बढ़ रहे मनोरोगी, घट रहे हैं मनोचिकित्सक

Updated at : 01 Apr 2019 4:55 AM (IST)
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बढ़ रहे मनोरोगी, घट रहे हैं मनोचिकित्सक

मनोज सिंह, रांची : राज्य में मनोरोगियों की संख्या हर साल बढ़ रही है. 20 साल में मनोरोगियों की संख्या 16 हजार से बढ़कर एक लाख से अधिक हो गयी है. इस दौरान मनोचिकित्सकों की संख्या घट रही है. मनोचिकित्सक रिटायर हो रहे हैं. सीनियर रेजीडेंट नहीं मिल रहे हैं. रिनपास ने दो माह पहले […]

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मनोज सिंह, रांची : राज्य में मनोरोगियों की संख्या हर साल बढ़ रही है. 20 साल में मनोरोगियों की संख्या 16 हजार से बढ़कर एक लाख से अधिक हो गयी है. इस दौरान मनोचिकित्सकों की संख्या घट रही है. मनोचिकित्सक रिटायर हो रहे हैं. सीनियर रेजीडेंट नहीं मिल रहे हैं. रिनपास ने दो माह पहले पांच सीनियर रेजीडेंट की बहाली के लिए विज्ञापन निकाला था

इसमें एक भी नहीं मिले. इससे एक-एक मनोचिकित्सकों को प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज देखना पड़ रहा है. रिनपास के ओपीडी में हर दिन 400 के आसपास मनोरोगी आ रहे हैं. चार मनोचिकित्सकों को इसका इलाज करना पड़ रहा है. सप्ताह में पांच सौ से छह सौ मरीज देखना पड़ रहा है. मनोचिकित्सक बताते हैं कि दो से तीन मरीज में एक मरीज का इलाज करना पड़ रहा है. केवल कैंप की तरह मरीजों का इलाज हो रहा है. इससे संतुष्टि नहीं होती है.
चार विशेषज्ञ मनोचिकित्सक हैं संस्थान में : रिनपास जैसे संस्थान में मात्र चार विशेषज्ञ मनोचिकित्सक और दो साइकेट्री के मेडिकल अफसर हैं. इसके अतिरिक्त एक निदेशक और शैक्षणिक पद पर एक मनोचिकित्सक हैं. ये लोग सुविधा के हिसाब से ओपीडी में बैठते हैं. इसके बावजूद मनोचिकित्सकों पर गुणवत्तायुक्त चिकित्सा सुविधा देने का दबाव है.
मरीजों का ओपीडी में इलाज के अतिरिक्त हर दिन इन चिकित्सकों पर इनडोर में भरती मरीजों के रूटीन चेकअप की जिम्मेदारी भी है. सभी मनोचिकित्सकों को तीन-तीन वार्ड भी दिया हुआ है. यहां इनको रूटीन विजिट करना होता है.
राज्य सरकार के किसी संस्थान में तैयार नहीं हो रहे मनोचिकित्सक
राज्य सरकार के किसी भी मेडिकल कॉलेज में मनोचिकित्सक तैयार नहीं हो रहे हैं. मनोचिकित्सकों की विशेषज्ञता की पढ़ाई के लिए फैकल्टी भी नहीं है.
रिनपास में एक सीट पर विशेषज्ञता के लिए एडमिशन होता था. लेकिन, फैकल्टी और सुविधा होने के कारण इसकी मान्यता भी समाप्त कर दी गयी है. राज्य में केंद्रीय सरकार की संस्थान सीअाइपी में 14 विशेषज्ञ तैयार किये जा रहे हैं. यहां से तैयार मनोचिकित्सक दूसरे राज्यों में या विदेश चले जा रहे हैं.
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