रांची : निकाय प्रतिनिधियों का बढ़ा भाव, मैनेज करने का खेल शुरू, स्थानीय निकाय के प्रतिनिधि कर रहे बार्गेनिंग
Updated at : 11 Apr 2019 8:02 AM (IST)
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आनंद मोहन रांची : झारखंड में लोकसभा चुनाव में कई रंग देखने को मिल रहे हैं. चुनाव में वोट के जुगाड़ के लिए सभी तरह के खेल हो रहे है़ं कहीं जातीय समीकरण, तो कहीं स्थानीय निकाय के जनप्रतिनिधियों को मैनेज करने का खेल चल रहा है. उम्मीदवार अपने विरोधियों को पटकनी देने के लिए […]
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आनंद मोहन
रांची : झारखंड में लोकसभा चुनाव में कई रंग देखने को मिल रहे हैं. चुनाव में वोट के जुगाड़ के लिए सभी तरह के खेल हो रहे है़ं कहीं जातीय समीकरण, तो कहीं स्थानीय निकाय के जनप्रतिनिधियों को मैनेज करने का खेल चल रहा है.
उम्मीदवार अपने विरोधियों को पटकनी देने के लिए सारे हथकंडे अपना रहे हैं. गांव और निकाय की सरकार के प्रतिनिधियों का भाव बढ़ा हुआ है. मुखिया, जिला परिषद सदस्य, जिला परिषद अध्यक्ष को अपने पाले में करने के लिए उम्मीदवार जोर लगा रहे है़ं ये इन उम्मीदवारों की ताकत तौल कर भाव लगा रहे है़ं
स्थानीय निकाय के प्रतिनिधियों का अपने इलाके में सरोकार है़ इनका अपना आधार है. गांव और निकाय की सरकार के प्रतिनिधियों की अपने-अपने क्षेत्र में चलती है. ऐसे में उम्मीदवारों का भी भरोसा जगता है.
मुखिया, जिला परिषद सदस्य और जिला परिषद के अध्यक्ष दलों से भी जुड़े है़ं उम्मीदवारों को इनकी निष्ठा को लेकर भी संशय है़ मुखिया, जिला परिषद सदस्य और जिप अध्यक्ष (सभी नहीं) के अपने-अपने भाव है़ं उम्मीदवारों को वोट मैनेज करने में लाखों खर्च करने पड़ रहे हैं. ये प्रतिनिधि वोट की गारंटी का ठेका ले रहे है़ं
गांव-निकाय के प्रतिनिधि भी चुनाव में देख रहे अपनी जमीन
लोकसभा चुनाव में गांव-निकाय के प्रतिनिधि भी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं. कई जिप अध्यक्ष अानेवाले समय में विधायक के लिए प्लॉट तैयार कर रहे हैं.
ऐसे में सांसद का चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के पक्ष में भी अपनी ताकत का एहसास कराने के लिए जोर लगा रहे हैं. जिला परिषद के सदस्य भी राजनीति में लंबी दौड़ लगाना चाहते है़ं विधायकी की कुरसी के लिए खेमाबंदी कर रहे है़ं
पार्टियों ने निकाय प्रतिनिधियों को दी है जिम्मेवारी
राजनीतिक दलों में स्थानीय निकाय के प्रतिनिधियों को जिम्मेवारी दी गयी है. चुनाव कैंपेन से लेकर सांगठनिक कामकाज में दल से जुड़े प्रतिनिधियों को लगाया गया है. प्रखंड से लेकर जिला तक का प्रभार दिया गया है.
चुनाव में कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करने की जवाबदेही है. जिन क्षेत्रों से ये प्रतिनिधि आते हैं, वहां की जवाबदेही विशेष तौर पर दी गयी है.अशहर से लेकर गांव तक स्थानीय निकाय के प्रतिनिधियों की भूमिका लोकसभा चुनाव में दिख रही है.
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