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रांची : प्रज्ञा प्रवाह का 4 दिवसीय लोकमंथन शुरू, उपराष्ट्रपति नायडू ने कहा धर्मनिरपेक्षता हर भारतीय के डीएनए और खून में है

Updated at : 28 Sep 2018 7:06 AM (IST)
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रांची : प्रज्ञा प्रवाह का 4 दिवसीय लोकमंथन शुरू, उपराष्ट्रपति नायडू ने कहा धर्मनिरपेक्षता हर भारतीय के डीएनए और खून में है

रांची : उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा है कि भारत नैतिक मूल्य, परंपरा और संस्कार वाला देश रहा है़ भारतीय समाज सबके प्रति सहनशील है़ भारत में धर्मनिरपेक्षता केवल इसलिए सुरक्षित नहीं है कि यह संविधान में वर्णित है़ हर भारतीय के डीएनए, उसके खून में धर्मनिरपेक्षता है़ इसलिए धर्मनिरपेक्षता देश में सुरक्षित है़ उपराष्ट्रपति […]

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रांची : उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा है कि भारत नैतिक मूल्य, परंपरा और संस्कार वाला देश रहा है़ भारतीय समाज सबके प्रति सहनशील है़ भारत में धर्मनिरपेक्षता केवल इसलिए सुरक्षित नहीं है कि यह संविधान में वर्णित है़ हर भारतीय के डीएनए, उसके खून में धर्मनिरपेक्षता है़ इसलिए धर्मनिरपेक्षता देश में सुरक्षित है़ उपराष्ट्रपति गुरुवार को राजधानी के खेल गांव में प्रज्ञा प्रवाह द्वारा आयोजित चार दिवसीय लोकमंथन के उदघाटन के मौके पर बोल रहे थे़ लोकमंथन के तहत भारत बोध पर परिचर्चा के लिए देश भर से प्रबुद्ध, चिंतक, विचारक पहुंचे है़ं
मौके पर राज्यपाल द्रौपदी मुरमू, मुख्यमंत्री रघुवर दास, खेलकूद व कला-संस्कृति मंत्री अमर कुमार बाउरी, मेयर आशा लकड़ा, सेंट्रल यूनिर्वसिटी के कुलपति नंद कुमार इंदू और प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे नंदकुमार मौजूद थे़
उपराष्ट्रपति ने कहा कि हम सभी धर्मों और सबकी भावना का आदर करने वाली परंपरा से आते है़ं शेयर और केयर भारतीय दर्शन का हिस्सा रहा है़ भारतीय संस्कृति हिंदू जीवन पद्धति है़ आज राजनीतिक कारणों से सबसे ज्यादा इनटालरेंट लोग टालरेंस की बात कर रहे है़ं
औपनिवेशिक माइंड सेट से बाहर निकलने की जरूरत है़
नायडू ने कहा कि संवाद, विमर्श, तर्क, युक्ति, मंथन हमारी पुरानी परंपरा रही है़ गूढ़ चिंतन, प्रबुद्ध चिंतन संस्कृति रही है़ कृष्ण-अर्जुन संवाद ने हमें गीता दिया़ डिस्कस, डिबेट और डिसाइड की परंपरा होनी चाहिए़ पंचायत से सदन तक संवाद जरूरी है़
जनादेश काे स्वीकार करना चाहिए, यही लोकतंत्र है
उपराष्ट्रपति ने कहा : जनादेश को स्वीकार करने के लिए तैयार रहना चाहिए,यही लोकतंत्र है़ कहा कि अंग्रेजी जानना चाहिए, लेकिन अंग्रेजी मानसिकता बीमारी है़ वर्षों की गुलामी ने औपनिवेशिक मानसिकता को जन्म दिया है़ अपनी नैसर्गिक इतिहास बोध को भूल गये़ देश को अपना इतिहास बोध पैदा करना होगा़ आदिकाल की भारतीयता को कायम करते हुए नयी पीढ़ी सांस्कृतिक उत्थान की ओर बढ़े़ आजादी के बाद हमने ऐसी शिक्षा प्रणाली अपनायी, जिससे हम परंपराओं से दूर होते गये़
मां, मातृभाषा, अपना गांव, मातृदेश और गुरु के प्रति सम्मान होना चाहिए
उपराष्ट्रपति ने कहा : मां, मातृभाषा, अपना गांव, मातृदेश और गुरु के प्रति आदर-सम्मान भाव होना चाहिए़ अपनी मातृभाषा में बात करे़ं जिस गांव, इलाके में पैदा हुए, उसे याद रखे़ं अंग्रेजी से बाहर निकले़ं मातृभाषा आपकी आंख हैं, दूसरी भाषा चश्मा़ भाषा और भावना एक साथ चलती है़
मातृदेश एक शरीर की तरह है़ पैर के नाखून में दर्द हो, तो मस्तिष्क महसूस करता है़ अटक से कटक, कश्मीर से कन्याकुमारी भारत एक है, इसी बोध के साथ रहना चाहिए़ नायडू ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता का आंदोलन केवल राजनीति स्वतंत्रता के लिए नहीं था, बल्कि सांस्कृतिक आंदोलन भी था़ हमारे धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन संस्कृति एक है़ संस्कृति जीवन पद्धति है़ हमारी संस्कृति सर्वस्पर्शी, एकता और सामाजिक आदर की रही है़ भारत विश्व गुरु रहा है़ इसने कभी किसी दूसरे देश पर हमला नहीं किया़ सभी को संरक्षित करने का काम किया है़ उपराष्ट्रपति ने कहा : मुझे उम्मीद है कि लोकमंथन में सार्थक विषयों पर संवाद होगा और यह समाज के विभिन्न स्तर तक जायेगा़ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी अपनी बातें रखी़ं इसमें भारत दर्शन चित्रावली और भारत बोध-जन, गण, मन -2018 दो पुस्तकों का विमोचन भी हुआ़
देश भर से जुटे प्रबुद्ध,चिंतक और कलाकार
दुनिया में छटा बिखेरेगी झारखंड की संस्कृति : सीएम
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि झारखंड का सौभाग्य है कि लोकमंथन कार्यक्रम में देश भर के साहित्यकारों, विचारकों का जुटान हुआ है.
झारखंड की संस्कृति की रक्षा को लेकर भगवान बिरसा मुंडा समेत कई महापुरुषों ने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी. झारखंड की संस्कृति देश-दुनिया में छटा बिखेरेगी. भारत एक ऐसा देश है, जहां हम सभी को परिवार को रूप में मानते हैं. यही वजह है कि हमारा देश आगे बढ़ रहा है. स्वामी विवेकानंद ने भारत को विश्व गुरु बनाने का सपना देखा था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी सोच को लेकर आगे बढ़ रहे हैं.
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