मामला
मेडिकल उपकरणों को ठीक करने के काम में लगी कंपनी मेडिसिटी ने एनएचएम के निदेशक वित्त से रिम्स के संबंध में शिकायत की थी. कहा था कि रिम्स में खराब पड़े कई मेडिकल उपकरणों पर से बार कोड (स्टिकर) उखाड़ दिया गया है. चूंकि उपकरणों को ठीक करने से पहले संबंधित उपकरणों के बार कोड सहित अन्य विवरण देने पड़ते हैं. इसलिए इन मशीनों को ठीक करने में समस्या आ रही है.
चार सौ से अधिक उपकरण बेकार
दो वर्ष पूर्व एनआरएचएम की ओर से कराये गये सभी सरकारी अस्पतालों के पता चला था कि रिम्स के कुल 2377 मेडिकल उपकरणों में से 439 खराब हैं. इनमें हेमोडायलेसिस, वेंटिलेटर, सीआर्म इमेज इंटेसिफायर, अॉटोबायो केमेस्ट्री एनलाइजर, एक्स-रे, इसीजी रिकॉर्डर व डायलिसिस सहित अन्य उपकरण शामिल हैं. खराब उपकरणों की कीमत करीब आठ करोड़ अांकी गयी थी.
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