को-ऑपरेटिव बैंक घोटाला : तीन को-ऑपरेटिव अफसरों की बर्खास्तगी की सिफारिश

Updated at : 27 Aug 2018 8:45 AM (IST)
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को-ऑपरेटिव बैंक घोटाला : तीन को-ऑपरेटिव अफसरों की बर्खास्तगी की सिफारिश

रांची : को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले की जांच के लिए गठित समिति ने चाईबासा स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के अधीन कार्यरत बैंक के तीन अधिकारियों को बर्खास्त करने की अनुशंसा की है. इन अधिकारियों को रिटायरमेंट के बाद नियुक्त किया गया है. साथ ही बैंक के महत्वपूर्ण काम सौंपे गये हैं. जिन अधिकारियों को बर्खास्त करने की […]

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रांची : को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले की जांच के लिए गठित समिति ने चाईबासा स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के अधीन कार्यरत बैंक के तीन अधिकारियों को बर्खास्त करने की अनुशंसा की है. इन अधिकारियों को रिटायरमेंट के बाद नियुक्त किया गया है. साथ ही बैंक के महत्वपूर्ण काम सौंपे गये हैं. जिन अधिकारियों को बर्खास्त करने की अनुशंसा सरकार से की गयी है, उसमें उमेश चंद्र सिंह, विनय कुमार नारायण व कुंज बिहारी का नाम शामिल है.
कुंज बिहारी तो रिटायरमेंट के बाद पिछले 10 साल से बैंक में काम कर रहे हैं, जबकि उमेश सिंह को पांच दिनों के अंदर रिटायरमेंट के बाद एक साल के लिए काम पर रखने का आदेश जारी कर दिया गया. समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि चाईबासा स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के दस्तावेज की जांच से इस बात की जानकारी मिलती है कि विनय कुमार जनवरी 2011 मेें रिटायर हुए हैं. वहीं कुंज बिहारी 2008 में रिटायर हुए हैं. पर इन दोनों को ही रिटायरमेंट के बाद रख लिया गया है, जो नियम सम्मत नहीं है.
झारखंड राज्य सहकारी बैंक सर्विस रूल का उल्लंघन : झारखंड राज्य सहकारी बैंक सर्विस रूल 2015 में सेवा विस्तार का लाभ देने या रिटायरमेंट के बाद मानदेय पर नियुक्त करने का प्रावधान नहीं है. कुंज बिहारी रिटायरमेंट के बाद भी 10 साल से काम कर रहे हैं. विनय कुमार लोन एप्रेजल कमेेटी का काम कर रहे हैं.
इनके द्वारा अनुमोदित लोन के मामलों की जांच में गड़बड़ी पायी गयी है. जादूगोड़ा बैंक के शाखा प्रबंधक उमेश चंद्र सिंह के मामले की जांच के दौरान पाया गया कि वह दिसंबर 2017 में रिटायर होनेवाले थे. उन्होंने नौ जून 2017 को तत्कालीन प्रशासक को तीन साल की अवधि विस्तार के लिए आवेदन दिया.
वित्त विभाग के नये संकल्प से भ्रम की स्थिति : प्रशासक ने सिर्फ पांच दिनों में ही 13 जून 2017 को एक साल के लिए सेवा विस्तार देने का आदेश जारी कर दिया जो नियम सम्मत नहीं है.
इसके बाद उनका मानदेय निर्धारित करने में वित्त विभाग 26 नवंबर 2011 को जारी संकल्प को आधार बनाया गया. जबकि संविदा पर नियुक्ति के मामले में वित्त विभाग ने जनवरी 2016 में नया संकल्प जारी किया. इससे भ्रम की स्थिति बन गयी है कि इस अधिकारी को सेवा विस्तार दिया गया है या संविदा पर नियुक्त किया गया है.
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