रांची : कुल 19 जिलों में बने 2.60 लाख प्रधानमंत्री आवास

Published at :22 Jan 2019 8:07 AM (IST)
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रांची : कुल 19 जिलों में बने 2.60 लाख प्रधानमंत्री आवास

विधानसभा सत्र के दौरान सरकार ने पेश की रिपोर्ट, हुई चर्चा रांची : ग्रामीण विकास विभाग के तहत कुल 19 जिलों में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत करीब 2.60 लाख आवास बनाये गये हैं. जबकि निर्माण के लिए कुल लगभग 4.42 लाख आवास स्वीकृत हुए थे. इस तरह चालू वित्तीय वर्ष में दिसंबर 2018 […]

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विधानसभा सत्र के दौरान सरकार ने पेश की रिपोर्ट, हुई चर्चा
रांची : ग्रामीण विकास विभाग के तहत कुल 19 जिलों में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत करीब 2.60 लाख आवास बनाये गये हैं. जबकि निर्माण के लिए कुल लगभग 4.42 लाख आवास स्वीकृत हुए थे. इस तरह चालू वित्तीय वर्ष में दिसंबर 2018 तक 59 फीसदी आवास पूर्ण हो सके हैं. यहां विभिन्न विभागों की उपलब्धियां दी जा रही हैं.
ग्रामीण विकास
गरीबी उन्मूलन व आय वृद्धि की योजनाएं बनाने के लिए 3800 विशेष ग्राम सभा हुई. राज्य का पहला तेल आसवन (डिस्टिलेशन) इकाई खूंटी जिले के अनिगड़ा में स्थापित की गयी. ग्रामीणों के बीच करीब सात लाख सोलर लैंप का वितरण किया गया है.
शहरी विकास
जनगणना वर्ष 2001-2011 के दौरान झारखंड की शहरी आबादी 37.3 फीसदी की दर से बढ़ी (22 लाख से 80 लाख) है, जबकि राष्ट्रीय अौसत 31.8 फीसदी है. धनबाद, पू.सिंहभूम, बोकारो, रामगढ़ व रांची में सर्वाधिक शहरीकरण. शहरी नागरिकों को बेहतर जीवन मुहैया कराने के लिए स्मार्ट सिटी मिशन, अमृत, स्वच्छ भारत, नमामि गंगे व प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का क्रियान्वयन हो रहा है.
कृषि व अन्य
राज्य में खेती योग्य जमीन 38 लाख हेक्टेयर है, जो कुल भौगोलिक क्षेत्र का 48 फीसदी है. इसमें से 36 फीसदी में खेती होती है. आंकड़ों के अनुसार खरीफ, दलहन व रबी फसलों के उत्पादन में वृद्धि हुई है. राज्य में खाद्यान्न की उत्पादकता 1200 से 1800 किग्रा/हेक्टेयर तथा दलहन की 1100 से 1400 किग्रा/हेक्टेयर है. राज्य की करीब 1.04 लाख भूमि पर फलों की खेती होती है, जिसका आधा हिस्सा आम का है.
केला व कटहल दो अन्य महत्वपूर्ण फल हैं. वहीं बेर की खेती का क्षेत्र विकास 41 फीसदी तथा उपज 102 फीसदी बढ़ा है. वित्तीय वर्ष 2009-10 से 2017-18 के दौरान दूध, अंडा व मीट का उत्पादन क्रमश: 3.8, 4.4 तथा 2.6 फीसदी बढ़ा है. वर्ष 2012-13 से 2017-18 के दौरान मछली का उत्पादन 15.7 फीसदी वार्षिक दर से बढ़ा है. तालाब निर्माण योजना के तहत दो हजार सरकारी व निजी तालाबों का जीर्णोद्धार किया जायेगा.
खाद्य सुरक्षा
डाकिया योजना के तहत सभी 24 जिलों के 164 प्रखंडों के 71136 आदिम जनजातीय परिवारों को 35 किलो अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है. अनाज की पैकिंग व वितरण का काम आजीविका मिशन की सखी मंडल कर रही हैं.
वित्तीय वर्ष 2017-18 में सब्सिडी व अन्य सहायता राशि के रूप में 800 करोड़ रुपये का वितरण किया गया. वर्ष 2011-12 से इस राशि में सालाना 8.5 फीसदी का इजाफा हुआ है. राज्य में कुल 57 लाख राशन कार्ड हैं, जिसमें पारिवारिक सदस्यों की संख्या 2.62 करोड़ है. आधार संख्या के जरिये राज्य भर में कुल 4.38 लाख डुप्लिकेट राशन कार्ड की पहचान कर उन्हें रद्द किया गया है. शहरी क्षेत्र में विभाग पांच रुपये में भोजन मुहैया कराने वाला दाल-भात केंद्र भी संचालित करता है.
स्वास्थ्य
झारखंड में विभिन्न स्तरों पर स्वास्थ्य सुविधा की भारी कमी है. खासकर आधारभूत संरचना के क्षेत्र में. यह झारखंड सरकार की आर्थिक रिपोर्ट में दर्ज है.
सरकार ने जो रिपोर्ट पेश की है, उसमें सरकार ने ही माना है कि स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है. झारखंड के ग्रामीण इलाकों में 6060 हेल्थ सब सेंटर की जरूरत है. जबकि अभी केवल 3958 हेल्थ सब सेंटर कार्यरत हैं. यानी 34.7 प्रतिशत की कमी है. राज्य में कुल प्राथमिक केंद्र(पीएचसी) 966 की जरूरत है, जबकि 330 ही हैं.
जिसके कारण 65.8 प्रतिशत पीएचसी की कमी है. इसी तरह 241 कम्युनिटी हेल्थ सेंटर(सीएचसी) की जगह 188 कार्यरत हैं. लगभग 22 प्रतिशत सीएचसी की कमी है. हालांकि राज्य सरकारी की ओर से कहा गया है कि स्वास्थ्य आधारभूत संरचना के विकास के लिए सरकार तेजी से काम कर रही है.
उद्योग विभाग
आर्थिक विकास दर के संदर्भ में झारखंड देश के अग्रणी राज्यों में से एक है. साल दर साल औद्योगिक क्षेत्र की विकास दर संतोषजनक रही है. वर्ष 2017-18 में विकास दर 5.58 प्रतिशत थी जबकि 2018-19 में यह 5.64 प्रतिशत हो गयी.
उद्योग अपने महत्वपूर्ण घटक उत्पादक उप क्षेत्र की अपेक्षाकृत संतोषजनक विकास दर के बावजूद अनुषंगी क्षेत्र केवल 4.8 प्रतिशत की दर से विकसित हुआ. निर्माण, बिजली, गैस, जलापूर्ति और अन्य उप क्षेत्र जैसे घटकों की धीमी वृद्धि इसके कारण रहे हैं.
राज्य की विकास दर में उद्योग का योगदान इस अवधि में 31 प्रतिशत रहा. इसमें उत्पादन का 18 प्रतिशत और खनन का 12 प्रतिशत योगदान रहा है. बिजली, गैस, जलापूर्ति और अन्य घटकों का राज्य की आर्थिक विकास में योगदान 0.5 और 1.5 प्रतिशत अर्थात नगण्य रहा.
आधारभूत संरचना एवं संचार व्यवस्था
राज्य के विकास के लिए सड़क, रेलमार्ग, नागरिक उड्डयन और ऊर्जा जैसी आधारभूत संरचना एवं संचार व्यवस्था का अत्यधिक महत्व है. इन क्षेत्रों में बेहतर सुविधाएं सार्वजनिक एवं निजी निवेश को अाकर्षित करेंगी. जो राज्य के ऊंची विकास दर की ओर अग्रसर होने के लिए आवश्यक है. कोर कैपिटल सिटी के रूप में विकास के माध्यम से राज्य को नये व्यवस्थित शहरी प्रणाली की ओर ले जाया जा सकेगा.
सरकार सड़क, तीर्थ स्थलों, पर्यटन केंद्रों, वाणिज्य केंद्रों के विकास पर ज्यादा जोर दे रही है. हाल के वर्षों में ऊर्जा की आवश्यकता में वृद्धि हुई है. नये रेल मार्ग शुरू किये गये हैं. इसके साथ ही पुराने रेलमार्गों में सुधार किया गया है. देवघर एयरपोर्ट, चियांकी एयरपोर्ट के साथ नये एयरपोर्ट के विकास का भी प्रस्ताव है.
श्रम और रोजगार
भारत में श्रम बल प्रतिभागिता(एलएफपीआर) वर्ष 2013-14 में प्रति हजार 525 से घटकर 2015-16 में 503 प्रति हजार हो गयी है. जबकि झारखंड में इसी अवधि में 489 से बढ़ कर 509 प्रति हजार हो गयी है. वर्ष 2015-16 स्त्री एलएफपीआर 20.4 प्रतिशत हो गया. जो 2013-14 में 15.6 प्रतिशत था.वर्ष 2013-14 में अखिल भारतीय स्तर पर बेरोजगारी की दर 4.9 की तुलना में झारखंड में 7.4 प्रतिशत थी. 2015-16 में बेरोजगारी दर 7.7 प्रतिशत हो गयी.
झारखंड में 53 प्रतिशत परिवार किसी प्रकार की रोजगार सृजन योजना से लाभान्वित हुए, इनमें से 35.5 प्रतिशत को मनरेगा के माध्यम से रोजगार मिला. भर्ती शिविरों से वर्ष 2017-18 में 4876 लोगों को रोजगार मिला. 2018-19 में अबतक 2492 व्यक्तियों की भर्ती की गयी है. झारखंड में प्रवासियों की संख्या 3930 है. इनमें से अधिक 1129 यूएइ गये हैं
उच्च शिक्षा
राज्य में प्राथमिक अौर उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सकल नामांकन अनुपात राष्ट्रीय अौसत (25.8 प्रतिशत) से अधिक है. उच्च शिक्षा में ग्रास इनरॉलमेंट रेट राष्ट्रीय अौसत से कम है, लेकिन इसमें उल्लेखनीय सुधार हुआ है. यह 2019-11 के साढ़े सात प्रतिशत से बढ़ कर 2017-18 में 18 प्रतिशत हो गया है. वर्तमान में प्रारंभिक शिक्षा के लिए 60 लाख विद्यार्थी झारखंड में नामांकित हैं. इनमें से 40.74 लाख प्राथमिक स्तर पर है, जबकि 20.14 लाख उच्च प्राथमिक स्तर के हैं.
वर्ष 2016-17 में झारखंड में 47 हजार 749 विद्यालय थे, जो देश के कुल विद्यालयों के 3.3 प्रतिशत थे. वर्ष 2017-18 में एक हजार आठ सौ नये विद्यालय इनमें जुड़े हैं. राज्य के विद्यालयों में इस प्रकार 3.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. शिष्य शिक्षक अनुपात झारखंड के विवि व कॉलेजों में पूरे देश के अौसत की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक है.
शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए वर्ष 2016-17 अौर 2017-18 में बड़े पैमाने पर विद्यालयों का विलय किया गया है. स्नातक स्तर पर या समान शैक्षिक स्तर पर नामांकन झारखंड में 5.7 प्रतिशत जबकि राष्ट्रीय अौसत 6.1 प्रतिशत था. किसी भी शैक्षिक संस्थान में नामांकित न होनेवाले युवाअों का प्रतिशत झारखंड अौर देश में क्रमश: 21 प्रतिशत अौर 14.4 प्रतिशत था.
पेयजल एवं स्वच्छता
वर्ष 2014-15 में रूरल पाइप वाटर सर्विस स्कीम का झारखंड में 18.54 प्रतिशत ही प्रसार था. इस वित्तीय वर्ष में यह बढ़ कर 26.40 प्रतिशत हो गया है.
कुल पाइप जलापूर्ति आच्छादित ग्रामीण निवास स्थान में से 98.49 प्रतिशत आवासों में पाइप लाइन से 55 एलपीसीडी जलापूर्ति की जाती है. वर्ष 2015-16 में 344 करोड़ रुपयों से अधिक खर्च कर 4900 पेयजल योजनाएं शुरू की गयी थीं. इसे बढ़ा कर 6900 योजनाएं कर दी गयी हैं. दिसंबर 2018 तक 122 करोड़ के कुल खर्च की 344 योजनाएं शुरू की गयी हैं. वहीं, झारखंड स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत राज्यों की सर्वेक्षण सूची में पहले स्थान पर पहुंच गया है.
राजधानी रांची ने नागरिक प्रतिपुष्टि के लिए सबसे अच्छे शहर के रूप में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है. गिरिडीह और बुंडू ने छोटे शहरों में सबसे साफ नगर का पुरस्कार प्राप्त किया है. चाईबासा ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में अव्वल स्थान पाया है. ग्रामीण झारखंड और राज्य के 11 बड़े शहर ओडीएफ हैं. राज्य में शौचालय की सुविधा वाले घरों की संख्या 68 हजार से बढ़ कर 33 लाख से अधिक हो गयी है.
पर्यटन
पर्यटन के आंकड़ों के अनुसार झारखंड में सकारात्मक परिवर्तन आया है. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई है. राज्य में पर्यावरणीय पर्यटन क्षेत्र, रजरप्पा मंदिर, वासुकीनाथ, ग्रामीण पर्यटन क्षेत्र, पतरातू, पारसनाथ पहाड़ी, चांडिल डैम आदि के विकास की योजनाएं शुरू की गयी हैं.
झारखंड भ्रमण बाजार, शरद उत्सव, साहसिक रैली, श्रावणी मेला, रजरप्पा महोत्सव, ईटखोरी महोत्सव, आदि महोत्सव, छऊ महोत्सव, लोकमंथन जैसी गतिविधियों का आयोजन पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए किया गया है. दूसरी ओर, राज्य सरकार खेल और खिलाड़ियों को भी बढ़ावा दे रही है. तीरंदाजी, हॉकी, खेल-कूद, खो-खो और फुटबॉल में राज्य के खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा प्राप्त की है.
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