चारा घोटाला मामला : लालू की जमानत पर सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित, लालू प्रसाद की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Jan 2019 12:05 AM

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रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत में शुक्रवार को चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की अोर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई हुई. प्रार्थी व सीबीआइ की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. इससे पूर्व […]

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रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत में शुक्रवार को चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की अोर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई हुई.
प्रार्थी व सीबीआइ की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. इससे पूर्व प्रार्थी लालू प्रसाद की अोर से सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखते हुए कहा कि वे (लालू प्रसाद) बुजुर्ग हो गये हैं.
उनकी उम्र 71 वर्ष हो चुकी है. साथ ही कई गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं. मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति है. उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है. सरकारी गवाह की गवाही के आधार पर सीबीआइ की विशेष अदालत ने सजा सुनायी है. आरसी-68ए/96 में जो केस व सबूत हैं, वही आरसी-20ए/96 केस में एक समान है.
श्री सिब्बल ने कहा कि लालू प्रसाद राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. लोकसभा चुनाव होनेवाला है. उम्मीदवारों को सिंबल देने के लिए अध्यक्ष के हस्ताक्षर की जरूरत होती है. इसलिए उन्हें नियमित जमानत दी जानी चाहिए. उनका साथ पटना हाइकोर्ट के वरीय अधिवक्ता चितरंजन प्रसाद व अधिवक्ता प्रभात कुमार दे रहे थे.
प्रार्थी का स्वास्थ्य उतना खराब नहीं है, जितना बताया जा रहा है
वहीं, सीबीआइ की अोर से अधिवक्ता राजीव सिन्हा ने प्रार्थी की दलील का विरोध किया. उन्होंने कहा कि चारा घोटाले के इन तीन मामलों में प्रार्थी के खिलाफ पुख्ता सबूत है. उच्चस्तरीय षडयंत्र के तहत कोषागारों से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी की गयी थी. अवैध निकासी को रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गयी.
उसे होते रहने दिया गया. इस षडयंत्र में राजनेता, ब्यूरोक्रेटस व सप्लायर शामिल थे. यह बात साबित हो चुकी है. प्रार्थी 20ए/96 में सुुप्रीम कोर्ट से जमानत पर हैं. प्रार्थी का स्वास्थ्य उतना खराब नहीं है, जितना बताया जा रहा है. रिम्स प्रबंधन ने कोई ऐसी बात नहीं कही है कि लालू प्रसाद की स्थिति चिंताजनक है.
सजा को बढ़ाने के लिए सीबीआइ ने अपील दायर की है. अधिवक्ता श्री सिन्हा ने कहा कि प्रार्थी ने कोई नयी बात नहीं कही है. सिर्फ पुरानी बातों को दोहराया है. पूर्व में भी प्रार्थी की अोर से यही दलील दी गयी थी, जिसके बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी थी.
आैपबंधिक जमानत पर कोई आपत्ति नहीं है
नयी बात सिर्फ यह है कि निकट भविष्य में लोकसभा का चुनाव होनेवाला है. प्रार्थी एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष हैं. चुनाव में भागीदारी के लिए वे जेल से बाहर आना चाहते हैं.
इलाज की जरूरत है, तो आैपबंधिक जमानत पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है. नियमित जमानत का उन्होंने विरोध किया. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने तीन मामलों में जमानत याचिका (आइए) दायर की है.
उन्होंने नियमित जमानत देने का आग्रह किया है. सीबीआइ की विशेष अदालत ने चारा घाेटाले के आरसी38ए/96, आरसी-64ए/96 व आरसी-68ए/96 में दोषी पाने के बाद लालू प्रसाद को सजा सुनायी है. प्रार्थी ने पूर्व में हाइकोर्ट में अपील याचिका दायर कर सजा को चुनाैती दी है.
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