झारखंड गठन के बाद से फरार अपराधियों को करें गिरफ्तार : हाइकोर्ट

Updated at : 14 Sep 2018 5:44 AM (IST)
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झारखंड गठन के बाद से फरार अपराधियों को करें गिरफ्तार :  हाइकोर्ट

हाइकोर्ट की टिप्पणी के बाद डीजीपी ने दिया राज्य के सभी जिलों में अभियान चलाने का निर्देश रांची : हाइकोर्ट की टिप्पणी के बाद डीजीपी डीके पांडेय ने झारखंड राज्य गठन के बाद जिन केस में आरोपियों को फरार दिखा कर न्यायालय में चार्जशीट किया गया है, उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश जारी किया है. […]

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हाइकोर्ट की टिप्पणी के बाद डीजीपी ने दिया राज्य के सभी जिलों में अभियान चलाने का निर्देश
रांची : हाइकोर्ट की टिप्पणी के बाद डीजीपी डीके पांडेय ने झारखंड राज्य गठन के बाद जिन केस में आरोपियों को फरार दिखा कर न्यायालय में चार्जशीट किया गया है, उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश जारी किया है. सभी जिलों के एसएसपी/एसपी को इसके लिए अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है. इसके लिए 60 दिनों की समय सीमा निर्धारित की गयी है.
डीजीपी ने जारी आदेश में लिखा है कि ऐसे मामले भी सामने आये हैं, जिसमें केस में निर्गत स्थायी वारंट का रिकॉर्ड थाना में सुरक्षित नहीं रखा जाता है, जिसके चलते वर्षों तक फरार अभियुक्त की गिरफ्तारी के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गयी. इस कारण हाइकोर्ट ने प्रतिकूल टिप्पणी की है.
उल्लेखनीय है कि 11 सितंबर को झारखंड हाइकोर्ट में जस्टिस कैलाश प्रसाद देव की अदालत में बेतला नेशनल पार्क में वन कर्मियों पर गोली चलाने से संबंधित सजायाफ्ता की ओर से दायर क्रिमिनल अपील याचिका पर सुनवाई हुई थी. इस केस में 15 वर्षों के बाद भी एक आरोपी दशरथ सिंह की गिरफ्तारी नहीं होने से अदालत ने नाराजगी जतायी थी और डीजीपी, जोनल आइजी, डीआइजी, लातेहार एसपी और थानेदार को सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया था.
डीजीपी ने इन बिंदुओं पर दिया है निर्देश
60 दिनों के बाद सभी एसएसपी/एसपी यह प्रमाण पत्र देंगे कि केस में फरार अभियुक्त (जिन्हें 15 नवंबर 2000 के बाद फरार दिखाते हुए आरोप पत्र समर्पित किया गया है और जो अभी तक गिरफ्तार नहीं किये गये या न्यायालय में सरेंडर नहीं किये हैं) का वारंट थाना में उपलब्ध है तथा उनकी गिरफ्तारी के कारगर प्रयास के बावजूद वे फरार हैं.
थाना में स्थायी/ गैर जमानतीय वारंट को सुरक्षित रखने के थाना प्रभारी अपने तबादले के बाद वारंट से संबंधित संचिका का प्रभार दूसरे थाना प्रभारी को देंगे. स्टेशन डायरी में इसकी इंट्री होगी.
सभी इंस्पेक्टर, डीएसपी और एसपी निरीक्षण के दौरान यह जांच करेंगे कि थाना की स्टेशन डायरी में फरार लोगों की इंट्री है या नहीं. ऐसा नहीं करनेवालों पर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे.
सभी रेंज डीआइजी आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करायेंगे. वहीं दूसरी ओर एडीजी सीआइडी कार्रवाई की समीक्षा प्रत्येक 15 दिनों पर करेंगे.
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