रांची : एक अप्रैल से पूरे झारखंड में लागू होगा सहिया पेमेंट सिस्टम

Updated at : 26 Mar 2019 9:07 AM (IST)
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रांची : एक अप्रैल से पूरे झारखंड में लागू होगा सहिया पेमेंट सिस्टम

40 हजार सहिया को समय पर भुगतान हो सकेगा, सिविल सर्जनों व डीपीएम के लिए अोरिएंटेशन रिव्यू कार्यक्रम रांची : सहिया को समय से भुगतान करने के लिए रांची जिला में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सहिया पेमेंट सिस्टम शुरू किया गया था. इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया है. अब यह निर्णय लिया गया है […]

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40 हजार सहिया को समय पर भुगतान हो सकेगा, सिविल सर्जनों व डीपीएम के लिए अोरिएंटेशन रिव्यू कार्यक्रम
रांची : सहिया को समय से भुगतान करने के लिए रांची जिला में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सहिया पेमेंट सिस्टम शुरू किया गया था. इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया है. अब यह निर्णय लिया गया है कि सहिया पेमेंट सिस्टम एक अप्रैल से राज्य के सभी जिलों में लागू किया जायेगा.
इससे राज्य भर की करीब 40 हजार सहिया को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा. उक्त बातें स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने कही. वे सोमवार को होटल बीएनआर में सिविल सर्जनों तथा जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) के लिए आयोजित अोरिएंटेशन रिव्यू कार्यक्रम में बोल रहे थे.
पार्टिसिपेटरी लर्निंग एंड एक्शन (पीएचए) इन झारखंड विषय पर आयोजित इस समीक्षा कार्यक्रम का आयोजन एनएचएम व गैर सरकारी संस्था एकजुट के तत्वावधान में किया गया था. श्री कुलकर्णी ने कहा कि हजारीबाग में सहिया को इंसेंटिव भुगतान तीन महीने विलंब से होता है.
ऐसा नहीं होना चाहिए. सचिव ने मातृ मृत्यु रिपोर्टिंग की धीमी प्रगति पर नाराजगी जतायी. एनएचएम के अभियान निदेशक कृपानंद झा ने कहा कि मां-बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य व स्वास्थ्य मानकों में सुधार के लिए लोगों का जागरूक होना जरूरी है. सिर्फ स्वास्थ्य संबंधी सरकार की योजनाअों व कार्यक्रमों से ही यह काम नहीं होगा, बल्कि समुदाय से जुड़ कर उन्हें जानकारी देना व जागरूक भी करना होगा. इस काम में सहिया की बड़ी जिम्मेदारी है.
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लोगों में डिमांड की कमी है. पेंशन न मिले तो तुरंत हल्ला होता है, पर यदि एएनएम न आये व टीकाकरण न हो, तो कोई शिकायत नहीं करता. सामुदायिक जागरूकता के जरिये ही लोगों में यह डिमांड पैदा की जा सकती है. संस्था एकजुट के राजकुमार ने बताया कि झारखंड की 40 हजार सहिया को प्रशिक्षित किया जा रहा है.
वहीं पार्टिसिपेटरी लर्निंग के माध्यम से ओड़िशा व झारखंड के चुनिंदा जिलों में नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) तथा मातृ मृत्यु दर (एमएमअार) में कमी आयी है. एनएचएम में सामुदायिक उत्प्रेरण सेल के हेड डॉ मार्शल आइंद ने कहा कि सामुदायिक जागरूकता का काम 2017 में शुरू हुआ तथा संस्था एकजुट के सहयोग से अब तक तीन लाख लोगों को जागरूक किया गया है
.
कार्यक्रम के दौरान सिविल सर्जनों ने अपने अनुभव साझा किये तथा अन्य मुद्दों पर चर्चा में हिस्सा लिया. एसपीसी, सीएम सेल की अकई मिंज ने झारखंड में पीएलए कार्यक्रम के बारे बताया. मौके पर सभी जिलों के सिविल सर्जन, डीपीएम व अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे.
स्वास्थ्य सचिव ने कहा
राज्य के सभी अस्पतालों में सहिया रेस्ट रूम अनिवार्य, इस पर कब्जा न हो
निर्धारित समय पर सहिया को इंसेंटिव का भुगतान किया जाये
सभी जिलों की सहियाओं को मिलेगा सहिया किट
हर महीने सहिया दिवस की दो बैठकों में शामिल होंगे सभी जिलों के सिविल सर्जन
मरीज लेकर अस्पताल आने वाली सहिया को पूरा रिस्पांस दें, उन्हें अॉफिस क्लर्क के भरोसे न छोड़ें
सिविल सर्जन अपने सभी प्रखंड में एक समान स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करें
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