रांची : गांधी जयंती पर 127 कैदी किये गये रिहा, ये भी होंगे रिहा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Oct 2018 8:56 AM

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रांची : गांधी जयंती के मौके पर कुल 127 कैदियों को प्रदेश के विभिन्न जेलों से मंगलवार को रिहा किया गया. इनमें रांची के बिरसा केंद्रीय कारा, होटवार से 36 कैदी रिहा हुए. दो कैदी गारदी गुंजा व नापो चंपिया को दंड शुल्क जमा नहीं करने के कारण रिहा नहीं किया गया. दंड शुल्क जमा […]

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रांची : गांधी जयंती के मौके पर कुल 127 कैदियों को प्रदेश के विभिन्न जेलों से मंगलवार को रिहा किया गया. इनमें रांची के बिरसा केंद्रीय कारा, होटवार से 36 कैदी रिहा हुए. दो कैदी गारदी गुंजा व नापो चंपिया को दंड शुल्क जमा नहीं करने के कारण रिहा नहीं किया गया. दंड शुल्क जमा करने के बाद इनको रिहा कर दिया जायेगा.
रिहाई के समय 36 कैदियों को गांधी टोपी व माला पहनाकर सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने की शपथ दिलायी गयी. साथ ही सभी को महात्मा गांधी आैर झारखंड के स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़ी पुस्तकें भी भेंट की गयी. इस मौके पर रिहा हो रहे कैदियों से बात की गयी, तो अधिकांश ने बताया कि जेल में सश्रम कारावास की सजा के दौरान मजदूरी के तौर पर मिली राशि ने उन्हें लखपति बना दिया. किसी ने डेढ़ लाख, किसी ने 1.75 लाख, किसी ने 1.97 लाख रुपये तक कमाये. 14 से 18 साल तक की सजा के बाद अपनों से मिलने की खुशी सभी के चेहरे पर साफ झलक रही थी. रिहा हुए लोगों को लेने उनके परिजन भी जेल पहुंचे थे.मौके पर जेल आइजी विनय भूषण, जेल एआइजी दीपक विद्यार्थी, तुषार गुप्ता, कारा अधीक्षक अशोक चौधरी व जेलर सीएस सुमन आदि मौजूद थे.
बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार में जेल अदालत लगाया गया. इसमें हाइकोर्ट के निर्देश पर रांची के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के मार्गदर्शन पर आयोजित अदालत में 18 बंदियों के वादों पर सुनवाई हुई.
इनमें से नौ वादों का निपटारा किया गया. पांच बंदियों को रिहा करने का निर्णय लिया गया. जबकि चार बंदियों के वाद लंबित रहने, दंड शुल्क आदि जमा नहीं करने का कारण उन्हें मुक्त नहीं किया जा सका. बिरसा केंद्रीय कारा, होटवार से 15 कैदियों को पांच अक्टूबर को रिहा किया जायेगा. इन कैदियों को सुप्रीम कोर्ट के गाइड लाइन के आधार पर रिहा किया जायेगा. जेल आइजी विनय भूषण ने मंगलवार को यह जानकारी दी.
किस जेलसे कुल कितने
कैदी हुए रिहा
जेल रिहा कैदी
बिरसा केंद्रीय कारा, रांची 38
जेपी कारा, हजारीबाग 18
केंद्रीय कारा, दुमका 32
केंद्रीय कारा,जमशेदपुर 24
केंद्रीय कारा,पलामू 14
मंडल कारा, गढ़वा 01
मंडल कारा, गिरिडीह 01
उपकारा, रामगढ़ 01
बिरसा केंद्रीय कारा, रांची से 36 हुए रिहा
सुकरा उरांव (70), मांडर, रांची
जगरनाथ सिंह मुंडा(70), बुंडू, रांची
चोनो सिंह मुंडा (70), बुंडू, रांची
राजेंद्र लाल (61), डाल्टनगंज, पलामू
रामबृक्ष सिंह (60), रंका, गढ़वा
सुखलाल सिरका (58), पश्चिम सिंहभूम
बासु साहु (56), कर्रा, खूंटी
डोमना साहु, कर्रा, खूंटी
लोधा महली (55), घाघरा, सिमडेगा
मनोहर महली (54), लेसलीगंज, पलामू
दासू महतो (54), सिल्ली, रांची
जोहन मिंज (53), बेड़ो, रांची
किशुन सिंह मुंडा (51), बुंडू, रांची
बलमा उरांव (50), मांडर, रांची
अनिरुद्ध साहु (49), कर्रा, खूंटी
जेठा मुंडा (48), कर्रा, खूंटी
चारलेश उरांव (47), मांडर, रांची
बुधन मुंडा (46), सुखदेव नगर, रांची
हीरा सिंह (42), तमाड़, रांची
मदन सिंह मुंडा (42), मुरहू, खूंटी
दशरू उरांव (42), कालामाटी, खूंटी
अनूप कुमार शाह (42), भंडरा, लोहरदगा
गनशु उरांव (41), डुमरडीह, गुमला
पवन मुंडा (41), बुंडू, रांची
अलफोस सोरेन, (55), जलडेगा, सिमडेगा
लखन लोहार (40), सरायकेला-खरसांवा
अशोक पासवान (40), छतरपुर, पलामू
भीमसेंट उरांव (40), घाघरा, सिमडेगा
देवनीश धान (38), गुवा, प. सिंहभूम
भूषण खंडित (38), तमाड़, रांची
राम लोहार (36), कुचाई, सरायकेला
आदित्य कुमार साहु (35), तमाड़, रांची
क्रांति खंडित (34), तमाड़, रांची
आनंद मंडल (46), मधुपुर, देवघर
सामचंद सिहं मुंडा (46), पुरुलिया, बंगाल
चौधरी महतो (46), सरायकेला-खरसांवा
ये भी होंगे रिहा
गारदी गुंजा (40), कुचाई, सरायकेला
नापो चंपिया (54), गोइलकेरा, प. सिंहभूम
राज्य पुनरीक्षण परिषद में लिए गये निर्णय के आलोक में 38 कैदियों को रिहा करने का निर्णय बिरसा केंद्रीय कारा से हुआ है. कैदियों ने कहा कि आवेश में गलती हो गयी थी. समाज के लोग अपनायेंगे, तो जरूर सभी नेक रास्ते पर चलेंगे.
विनय भूषण, आइजी, जेल, झारखंड
हुनर से तय करेंगे आगे का सफर
रिहा हुए कैदी क्रांति खंडित और दासू मुंडा ने बताया कि जेल में सजा काटने के दौरान उन लोगों ने मुख्यधारा में लौटने के लिए खुद को हुनरमंद बनाने का निर्णय लिया. इसके लिए उनके अलावा और कैदियों ने जेल में रहते हुए बीए की परीक्षा पास की. कंप्यूटर का बेसिक नॉलेज हासिल किया.
किसी ने दोस्त को, तो किसी ने पत्नी को मारा
देवाशीष धान ने बताया कि शराब पीने के दौरान हुए विवाद में उसने दोस्त पप्पू चौधरी की हत्या कर दी थी. हत्या के कारण वह 2003 से जेल में बंद था. सुकरा उरांव ने बताया कि आवेश में आकर पत्नी की हत्या कर दी थी. 1994 से जेल में सजा काट रहा था. जीवन में वह अब कभी कोई गलती नहीं करूंगा.
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