रांची : अधिग्रहित जमीन की होगी रजिस्ट्री वर्तमान दर से दिया जायेगा मुआवजा

Updated at : 02 Feb 2019 12:46 AM (IST)
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रांची : अधिग्रहित जमीन की होगी रजिस्ट्री वर्तमान दर से दिया जायेगा मुआवजा

रांची : कोलियरी क्षेत्रों में अधिग्रहित हुई जमीन की रजिस्ट्री करायी जायेगी़ वर्षों पहले कोल कंपनियों द्वारा रैयतों से एग्रीमेंट कर ली गयी जमीन में उत्खनन किया जा रहा है़ रैयतों की जमीन का अब तक रजिस्ट्री व म्यूटेशन नहीं हुआ है़ प्रभारी मंत्री अमर कुमार बाउरी ने मासस विधायक अरुप चटर्जी के सवाल का […]

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रांची : कोलियरी क्षेत्रों में अधिग्रहित हुई जमीन की रजिस्ट्री करायी जायेगी़ वर्षों पहले कोल कंपनियों द्वारा रैयतों से एग्रीमेंट कर ली गयी जमीन में उत्खनन किया जा रहा है़ रैयतों की जमीन का अब तक रजिस्ट्री व म्यूटेशन नहीं हुआ है़ प्रभारी मंत्री अमर कुमार बाउरी ने मासस विधायक अरुप चटर्जी के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि सरकार ऐसी जमीन को चिह्नित कर कोल कंपनियों द्वारा ली गयी जमीन की रजिस्ट्री करायेगी़ इसके म्यूटेशन के लिए भी निर्देश दिये जायेंगे.

मंत्री ने बताया कि रैयतों को वर्तमान दर से जमीन का मुआवजा मिलेगा़ भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधान के अनुसार चार गुणा दर पर मुआवजा सुनिश्चित किया जायेगा़ इसके लिए राज्य भर के उपायुक्तों को निर्देश दिया जायेगा़ श्री चटर्जी ने अल्पसूचित के तहत सदन में सवाल किया कि वर्ष 1972 में कोल कंपनियों का राष्ट्रीयकरण हुआ था़ उस समय जमीन अधिग्रहित की गयी थी़
इनका निबंधन नहीं कराया गया है़ पुराने पेपर बना कर लोग फर्जीवाड़ा कर रहे है़ं विस्थापितों को उनका हक नहीं मिल रहा है़ फर्जी तरीके से जमीन की खरीद-बिक्री हो रही है़ मंत्री का कहना था कि अधिग्रहण कोल कंपनियों ने किया है़ यह केंद्र का मामला है, लेकिन कोल कंपनियों को ऐसी जमीन चिह्नित करने के लिए कहा गया है़ विधायक श्री चटर्जी का कहना था कि कुछ जमीन सीएनटी एक्ट के तहत आती है़ं
कंपनियां बिना उपायुक्त के अनुमति के ही खनन का काम कर रही है़ं वर्षों से मामला डीसी के पास लंबित है़ं डीसी के स्तर पर क्लीयरेंस होने से रैयतों को उनका हक मिलेगा़ सरकार उपायुक्तों को सीएनटी के मामले निबटाने का निर्देश दे़ मंत्री श्री बाउरी ने कहा कि डीसी के पास सीएनटी के मामले लंबित हैं, तो उन्हें युद्ध स्तर पर निबटाने का निर्देश दिया जायेगा़ इस काम में तीन महीने या उससे ज्यादा समय लग सकते है़ं विभाग के स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग भी होगी़
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