रांची : मृदा स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक खेती जरूरी : वीसी
Updated at : 06 Dec 2018 9:38 AM (IST)
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बिरसा कृषि विवि में मृदा दिवस पर सेमिनार का आयोजन रांची : बिरसा कृषि विवि के कुलपति डॉ पी कौशल ने कहा कि मिट्टी से अधिकाधिक उपज लेने की होड़ और रासायनिक उर्वरकों-कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग के कारण मृदा स्वास्थ्य का क्षरण हो रहा है. इसे गोबर व गोमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती से ही रोका […]
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बिरसा कृषि विवि में मृदा दिवस पर सेमिनार का आयोजन
रांची : बिरसा कृषि विवि के कुलपति डॉ पी कौशल ने कहा कि मिट्टी से अधिकाधिक उपज लेने की होड़ और रासायनिक उर्वरकों-कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग के कारण मृदा स्वास्थ्य का क्षरण हो रहा है.
इसे गोबर व गोमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती से ही रोका जा सकता है. मिट्टी और इसमें रहनेवाले सूक्ष्म जीवों को नुकसान पहुंचाये बिना होनेवाली ऐसी प्राकृतिक खेती के उत्पाद में स्वाद के साथ-साथ पोषक तत्वों की भी अधिकता होती है. कुलपति बुधवार को भारतीय मृदा विज्ञान सोसाइटी के रांची चैप्टर और बीएयू द्वारा विश्व मृदा दिवस पर आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे.
कुलपति ने कहा कि प्रकृति हमारी आवश्यकता की तो पूर्ति कर सकती है, लेकिन हमारे लालच की नहीं.एक इंच मिट्टी की ऊपरी सतह बनने की प्रक्रिया में हजार वर्ष से अधिक लगते हैं, लेकिन तेजी से बहनेवाले बारिश के पानी के कारण इस उपजाऊ मिट्टी का कटाव शीघ्रता से हो जाता है. अनुसंधान निदेशक डॉ डीएन सिंह ने कहा कि देश की 40-50 प्रतिशत मिट्टी अम्लीय और बीमार है. इसका लाभकारी उपयोग करने के लिए समुचित उपचार करने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि मिट्टी स्वस्थ होगी, तभी हमें पौधों से पोषक तत्व मिलेगा. कृषि डीन डॉ राघव ठाकुर ने कहा कि भविष्य में खाद्यान्न संकट नहीं हो, इसके लिए भावी पीढ़ी को अच्छी मिट्टी सौंपनी होगी. मृदा विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ डीके शाही ने कहा कि रासायनिक खाद के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण पंजाब-हरियाणा की मिट्टी में रासायनिक उर्वरक डालने पर भी अब उत्पादकता घट रही है.
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