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प्रभात खबर विशेष बातचीत : ये है बुधिया परिवार जिन्‍होंने रांची को पहली बार दिखायी थी बिजली

Updated at : 22 Oct 2018 6:30 AM (IST)
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प्रभात खबर विशेष बातचीत : ये है बुधिया परिवार जिन्‍होंने रांची को पहली बार दिखायी थी बिजली

रांची को दिलायी एक अलग पहचान, कई क्षेत्रों में सफलतापूर्वक काम कर रहा शहर का प्रतिष्ठित बुधिया परिवार राजेश कुमार रांची : रांची का प्रतिष्ठित बुधिया परिवार. यह परिवार किसी परिचय का मुहताज नहीं है. बुधिया परिवार का इतिहास काफी पुराना है. शिक्षा के क्षेत्र के विकास से लेकर ट्रांसपोर्ट, वैज्ञानिक खेती, मनोरंजन, कोल्ड स्टोरेज, […]

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रांची को दिलायी एक अलग पहचान, कई क्षेत्रों में सफलतापूर्वक काम कर रहा शहर का प्रतिष्ठित बुधिया परिवार
राजेश कुमार
रांची : रांची का प्रतिष्ठित बुधिया परिवार. यह परिवार किसी परिचय का मुहताज नहीं है. बुधिया परिवार का इतिहास काफी पुराना है. शिक्षा के क्षेत्र के विकास से लेकर ट्रांसपोर्ट, वैज्ञानिक खेती, मनोरंजन, कोल्ड स्टोरेज, एजेंसी, स्टील निर्माण के क्षेत्र में रांची को अलग पहचान दिलायी. आज यह परिवार विभिन्न क्षेत्रों में सफलतापूर्वक काम कर रहा है.
पूर्व राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद से भी बुधिया परिवार का पुराना रिश्ता रहा है. 23 फरवरी, 1950 को विकास विद्यालय का भूमि पूजन प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद द्वारा बुधिया परिवार के अनुरोध पर किया गया था.
1935 में बिजली कंपनी शुरू की गयी : अरुण बुधिया कहते हैं कि 1935 में रांची इलेक्ट्रिक सप्लाइ कंपनी लिमिटेड की शुरुआत परदादा गणपत राय बुधिया ने की थी. चुटिया में टरबाइन स्टीम इंजन से चलता था और एक मेगावाट बिजली का उत्पादन होता था. रांची को पहली बार बिजली बुधिया परिवार ने ही दिखायी थी. 1924 में अकाल के समय गणपत राय बुधिया ने जरूरतमंदों के बीच बहुत बड़ी मात्रा में मुफ्त चावल बांटा था, इसके चलते उन्हें राय साहब की उपाधि मिली थी.
वहीं, 1929 में राधाकृष्ण बुधिया ने ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय शुरू किया. उस समय पांच से छह बसें राधेश्याम के नाम से चलती थीं. रांची से पुरुलिया के लिए बसें चलती थीं. इन बसों का स्टैंड संकट मोचन मंदिर के पास होता था. इसी मंदिर के पीछे पेट्रोल पंप भी था. वहीं, 1940 में रांची कोल्ड स्टोरेज शुरू किया गया, जिससे फल, आलू और सब्जी खराब होने से बचने लगीं.
मिनी स्टील प्लांट से लेकर विष्णु टॉकीज की स्थापना
अरुण बुधिया कहते हैं कि गंगा प्रसाद बुधिया ने 1946 में लोगों के मनोरंजन के लिए विष्णु टॉकीज की शुरुआत की. महाबीर बुधिया ने किर्लोस्कर सहित बड़ी कंपनियों की एजेंसी ली. हरिकृष्ण बुधिया ने 1971 में अमेरिका से रसायन तकनीकी में पीएचडी कर आये और 1973 में बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड के नाम से रामगढ़ में मिनी स्टील प्लांट लगाया, आज इसमें पावर, स्पंज आयरन, स्टील बिलेट, फेरो एलॉय के प्लांट चल रहे हैं.
अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में जेल में रहे आत्माराम बुधिया
बुधिया परिवार के सदस्य अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में भी शामिल हो चुके हैं. गणपत राय बुधिया के पौत्र आत्माराम बुधिया 1942 के आंदोलन में लगभग 18 माह हजारीबाग जेल में रहे. इनके साथ लोकनायक जयप्रकाश नारायण, श्रीकृष्ण सिंह, जगजीवन बाबू भी थे.
उन्हें सरकार ने स्वतंत्रता सेनानी के रूप में ताम्रपत्र और 300 रुपये पेंशन देने की पेशकश की थी, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था. उन्होंने 1965 में वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए अपने बड़े पुत्र राजेंद्र को रूस भेजा, वहां से वे ट्रैक्टर से खेती करना सीखे और रशियन ट्रैक्टर की डीलरशिप लेकर आये. अपने मेसरा फार्म में ट्रैक्टर से खेती शुरू की, यहीं पर शंकर मक्का बीज का उत्पादन भी मंझले पुत्र देवेंद्र ने 1973 में अमेरिका से प्रशिक्षण प्राप्त कर किया. आत्माराम बुधिया ने शुरुआत में नागरमल मोदी सेवा सदन के अध्यक्ष के रूप में भूमिका निभायी.
शिक्षा के विकास के लिए जमीन भी दान की
शिक्षा के विकास के लिए बुधिया परिवार ने कई नामी संस्थाओं को जमीन भी दान की एवं इनके निर्माण में उल्लेखनीय काम किया. इसमें बीआइटी मेसरा, विकास विद्यालय, मारवाड़ी कॉलेज आदि शामिल हैं. गंगा प्रसाद बुधिया ने अपने पिता गणपत राय के नाम से कुम्हारटोली में गणपति संस्कृत विद्यालय एवं महाविद्यालय का निर्माण कराया. 1933 में मारवाड़ी स्कूल का निर्माण कराया.
रांची इलेक्ट्रिक के कार्यालय में चेंबर की स्थापना
आत्माराम बुधिया ने रांची इलेक्ट्रिक के कार्यालय में छोटानागपुर चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की स्थापना 1960 में की थी, लगभग 12 वर्षों तक चेंबर इनके निजी कार्यालय से इनकी देखरेख में मजबूत हुआ.
परिवार के सदस्य टाटा मोटर्स, महिंद्रा ट्रैक्टर, हुंडई मोटर्स के वाहन विभिन्न एजेंसी के माध्यम से बिक्री कर रहे हैं. गंगा प्रसाद बुधिया के पांच पुत्र जगमोहन प्रसाद बुधिया, शिवप्रसाद बुधिया, ज्ञान प्रकाश बुधिया, विजय कुमार बुधिया एवं रामप्रसाद बुधिया हैं. वहीं, जगमोहन प्रसाद के पुत्रों में अरुण बुधिया और संजय बुधिया हैं.
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