रांची : ब्लड मंगाने के बजाय रक्तदान शिविर लगायें निजी अस्पताल
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 Jan 2019 12:20 AM (IST)
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रांची : स्वास्थ्य सचिव डॉ नितिन कुलकर्णी ने शहर के निजी अस्पतालों को रक्तदान शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया है. पिछले छह माह में 343 निजी अस्पतालों ने करीब 32,989 यूनिट ब्लड इस्तेमाल किया है, लेकिन रक्तदान कराने में उनकी रुचि नहीं है. वैसे अस्पताल जो महीने में 100 से ज्यादा यूनिट ब्लड इस्तेमाल […]
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रांची : स्वास्थ्य सचिव डॉ नितिन कुलकर्णी ने शहर के निजी अस्पतालों को रक्तदान शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया है. पिछले छह माह में 343 निजी अस्पतालों ने करीब 32,989 यूनिट ब्लड इस्तेमाल किया है, लेकिन रक्तदान कराने में उनकी रुचि नहीं है.
वैसे अस्पताल जो महीने में 100 से ज्यादा यूनिट ब्लड इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए रक्तदान शिविर आयोजित कराना अनिवार्य है. विभाग की चिट्ठी भी जारी की जा चुकी है, लेकिन कोई असर नहीं हो रहा है.
डॉ कुलकर्णी शुक्रवार को सदर अस्पताल के नये भवन में हिमोफिलिया डे केयर सेंटर का शुभारंभ करने पहले सिविल सर्जन कार्यालय सभागार में निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों के साथ आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे.
स्वास्थ्य सचिव ने डॉक्टरों से भी कहा कि मरीजों को होल ब्लड का परामर्श नहीं दें. बल्कि इसकी जगह ब्लड कंपोनेंट दें, जिससे दो या तीन मरीजों को लाभ मिले. निजी अस्पताल कंपोनेंट सेपरेटर इंस्टॉल करने का भी निर्देश दिया.
इसके अलावा स्वास्थ्य सचिव ने हिमोफिलिया मरीजों से संबंधित पोस्टर-बैनर लगाकर लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया. मौके पर सिविल सर्जन डॉ वीवी प्रसाद, उपाधीक्षक डॉ एके झा व अस्पताल के डॉक्टर व कर्मचारी मौजूद थे.
बंद था शिशु वार्ड का ताला, खोलने का दिया निर्देश
स्वास्थ्य सचिव ने सदर अस्पताल में स्थित शिशु वार्ड का भी निरीक्षण किया. इस दौरान एक कमरे में ताला बंद था, जिसे देख कर स्वास्थ्य सचिव नाराज हो गये.
उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक वार्ड का उपयोग किया जाये, जिससे मरीजों को लाभ पहुंचे. अस्पताल में कई जगह परिवर्तन करने का निर्देश भी दिया. उन्होंने कहा कि राज्य के सभी सदर अस्पताल को अत्याधुनिक बनाने का प्रयास चल रहा है.
फरवरी में होनी है कक्षा आठ की बोर्ड परीक्षा
पारा शिक्षकों की हड़ताल के कारण पाठ्यक्रम पूरा नहीं हो पाया है. फरवरी के प्रथम सप्ताह में कक्षा आठ की बोर्ड परीक्षा प्रस्तावित है. इसके अलावा विद्यार्थियों का वार्षिक मूल्यांकन भी होना है. आखिर इसका क्या विकल्प निकाला जायेगा, इसको लेकर विद्यार्थियों के अभिभावक परेशान हैं.
विद्यार्थी भी ऊहापोह की स्थिति में हैं. हड़ताल अवधि के दौरान पठन-पाठन की भरपाई को लेकर शिक्षा विभाग द्वारा फिलहाल कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किया गया है.
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