रांची : पारा शिक्षक के बाद मुखिया-मनरेगाकर्मी हड़ताल पर, पंचायत सेवक व कंप्यूटर ऑपरेटर कर रहे हैं मनरेगा का काम
Updated at : 19 Nov 2018 7:21 AM (IST)
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बीडीओ को मुखिया की जिम्मेदारी, पंचायत सेवक व कंप्यूटर अॉपरेटर कर रहे हैं मनरेगा का काम रांची : चार दिनों से पारा शिक्षकों के साथ-साथ राज्य भर के मुखिया और मनरेगाकर्मी भी हड़ताल पर हैं. मुखिया और मनरेगाकर्मी के हड़ताल पर चले जाने से पंचायतों और मनरेगा की योजनाएं प्रभावित होने लगी हैं. इधर, हड़ताल […]
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बीडीओ को मुखिया की जिम्मेदारी, पंचायत सेवक व कंप्यूटर अॉपरेटर कर रहे हैं मनरेगा का काम
रांची : चार दिनों से पारा शिक्षकों के साथ-साथ राज्य भर के मुखिया और मनरेगाकर्मी भी हड़ताल पर हैं. मुखिया और मनरेगाकर्मी के हड़ताल पर चले जाने से पंचायतों और मनरेगा की योजनाएं प्रभावित होने लगी हैं. इधर, हड़ताल को देखते हुए अलग-अलग जिलों में व्यवस्था की जा रही है. प्रयास चल रहा है कि काम पर कोई असर न पड़े.
बिना मुखिया राशि की निकासी नहीं : हड़ताल से मनरेगा, 14 वें वित्त आयोग और शौचालय निर्माण पर असर पड़ रहा है. इनका क्रियान्वयन मुखिया के माध्यम से होता है. राशि निकासी के लिए मुखिया के हस्ताक्षर जरूरी हैं. वहीं, शौचालय निर्माण के लिए बनी ग्राम जल स्वच्छता समिति के अध्यक्ष भी मुखिया ही होते हैं. 14वें वित्त आयोग का पैसा सीधे मुखिया के खाते में जाता है. ऐसे में इस राशि की निकासी भी नहीं हो पायेगी.
भूख हड़ताल की दी चेतावनी : झारखंड मुखिया संघ के अध्यक्ष विकास महतो ने कहा कि वे 15 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. इसके बाद भी सरकार ने मांगें पूरी नहीं की, तो भूख हड़ताल पर बैठेंगे. कहा कि एक ओर सरकार उनसे समस्या बताने को कहती है, लेकिन समस्या पर सुनवाई नहीं होती है.
इधर खूंटी सहित अन्य जिलों में मुखिया के कार्यों की जिम्मेदारी बीडीओ को दी गयी है. खूंटी में बीडीअो ही मनरेगा की राशि निकासी पर साइन करेंगे.
मुखियाओं की यह है मांग : झारखंड मुखिया संघ सरकार से 14वें वित्त आयोग की राशि रिलीज करने की मांग कर रहा है.संघ का कहना है कि अब तक पहली किस्त की राशि भी नहीं दी गयी है. इतना ही नहीं आदिवासी विकास समिति और ग्राम विकास समिति का गठन कर मुखिया के अधिकारों का हनन किया जा रहा है.
ये भी हैं हड़ताल पर : सभी जिलों में प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी, इंजीनियर, लेखा सहायक, रोजगार सेवक भी हड़ताल पर हैं. रांची जिले के सभी कर्मी राजभवन के समक्ष धरना दे रहे हैं.
उनका कहना है कि अब तक सरकार के किसी भी पदाधिकारी से कोई वार्ता नहीं हुई है. उन्होंने हड़ताल के पूर्व कई आंदोलनात्मक कार्यक्रम चलाया. साथ ही अफसरों व मंत्री को हड़ताल पर जाने के कार्यक्रम से अवगत भी करा दिया था. राज्य भर के मनरेगाकर्मी एकजुट हैं. समान काम के लिए समान वेतन की मांग पूरी होने तक हड़ताल पर रहेंगे.
मनरेगा: हर जिले में की गयी वैकल्पिक व्यवस्था
रांची : राज्य भर के मनरेगाकर्मियों के 16 नवंबर से हड़ताल पर जाने की वजह से मजदूरों को काम देने की गति धीमी हो गयी है. वहीं, मजदूरी से संबंधित डिमांड भी कम ली जा रही है. इधर वैकल्पिक व्यवस्था के तहत प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी का प्रभार प्रखंड विकास पदाधिकारियों को दिया गया है.
वहीं रोजगार सेवकों का प्रभार पंचायत सेवकों को दिया गया है. जिला से आदेश दिया गया है कि किसी भी हाल में मनरेगा के भुगतान में कोताही न हो. ऐसे में बीडीअो व पंचायत सेवकों पर पूरी जिम्मेदारी दी गयी है. पंचायतों में पंचायत सेवक व प्रखंड के कंप्यूटर अॉपरेटर से मनरेगा का काम कराया जा रहा है.
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