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द ट्रैफिकिंग ऑफ पर्सन बिल में संशोधन से मानव तस्करी पर लगेगी रोक : सुनीता

Updated at : 06 Oct 2018 1:14 AM (IST)
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द ट्रैफिकिंग ऑफ पर्सन बिल में संशोधन से मानव तस्करी पर लगेगी रोक : सुनीता

रांची : विश्व में 180 लाख लोग गुलामी का जीवन जी रहे हैं, जिसमें 14 लाख वेश्यालयों में कार्यरत हैं. भारत में 30 लाख लोग वेश्यावृति में लगे हुए हैं. उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में 21 हजार बच्चों को मानव तस्करी और वेश्यावृत्ति से बचाने का काम किया है. यह बातें पद्मश्री सुनीता […]

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रांची : विश्व में 180 लाख लोग गुलामी का जीवन जी रहे हैं, जिसमें 14 लाख वेश्यालयों में कार्यरत हैं. भारत में 30 लाख लोग वेश्यावृति में लगे हुए हैं. उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में 21 हजार बच्चों को मानव तस्करी और वेश्यावृत्ति से बचाने का काम किया है. यह बातें पद्मश्री सुनीता कृष्णन ने शुक्रवार को राजेंद्र भवन, धुर्वा में राज्य स्तरीय द ट्रैफिकिंग ऑफ पर्सन विधेयक 2018 पर आयोजित कार्यशाला में कही.उन्होंने यूनाइटेड नेशन की रिपोर्ट के हवाले से कहा कि 2016 में 1.50 लाख बच्चे गुमशुदा थे.
इनमें से 55 हजार बच्चों को ही मुक्त कराया गया. उन्होंने द ट्रैफिकिंग ऑफ पर्सन बिल में किये गये संशोधन का स्वागत करते हुए कहा कि विधेयक में बदलाव से मानव तस्करी की संख्या में कमी होगी. वर्तमान में मानव तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए इस कानून को लागू होना बहुत जरूरी है.
मानव तस्करी को रोकने के लिए आवाज उठानी होगी : झारखंड राज्य बाल संरक्षण के निदेशक डीके सक्सेना ने कहा कि मानव तस्करी क्या है, इसके बारे में सब जानते हैं मगर इसकी रोकथाम कैसे हो, इस बार में सोचना चाहिए. द ट्रैफिकिंग ऑफ पर्सन विधेयक तो आ गया है, मगर इसके तकनीकी पहलुओं के बारे में भी जानना होगा. उन्होंने मानव तस्करी एवं बाल विवाह पर अंकुश लगाने की बात कही. महिला आयोग की अध्यक्ष कल्याणी शरण ने कहा कि आदिवासी समुदाय के व्यक्ति सरल स्वभाव के होते हैं. उन्हें मानव तस्करी के बारे में नहीं पता होता है, जो उनके लिए बहुत बड़ी समस्या है. इस पर पंचायत प्रतिनिधि कार्य करें आयोग पूरा सहयोग करेगा.
आइजी क्राइम ब्रांच रंजीत प्रसाद ने कहा कि मानव तस्करी को लेकर सरकार के पास भी सही आंकड़ा नहीं है. पिछले साल अभिभावकों के द्वारा 122 बच्चों की गुमशुदगी का सनहा दर्ज कराया गया. जिसमें मात्र 50 प्रतिशत बच्चों को ही बरामद किया जा सका. एेसे में मानव तस्करी को जड़ से समाप्त करने के लिए यह कानून मील का पत्थर साबित होगा.
समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष उषा पांडेय ने कहा कि इस बिल को पास कराने में सभी को अपनी आवाज बुलंद करनी होगी. झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग कि अध्यक्ष आरती कुजूर ने कहा कि इस कानून के बारे में जानकारी होना सभी के लिए जरूरी है. मानव तस्करी के खिलाफ आवाज उठानी होगी. बाल विवाह भी एक गंभीर समस्या है. इस पर सभी को जागरूक करना जरूरी है. कार्यक्रम में रवींद्र गुप्ता, संजय कुमार मिश्र, रंजन कांति पांडा, अनूप होरे सहित अन्य उपस्थित थे.
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