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रांची : आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार किसानों तथा कमजोर तबके को मिला कम ऋण

Updated at : 25 Jan 2019 5:25 AM (IST)
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रांची : आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार किसानों तथा कमजोर तबके को मिला कम ऋण

कृषि क्षेत्र को दिया गया ऋण एडवांस आरबीआइ के बेंच मार्क 18% से कम ही रहा है रांची : जून-2017 की तुलना में जून -2018 में राज्य के कृषि क्षेत्र को मिलने वाले ऋण में कमी आयी है. पहले जहां कृषि क्षेत्र का ऋण बैंकों द्वारा दिये गये कुल ऋण का 15.82 फीसदी था. वहीं […]

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कृषि क्षेत्र को दिया गया ऋण एडवांस आरबीआइ के बेंच मार्क 18% से कम ही रहा है

रांची : जून-2017 की तुलना में जून -2018 में राज्य के कृषि क्षेत्र को मिलने वाले ऋण में कमी आयी है. पहले जहां कृषि क्षेत्र का ऋण बैंकों द्वारा दिये गये कुल ऋण का 15.82 फीसदी था. वहीं जून 2018 में यह 15.55 फीसदी हो गया. हालांकि पहले भी कृषि क्षेत्र को दिया गया ऋण एडवांस रिजर्व बैंक अॉफ इंडिया (आरबीआइ) के बेंच मार्क 18 फीसदी से कम ही रहा है. यानी कृषि क्षेत्र को दिया गया ऋण विभिन्न बैंक द्वारा दिये गये कुल ऋण के 18 फीसदी तक होना चाहिए.

इसी तरह समाज के कमजोर तबके को दिया जाना वाला एडवांस भी जून-2017 की तुलना में जून-2018 में घटा है. पहले यह कुल ऋण का 18.46 फीसदी था, जो बाद में 17.19 फीसदी हो गया.

दूसरी अोर महिलाअों को दिये जाने वाले ऋण में वृद्धि हुई है. जून-2017 में महिलाअों को मिला ऋण कुल ऋण का 11.86 फीसदी था, जो जून-2018 में 13.19 फीसदी हो गया. हालांकि सांस्थिक वित्त (इंस्टिट्यूशनल फिनांस) यानी बैंकिंग सेक्टर की हालत कुछ अन्य मायने में भी सुधरती नजर आ रही है. अब प्रति एक लाख आबादी के लिए ज्यादा बैंक शाखाएं तथा ज्यादा एटीएम उपलब्ध हैं.

वर्ष 2011 में प्रति एक लाख अाबादी पर 6.22 बैंक शाखाएं थी, जो वर्ष 2018 में बढ़ कर 8.06 हो गयी. इसी तरह वर्ष 2012 में एटीएम की संख्या प्रति लाख जनसंख्या पर 3.63 थी, जो वर्ष 2018 में 9.53 हो गयी है. वर्तमान में राज्य भर में सरकारी व निजी बैंकों सहित क्षेत्रीय ग्रामीण व सहकारिता बैंक की कुल 3008 शाखाएं तथा इनके 3473 एटीएम हैं.

बैंकों में जमा राशि (डिपोजिट) भी 2012 की तुलना में 5.78 फीसदी बढ़ी है. वहीं, राज्य का ऋण-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) पहले 57.04 फीसदी के मुकाबले वर्ष 2018 में 59.35 फीसदी हुआ है. पर अब भी यह आरबीआइ के बेंच मार्क 60 फीसदी से कम है. उधर बैड लोन (एनपीए) का मार्च-2016 (6.50 फीसदी) व मार्च-2018 (6.11 फीसदी) की तुलना में जून-2018 में कम (5.87 फीसदी) होना बैंकिंग सेक्टर के लिए अच्छा संकेत है.

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