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भी आगे बढ़ें, अपने समाज, धरती को न भूलें : राज्यपाल

Updated at : 25 Nov 2018 2:21 AM (IST)
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भी आगे बढ़ें, अपने समाज, धरती को न भूलें : राज्यपाल

रांची : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि बाहर के लोग यह कहते हैं कि झारखंड तो अमीर है, पर यहां के लोग गरीब हैं. देश की 40 फीसदी खनिज संपदा झारखंड में है. इसके बाद भी यहां के लोग गरीब हैं. पर हम जिन्हें गरीब कहते हैं, वे करोड़पति हैं. सोना, कोयला, अबरख, […]

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रांची : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि बाहर के लोग यह कहते हैं कि झारखंड तो अमीर है, पर यहां के लोग गरीब हैं. देश की 40 फीसदी खनिज संपदा झारखंड में है. इसके बाद भी यहां के लोग गरीब हैं. पर हम जिन्हें गरीब कहते हैं, वे करोड़पति हैं. सोना, कोयला, अबरख, बॉक्साइड के ऊपर रहते हैं.
पर इन खनिज पदार्थों के उपयोग के लिए हम वहां रहनेवालों के लिए क्या करते हैं, हमें यह भी सोचना चाहिए. उक्त बातें राज्यपाल ने शनिवार को रांची विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के तत्वावधान में आर्यभट्ट सभागार में वित्तीय समावेश व समेकित विकास विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के उदघाटन सत्र में कहीं.
उन्होंने कहा कि आज हमारे लोग देश के साथ विदेशों में भी अपना नाम कर रहे हैं, पर यह हमारा कर्तव्य है कि हम जहां से आये हैं उसे कभी नहीं भूलें. हम जीवन में कितना भी आगे क्यों न चले जायें- अपनी धरती व अपने समाज को कभी नहीं भूलें. उन्होंने कहा कि इस सेमिनार में जो भी बात सामने आये वह लागू भी हो, इसे सुनिश्चित कराया जाये.
उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेश के लिए लोगों तक बैंक का पहुंच होना आवश्यक है. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश के मात्र 58.7 फीसदी हाउस होल्डर के पास बैंकिंग सेवा उपलब्ध थी. लोगों के समेकित विकास के लिए जन धन योजना के तहत बैंक खाता खोला गया. इससे हमारे ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के गरीब लोगों तक बैंकिंग सेवा पहुंची है. मौके पर सेमिनार के सोवेनियर का विमोचन किया गया.
संसाधनों का उचित बंटवारा राज्य की जिम्मेदारी : भूपेंद्र यादव
राज्यसभा सांसद भूपेंद्र यादव ने कहा कि किसी भी राज्य की यह पहली जिम्मेदारी है कि संसाधनों का उचित बंटवारा हो. बजट की राशि अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे. लोगों को गरीबी रेखा से बाहर नहीं करेंगे, विकास की बात बेमानी होगी. स्वतंत्रता के बाद देश में विकास के कई मॉडल अपनाये गये. उन्होंने कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र का दायरा बढ़ाया.
केंद्र सरकार ने साढ़े चार वर्ष में 33 करोड़ लोगों का बैंक खाता खुलवाया. इसमें 53 फीसदी महिलाएं हैं. इनमें 59 फीसदी महिलाएं ग्रामीण क्षेत्र की हैं. 7.5 करोड़ लोगों को डीबीटी के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है. 2014 में जहां एक फीसदी लोग रूपे कार्ड का प्रयोग करते थे, आज यह संख्या बढ़ कर 36 फीसदी हो गयी है.
देश के आर्थिक विकास के लिए सभी को आगे आना होगा. सरकार ने लोगों के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए कई कार्यक्रम चलाये. इसका सकारात्मक असर देखने को मिला है. लोगों तक बैंकिंग सेवा की पहुंच के साथ-साथ गुणवत्ता युक्त सेवा बढ़ायी गयी है. मुद्रा लोन के लिए सबसे अधिक पैसा दिया गया है.
समेकित विकास के क्षेत्र में मददगार साबित होगा यह सेमिनार : वीसी
रांची विवि के कुलपति डॉ रमेश कुमार पांडेय ने कहा कि यह सेमिनार वित्तीय समावेश एवं समेकित विकास के क्षेत्र में काफी मददगार साबित होगा. इसमें देश-विदेश के प्रतिभागी भाग ले रहे हैं. विश्वविद्यालय की प्रतिकुलपति प्रो कामिनी कुमार ने कहा कि किसी विश्वविद्यालय की पहचान उसके शोध कार्य से होती है.
देश के विकास के लिए समाज के सभी वर्ग के लोगों का विकास सुनिश्चित करना होगा. विश्वविद्यालय के कुलसचिव अमर कुमार चौधरी ने सेमिनार के उद्देश्य के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि सेमिनार में अमेरिका, नेपाल, भूटान, थाइलैंड के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं. सेमिनार में 287 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं.
अतिथियों का स्वागत कॉमर्स विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ एसएनएल दास ने किया व धन्यवाद ज्ञापन मुकुंद चंद मेहता ने किया. सेमिनार में रांची विश्वविद्यालय के कॉमर्स संकायाध्यक्ष डॉ जीके श्रीवास्तव, विवि के पूर्व कुलपति डॉ एलएन भगत समेत अन्य लोग उपस्थित थे.
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