नागराकाटा : रेडबैंक चाय बागान में एक माह में आठ लोगों की मौत
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :01 Jan 2019 9:32 AM (IST)
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नागराकाटा : रेड बैंक चाय बागान में सूखे के इस मौसम में श्रमिकों की आर्थिक तंगी चरम पर आ गयी है. सरकारी राशन मिलने से चावल की कमी नहीं है. लेकिन कुपोषण से बीमारों के इलाज के लिए पैसे नहीं है. आलम यह है कि लगभग एक महीने के भीतर बागान में आठ लोगों की […]
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नागराकाटा : रेड बैंक चाय बागान में सूखे के इस मौसम में श्रमिकों की आर्थिक तंगी चरम पर आ गयी है. सरकारी राशन मिलने से चावल की कमी नहीं है. लेकिन कुपोषण से बीमारों के इलाज के लिए पैसे नहीं है. आलम यह है कि लगभग एक महीने के भीतर बागान में आठ लोगों की मौत हो चुकी है. मृतकों के परिजनों का कहना है कि पैसे की अभाव में बीमार का इलाज कराना संभव नहीं हो सका.
बागान सूत्रों से पता चला है कि एक महीने के भीतर रेड बैंक चाय बागान में आठ लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें बासुदेव उरांव (48), भजन सरकार (58), रोशन गुरुंग (45), चुइयु उरांव (50), किशोर एक्का (52), त्रितमनी उरांव (57), अनिल मुंडा (34) एवं साधो उरांव (56) शामिल है. इनमें से कोई अपर लाइन, कोई मध्य लाइन तो कोई गिर्जा लाइन के निवासी थे. इनमें किसी की मौत घर तो किसी की अस्पताल में हुई है. सबसे अंतिम मौत 24 दिसंबर को गिर्जा लाइन निवासी किशोर एक्का की हुई है.
उसके बेटे रबर्ट ने बताया कि पिता काफी दिनों से बीमार था. पैसे के अभाव में ठीक से इलाज नहीं करवा पाया. सरकारी अस्पताल में डेढ़ महीने पहले भर्ती करवाया गया था. वहां से छुट्टी दे दी गयी, लेकिन बीमारी ठीक नहीं हुई थी. इसके बाद घर पर ही उसकी मौत हो गयी. किशोर के घर से थोड़ी ही दूरी पर मृत अनील मुंडा का घर है. पति की मौत के बाद दो नाबालिग बच्चों के साथ उसकी पत्नी मिलिना का रो-रो कर बुरा हाल है. महिला ने बताया कि उसके पति को कई बीमारियों ने घेर लिया था. अस्पताल से अभी अभी घर लाया ही था. पैसे के अभाव से ठीक से इलाज नहीं करवा पायी. 100 दिन के काम का पैसा भी कई महीनों से नहीं मिल रहा है.
रेड बैंक चाय बागान के श्रमिकों ने बताया कि सरकारी राशन, मासिक अनुदान समय पर मिलता है. लेकिन सरकारी एंबुलेंस परिसेवा बंद है. बीमार को अस्पताल ले जाने के लिए जेब से ही पैसे खर्च करने पड़ते है.
स्वास्थ्य विभाग की ओर से सप्ताह में 3 दिन एक मेडिकल टीम बागान के अस्पताल में बैठती है. लेकिन गंभीर रूप से बीमार को अस्पताल ले जाना ही सबसे बड़ी समस्या है. 100 दिन का काम चालु है लेकिन मजदूरी नियमित नहीं मिलती है. अंतिम बार दो महीने पहले 14 दिन का रुपए मिला था. अभी तक 30 से 32 दिन का रुपया बकाया है. पेयजल की समस्या है. और भी कई समस्यायों से बागान श्रमिक जूझ रहे है.
मामले को लेकर नागराकाटा विधायक सुकरा मुंडा ने बताया कि 100 दिन के काम का रुपया श्रमिकों को जल्द देने के लिए प्रशासन से बात की जा रही है. सरकारी परिसेवा दिया जा रहा है. अन्य समस्याओं को भी देखा जायेगा.
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