आयुष्मान भारत : संपूर्ण आबादी को नि:शुल्क गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Sep 2018 8:21 AM

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रामचंद्र चंद्रवंशी योजना से उस आबादी को जोड़ा जा रहा है, जिन तक प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पहुंच पाती थीं आयुष्मान भारत योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना है. 15 मार्च 2017 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति संसद से पारित हुई थी. इसमें देश की संपूर्ण आबादी को गुणवत्तापूर्ण नि:शुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं देने की व्यवस्था […]

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रामचंद्र चंद्रवंशी
योजना से उस आबादी को जोड़ा जा रहा है, जिन तक प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पहुंच पाती थीं
आयुष्मान भारत योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना है. 15 मार्च 2017 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति संसद से पारित हुई थी. इसमें देश की संपूर्ण आबादी को गुणवत्तापूर्ण नि:शुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं देने की व्यवस्था है.
फिर 1 फरवरी 2018 को 2018-19 के बजट में आयुष्मान भारत योजना की घोषणा की गयी. यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना है. इसमें देश के 10 करोड़ गरीब परिवारों को शामिल किया जा रहा है. व्यक्ति के हिसाब से इसमें 50-55 करोड़ देशवासी शामिल होंगे, जो देश की आबादी का करीब 40 फीसदी है. यह योजना 23 सितंबर 2018 को झारखंड से लागू होगी.
राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति-2017 एवं आयुष्मान भारत योजना के उद्देश्यों का जो भी गहराई से अध्ययन करेगा, उनके प्रभावों को समझेगा, वह प्रधानमंत्री की उस बात से शत-प्रतिशत सहमत होगा कि यह योजना मील का पत्थर साबित होगी. नयी राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 15 वर्षों बाद लायी गयी है. आयुष्मान भारत योजना से उस आबादी को जोड़ा जा रहा है, जिन तक प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से नहीं पहुंच पाती थीं. राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति-2017 का दृष्टिकोण व्यापक है. यह नीति रुग्णता देखभाल की बजाय आरोग्यता केंद्रित है.
इसमें मातृत्व और शिशु मृत्यु दर को रोकने, असंवहनीय और संक्रामक बीमारियों से निपटने, एचआइवी/एड्स, कुष्ठ रोग, कालाजार, लिम्फेटिक फाइलेरियासिस, क्षय रोग, दृष्टिहीनता, हृदयवाहिका रोग, कैंसर, मधुमेह एवं सांस के पुराने रोग जैसी कई बीमारियों का लक्ष्य तय किया गया है. इस नीति में स्वास्थ्य केंद्रों को आवश्यकता के अनुरूप सुविधायुक्त बनाने का भी प्रावधान है.
आयुष्मान भारत योजना का मुख्य उद्देश्य : आयुष्मान भारत योजना का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहे तकनीकी विकास की मुख्य धारा से गरीबों को सीधे जोड़ना है. क्योंकि देश की एक बड़ी आबादी के लिए अद्यतन स्वास्थ्य सुविधाएं वहनीय नहीं हैं. इससे आम लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उच्चतम संभव स्तर पर सुनिश्चित हो सकेंगी. साथ ही, किसी व्यक्ति को वित्तीय कठिनाइयों का भी सामना नहीं करना पड़ेगा.
रिसर्च एजेंसी अन्सर्ट एंड यंग ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि देश में 80 फीसदी शहरी और करीब 90 फीसदी ग्रामीण नागरिक सालाना घरेलू खर्च का आधे से अधिक हिस्सा स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च कर देते हैं. इस वजह से हर साल चार फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे आ जाती है. इस स्थिति को बदलने के लिए केंद्र सरकार यह स्वास्थ्य बीमा योजना लागू कर रही है. इससे एक ओर जहां देशवासी निरोग होंगे, वहीं बीमारियों के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर कुप्रभाव भी नहीं पड़ेगा.
झारखंड को वरदान : आयुष्मान भारत योजना से झारखंड को विशेष लाभ होने वाला है. यहां के 68 लाख में से 57 लाख परिवार इस योजना से लाभान्वित होंगे. यह राज्य की कुल आबादी का 80 फीसदी से अधिक है. दरअसल, रघुवर दास सरकार ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की थी. उसके तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करनेवाले परिवारों को सालाना दो लाख रुपये तक के नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था की गयी थी.
जब प्रधानमंत्री ने राशि की सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रु. प्रति परिवार प्रति वर्ष कर दिया तो राज्य सरकार ने अपने सभी लाभुकों को उस योजना से जोड़ दिया. इस तरह आयुष्मान भारत योजना से झारखंड को वरदान मिल गया. यह राज्य अब स्वस्थ राज्य बनने की राह पर चल पड़ा है. एक ओर राज्य में 15 नवंबर 2017 से 108 इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा प्रारंभ कर दी गयी है, जिससे मरीजों को चौबीसों घंटे अस्पताल पहुंचाया जा रहा है.
एक विशेष कार्य योजना के तहत राज्य में 2017 में 12 हेल्थ वेलनेस सेंटर की स्थापना की गयी है. मार्च-2019 तक राज्य में 776 हेल्थ वेलनेस सेंटर कार्य करने लगेंगे. इधर, राज्य में 9 सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल कार्य करने लगेंगे. पूर्व से तीन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रांची, जमशेदपुर एवं धनबाद में हैं. वर्तमान में पलामू, हजारीबाग एवं दुमका में तीन नये मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों का निर्माण चल रहा है.
अगले शैक्षणिक सत्र से तीनों में पढ़ाई शुरू हो जायेगी. केंद्र सरकार की पहल पर देवघर में एम्स के भवन का निर्माण प्रगति पर है. कोडरमा एवं चाईबासा में मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों का शिलान्यास प्रधानमंत्री 23 सितंबर को करेंगे. कांके में कैंसर अस्पताल की शुरुआत हो रही है. सरकार ने राज्य में कई निजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल खोलने की अनुमति दी है.
सदर अस्पतालों को सुविधायुक्त बनाया जा रहा है : मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों की गुणवत्ता को बनाये रखने के लिए सदर अस्पतालों को सुविधायुक्त बनाया जा रहा है, ताकि मेडिकल कॉलेजों के अस्पतालों का बोझ कम हो सके. रांची जिला सदर अस्पताल इसका उदाहरण है, जहां कई निजी अस्पतालों से भी ज्यादा गुणवत्तापूर्ण इलाज की सुविधाएं मौजूद हैं. मैंने स्वास्थ्य विभाग के मंत्री का प्रभार लेते ही यहां के चिकित्सकों की वेतन विसंगतियों को दूर किया. वर्षों से लंबित प्रोन्नति की समस्या को हल किया.
फिर चिकित्सकों के रिक्त पदों को भरने की दिशा में 145 नियमित विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं 272 नियमित सामान्य चिकित्सकों की नियुक्ति करायी. साथ ही चिकित्सकों के 538 पदों का सृजन कराया. एनएचएम के तहत 180 विशेषज्ञ चिकित्सों को नियुक्ति पत्र दिये गये. 155 दंत चिकित्सों की बहाली के लिए जेपीएससी को अधियाचना भेजी जा चुकी है.
सदर अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए चिकित्सकों की बहाली की प्रक्रिया जेपीएएसी में चल रही है. सभी 9 मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई शुरू होने के बाद यहां चिकित्सकों की कमी दूर हो जायेगी. झारखंड अन्य राज्यों को भी चिकित्सक मुहैया कराने वाला राज्य बनेगा. हर मेडिकल कॉलेज में एएनएम/जीएनएम की भी पढ़ाई होगी, जिससे उनकी भी कमी दूर होगी.
(लेखक झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री हैं)
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