रांची : कैचमेंट एरिया में हुआ निर्माण नहीं बढ़ रहा डैमों का जलस्तर, ऐसे में नहीं बचेंगे हमारे डैम-जलाशय

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Aug 2018 8:52 AM

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दीपक रांची : राजधानी में दो दिन से झमाझम बारिश हो रही है़ शनिवार को शहर में 100 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हुई. सावन का महीना बीत गया, पर अब तक राजधानी रांची के तीनों जलाशय (डैम) नहीं भरे हैं. रुक्का, हटिया और गोंदा डैम में 2017 की तुलना में अब भी 11 से 12 […]

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दीपक
रांची : राजधानी में दो दिन से झमाझम बारिश हो रही है़ शनिवार को शहर में 100 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हुई. सावन का महीना बीत गया, पर अब तक राजधानी रांची के तीनों जलाशय (डैम) नहीं भरे हैं. रुक्का, हटिया और गोंदा डैम में 2017 की तुलना में अब भी 11 से 12 फीट कम पानी है, यह खतरे का संकेत है.
तीनों जलाशयों में बारिश का पानी नहीं भरने का मुख्य कारण डैम के कैचमेंट एरिया में हो रहा निर्माण है. इस वजह से बारिश का पूरा पानी डैम में नहीं पहुंच पा रहा है. विशेषज्ञ मानते हैं, यदि कैचमेंट एरिया में निर्माण नहीं रुका, ताे आनेवाले कुछ वर्षाें में डैमाें का अस्तित्व ही संकट में आ जायेगा.
इधर पेयजल विभाग अब भी बारिश की उम्मीद लगाये बैठा है़ अगले एक माह में भी जलाशयों का स्तर ठीक-ठाक नहीं बढ़ा, तो दिसंबर के बाद से राजधानी की 10 लाख से अधिक आबादी को पीने के पानी के लिए मशक्कत करनी पड़ेगी. हालांकि इस साल अब तक बारिश भी कम हुई है. एक जून से 25 अगस्त, 2018 तक रांची में 555.9 मिमी बारिश दर्ज की गयी है. हालांकि यह सामान्य बारिश से 34 प्रतिशत कम है. इस दौरान रांची में औसतन 873.7 मिमी बारिश होती है.
60-70 के दशक में बने जलाशयों पर ही निर्भरता : राजधानी के लोग पेयजल के लिए अब भी 60-70 के दशक में बने जलाशयों पर ही निर्भर हैं. उस समय दो लाख की आबादी के लिए ये जलाशय बनाये गये थे. आज राजधानी के शहरी क्षेत्र की आबादी 10 लाख से अधिक हो गयी है. राजधानी के रुक्का, हटिया और गोंदा डैम के कैचमेंट एरिया में लगातार हो रहे निर्माण के कारण बारिश का पानी डैम तक नहीं पहुंच पा रहा है.
अलग राज्य बनने के बाद से हटिया डैम से दो बार पानी की राशनिंग की जा चुकी है. 2010 में हटिया डैम का जल स्तर पांच फीट तक पहुंच गया था. तब सरकार ने कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण हटाने व डैम की गंदगी साफ करने समेत सौंदर्यीकरण और सघन पौधरोपण करने की योजना बनायी थी. तत्कालीन विकास आयुक्त ने सभी जलाशयों के ग्रीन एरिया में होनेवाले निर्माण पर रोक लगाने का आदेश भी दिया था़ पर इस दिशा में सख्ती से कार्रवाई नहीं हुई.
कैचमेंट एरिया में सबसे अधिक निर्माण : 48 वर्ग किलोमीटर में फैले हटिया डैम के कैचमेंट एरिया में सबसे अधिक निर्माण कार्य हुआ है. डैम के एक हिस्से में बालालौंग से लेकर बालसिरिंग तक रिंग रोड के बनने से बारिश का पानी डैम तक नहीं पहुंच पाता है.
इतना ही नहीं, डैम से सटे नया सराय, तिरिल और आसपास में कई सरकारी इमारतें बनी हैं, इससे भी डैम में पानी नहीं पहुंच पा रहा है. डैम में पानी आने का दो ही मुख्य स्रोत पुलिया के रूप में बचा है. एक लाली गांव के पास कलवर्ट और दूसरा बालालौंग के पास छोटे डैम से होकर आनेवाला पुल. बालालौंग के एक बड़े इलाके में लोगों ने मकान बना लिये हैं. डैम के कैचमेंट एरिया से दो वर्ष पहले कुछ मिट्टी निकाली जरूर गयी थी. पर बड़ा हिस्सा अब भी छूटा हुआ है.
गोंदा डैम के चारों तरफ कंक्रीट के जंगल का विस्तार
कमोबेश यही स्थिति गोंदा डैम की भी है. डैम के चारों तरफ कंक्रीट के मकान बन गये हैं. चाहे वह रातू रोड की बैंक कॉलोनी हो अथवा सीएमपीडीआइ के निकट बने पुलिस लाइन, सरोवर नगर, कैंब्रियन स्कूल के आसपास का क्षेत्र व लेक व्यू कॉलोनी.
हालांकि उक्त डैम से भी तीन-चार साल पहले 25 लाख की लागत से मिट्टी निकाली गयी थी, पर इसका लाभ अधिक नहीं मिला. डैम के एक हिस्से में पूरी तरह कंक्रीट रोड और लोगों के लिए पाथ-वे बनाया गया है. डैम में रातू रोड के झिरी से पहुंचनेवाले पानी के एक स्रोत पर भी लोगों ने कब्जा कर मकान बना लिया है. इस कारण बारिश का पानी डैम तक नहीं पहुंच पाता है.
रांची के तीनों डैम में पानी का स्तर
जलाशय वर्तमान जल स्तर 2017 की तुलना में स्थिति
हटिया डैम 26.7 फीट पिछले वर्ष से 12.0 फीट कम
गोंदा डैम 18.0 फीट पिछले वर्ष से 06.0 फीट कम
रुक्का डैम 24.6 फीट पिछले वर्ष से 11.5 फीट कम
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