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रांची : कांके रोड में स्वाइन फ्लू से एक की मौत, दक्षिण कोरिया से पीड़ित हो कर आया था मरीज, जानिये बचाव के उपाय

Updated at : 01 Feb 2019 8:02 AM (IST)
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रांची : कांके रोड में स्वाइन फ्लू से एक की मौत, दक्षिण कोरिया से पीड़ित हो कर आया था मरीज, जानिये बचाव के उपाय

रांची : स्वाइन फ्लू से पीड़ित हितेश की मौत हो गयी. कांके रोड के एक अपार्टमेंट में रहने वाले हितेश कुमार कई दिनों से बीमार चल रहे थे. हितेश दक्षिण कोरिया में मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे. अचानक बीमार हो गये. बीमार अवस्था में ही वे कोरिया से रांची आये. स्थिति बिगड़ती देख परिजनों ने […]

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रांची : स्वाइन फ्लू से पीड़ित हितेश की मौत हो गयी. कांके रोड के एक अपार्टमेंट में रहने वाले हितेश कुमार कई दिनों से बीमार चल रहे थे. हितेश दक्षिण कोरिया में मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे. अचानक बीमार हो गये.
बीमार अवस्था में ही वे कोरिया से रांची आये. स्थिति बिगड़ती देख परिजनों ने हितेश को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया. जहां इलाज के कुछ दिनों बाद उनकी मौत हो गयी. मेदांता के असिस्टेंट हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेटर डॉ आदित्य रंजन ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि हितेश की मौत स्वाइन फ्लू से हुई है.
डॉ रंजन के मुताबिक इस मरीज ने रांची के विभिन्न अस्पतालों में अपना इलाज करवाया था. गंभीर अवस्था में मरीज को मेदांता में भर्ती कराया गया था. जहां 25 जनवरी को उसकी मौत हो गयी. जानकारी के मुताबिक हितेश के दोनों बच्चे भी स्वाइन फ्लू से संक्रमित हो चुके थे. तब परिजन उन बच्चों को तत्काल दिल्ली ले गये आैर वहां के एक अस्पताल में भर्ती कराया. इलाज के बाद अब दाेनाें बच्चाें की स्थिति बेहतर है. झारखंड में इस वर्ष स्वाइन फ्लू से यह पहली मौत है.
विभाग को भी दी थी सूचना : मेदांता अस्पताल ने हितेश के स्वाइन फ्लू से पीड़ित होने की पुष्टि होने पर तत्काल इसकी सूचना सिविल सर्जन डॉ बीवी प्रसाद को दी थी. इनके अलावा स्वास्थ्य विभाग को भी इसकी जानकारी दी थी.
जानिये स्वाइन फ्लू को
स्वाइन फ्लू एक तीव्र संक्रामक रोग है, जो एक विशिष्ट प्रकार के इनफ्लूएंजा वायरस (एच-1 एन-1) के द्वारा होता है.
प्रभावित व्यक्ति में सामान्य मौसमी सर्दी-जुकाम जैसे ही लक्षण होते हैं.
नाक से पानी बहना या नाक बंद होना, गले में खराश, सर्दी-खांसी, बुखार.
सिरदर्द, शरीर दर्द, थकान, ठंड लगना, पेट दर्द,कभी-कभी दस्त उल्टी आना.
कम उम्र के व्यक्तियों, छोटे बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को यह तीव्र रूप से प्रभावित करता है.
रोगी मुंह या नाक पर हाथ रखने के पश्चात जिस भी वस्तु को छूता है, पुन: उस संक्रमित वस्तु को स्वस्थ व्यक्ति द्वारा छूने से संक्रमण हो जाता है.
बचाव
खांसी, जुकाम, बुखार के रोगी से दूर रहें
आंख, नाक, मुंह को छूने के बाद किसी अन्य वस्तु को न छुएं व हाथों को साबुन/ एंटीसेप्टिक से धोकर साफ करें.
खांसते, छींकते समय मुंह व नाक पर कपड़ा रखें.
सहज व तनाव मुक्त रहें. तनाव से रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता कम हो जाती है, जिससे संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है
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