सेवा अधिकार के तहत अब तक नहीं बना आयोग
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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रांची : आम लोगों को शासन व प्रशासन से जुड़ी सार्वजनिक सेवाएं देने के लिए राज्य में सेवा का अधिकार (राइट टू सर्विस) अधिनियम लागू है. पर आम लोगों को समय पर सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य की पूर्ति के लिए राज्य लोक सेवा परिदान आयोग का गठन अब तक नहीं किया गया है. यह […]
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रांची : आम लोगों को शासन व प्रशासन से जुड़ी सार्वजनिक सेवाएं देने के लिए राज्य में सेवा का अधिकार (राइट टू सर्विस) अधिनियम लागू है. पर आम लोगों को समय पर सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य की पूर्ति के लिए राज्य लोक सेवा परिदान आयोग का गठन अब तक नहीं किया गया है.
यह आयोग शिकायतों के निबटारे तथा समय पर सेवाएं न देने के जिम्मेवार लोगों पर कार्रवाई के लिए जरूरी है. राज्य सरकार ने इस अधिकार आधारित सेवा की गारंटी अधिनियम को नवंबर-2011 में अधिसूचित किया था. इसके तहत लोगों को कौशल विकास विभाग सहित 20 विभागों से जुड़ी कुल 200 किस्म की सेवाएं देने का प्रावधान है.
वहीं, इसमें सेवाएं देने की प्रकिया की मॉनिटरिंग, अभिलेखों के रख-रखाव, सेवा प्रदाताओं के प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण, अपीलीय अधिकारियों के मनोनयन सहित दोषी अधिकारियों से दंड वसूलने का भी प्रावधान है. इधर, आयोग सहित अधिनियम को प्रभावी करने का सिस्टम नहीं होने से आम लोगों को जरूरी सेवाएं समय पर नहीं मिल रही हैं.
कुछ महत्वपूर्ण सेवाएं देने की अधिकतम अवधि
सामाजिक सुरक्षा पेंशन का निबटारा : 21 दिन
छात्रवृत्ति के आवेदन का निबटारा : 30 दिन
बिजली बोर्ड से जुड़े मामले : 24 घंटे से 30 दिन
नया एलटी बिजली कनेक्शन : 30 दिन
गलत बिजली बिल में सुधार : 24 घंटे
पोस्टमार्टम रिपोर्ट : तीन दिन
जाति, आवासीय व आय प्रमाण पत्र : 15-30 दिन
ड्राइविंग लाइसेंस : 45 दिन
वाहनों का एनओसी : 10 दिन
वाहनों का अस्थायी निबंधन : सात दिन
फिटनेस सर्टिफिकेट : 10 दिन
नया राशन कार्ड : 60 दिन
दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) : 30 दिन
दर्ज आपत्ति वाले दाखिल-खारिज का निष्पादन : 90 दिन
पासपोर्ट व चरित्र प्रमाण पत्र का सत्यापन : सात दिन
दवा दुकान का लाइसेंस : 30 दिन
श्रम विभाग से जुड़े लाइसेंस : 30 दिन
दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की जांच : 15 दिन
कृषि विभाग से जुड़े लाइसेंस : 30 दिन
टैक्स टोकन : तीन दिन
ईंट भट्ठा व क्रशर लाइसेंस : 30 दिन
मापतौल उपकरणों का सत्यापन व मुहरांकन : 30 दिन
विलंब की शिकायत करें
अधिनियम के तहत सेवा प्रदाता सभी विभागों के लिए प्रथम व द्वितीय अपीलीय पदाधिकारी मनोनीत किये गये हैं. बगैर किसी जायज कारण के निर्धारित समय सीमा में सेवाएं न मिलने की शिकायत संबंधित विभाग के प्रथम व द्वितीय अपीलीय पदाधिकारी से क्रमश: 30 व 60 दिनों के अंदर की जा सकती है. अनावश्यक विलंब के लिए संबंधित अधिकारी पर अधिकतम पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है.
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