रांची : पिछड़ा वर्ग के आरक्षण पर सरकार भरमाये नहीं: आजसू
Updated at : 26 Dec 2018 7:28 AM (IST)
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रांची : मुख्यमंत्री ने पिछड़ों को जनसंख्या के अनुरूप आरक्षण देने की घोषणा की है. इस पर आजसू ने तिखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. वहीं कुछ संगठनों ने आरक्षण को लेकर अपनी अलग-अलग मांगें रखी हैं. रांची : आजसू पार्टी के विधायक राजकिशोर महतो ने कहा है कि राज्य में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को […]
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रांची : मुख्यमंत्री ने पिछड़ों को जनसंख्या के अनुरूप आरक्षण देने की घोषणा की है. इस पर आजसू ने तिखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. वहीं कुछ संगठनों ने आरक्षण को लेकर अपनी अलग-अलग मांगें रखी हैं.
रांची : आजसू पार्टी के विधायक राजकिशोर महतो ने कहा है कि राज्य में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को लेकर सरकार भरमाने का काम नहीं करे़ पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए़ यह उनका संवैधानिक अधिकार है़ लंबे समय से इस अधिकार को लेकर आवाज उठायी जाती रही है, लेकिन सरकार ने कभी ठोस कदम नहीं उठाया़
आजसू विधायक ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रकाशित असाधारण अंक संख्या 296, 29 नवंबर 2001 को देखने पर स्थिति स्पष्ट हो जायेगी़
अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया गया था, जिसमें सुदेश महतो समेत कई लोग सदस्य थे़ इस समिति ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए अधिनियम 1991 को संशोधित करने का निर्णय लिया था़ उपसमिति की अनुशंसा राज्य में 73 प्रतिशत आरक्षण देने की थी जिसमें अनुसूचित जनजाति को 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 14 प्रतिशत एवं पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की अनुशंसा की गयी थी़ श्री महतो ने कहा है कि मुख्यमंत्री यह बता रहे हैं कि आबादी के अनुरूप आरक्षण मिलेगा और इससे पहले जिलों में सर्वेक्षण कराया जायेगा़
आजसू पार्टी पहले से ही इस बात पर जोर देती रही है कि 2011 में जातिगत जनगणना व सर्वे कराये गये थे़ पहले उसकी सूची जारी की जाये़ राज्य सरकार अविलंब निर्णय ले और गोलमोल बात करने की जगह पिछड़ों को उनका संवैधानिक अधिकार दे़ आजसू नेता ने कहा कि एकीकृत बिहार में भी पिछड़े वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण हासिल था़ अब अलग राज्य में उन्हें 14 फीसदी का भागीदार बना दिया गया है, यह अन्याय है़
रांची : झारखंड पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा ने पिछड़ों के अधिकार को लेकर मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा की गयी घोषणा का स्वागत किया है.
इसी कड़ी में मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को अलबर्ट एक्का चौक पर जुलूस निकाला और मिठाई बांटी. साथ ही कहा कि झारखंड में पिछड़ों की आबादी 56 प्रतिशत से अधिक है, इसी के मद्देनजर 2002 में बाबूलाल मरांडी के मंत्रिमंडल ने 73 प्रतिशत आरक्षण का निर्णय लिया था, जिसका समर्थन हाइकोर्ट के पांच जजों के संवैधानिक पीठ ने भी की थी, लेकिन तत्कालीन मरांडी सरकार ने इसे लागू नहीं किया. अब सुप्रीम कोर्ट ने भी 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण लागू करने के लिए राज्य सरकारों को छूट दी है. ऐसे में अब राज्य सरकार भी जनसंख्या के अनुपात में पिछड़ों को 36 प्रतिशत आरक्षण देने का कार्य अविलंब करे.
जुलूस का नेतृत्व राज्य के पूर्व मंत्री एवं मोर्चा के अध्यक्ष लालचंद महतो, भाजपा विधायक जय प्रकाश वर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष रमाकांत महतो, डॉ दिलीप सोनी, पूर्व विधायक छत्रु राम महतो, अब्दुल खालिक, उपेंद्र सिंह, महेश महतो, अधिवक्ता संतोष सिन्हा, गौरी शंकर यादव, राजू प्रजापति, रेखा प्रजापति, रंजना जायसवाल, दिनेश प्रजापति, अनुज सिन्हा, विक्रांत विश्वकर्मा, अरुण कश्यप, सागर कुमार, पंकज प्रजापति, चंद्रिका महतो एवं अन्य ने किया.
रांची : लोकसभा चुनाव से पहले पिछड़ों को मिले आरक्षण : सुनील महतो
रांची : मुख्यमंत्री द्वारा पिछड़ों को जनसंख्या के अनुरूप आरक्षण देने की घोषणा स्वागत योग्य है. किंतु जिलावार सर्वेक्षण के बाद ही उसका लाभ देने की बात उनकी नीयत में खोट को दर्शाता है. यह बातें सामाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्ता सुनील महतो ने कही. श्री महतो ने कहा कि मंडल कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर पिछड़े वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए किसी अन्य रिपोर्ट और सर्वेक्षण की आवश्यकता नहीं है.
जिला स्तर की नियुक्तियों में सात जिलों में पिछड़ों का आरक्षण शून्य प्रतिशत है. इन जिलों में पिछड़ों को आरक्षण एसइसीसी डाटा-2011 के आधार पर दिया जा सकता है. 4893.60 करोड़ रुपये खर्च कर रिपोर्ट को सार्वजनिक न करना सरकार की मंशा को दर्शाता है. श्री महतो ने कहा कि झारखंड में पंचायत चुनाव 2015 में 2011 की जनगणना के आधार पर पिछड़े वर्ग के लिए सीटें आरक्षित की गयी थीं. सरकार के पास वार्ड स्तर तक सारे जातिगत आंकड़े उपलब्ध हैं. इसके आधार पर सरकार जिला स्तर के आरक्षण रोस्टर में सुधार कर पिछड़ों को आरक्षण का लाभ दे सकती है.
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