रांची : समय सीमा खत्म, पर नहीं बने रेल ओवरब्रिज

Updated at : 21 Aug 2018 9:11 AM (IST)
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रांची : समय सीमा खत्म, पर नहीं बने रेल ओवरब्रिज

रांची : रांची-मुरी रेल मार्ग पर तीन रेल ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण अब तक पूरा नहीं हुआ है. इनमें से पहला आरओबी टाटीसिलवे थाना क्षेत्र के आरागेट, दूसरा टाटीसिलवे पश्चिम केबिन और तीसरा आरओबी सिल्ली-पतराहातू मार्ग के रेलवे क्रॉसिंग पर बन रहा है. रेलवे अधिकारियों ने इन तीनों ब्रिज के जून 2018 तक बन जाने […]

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रांची : रांची-मुरी रेल मार्ग पर तीन रेल ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण अब तक पूरा नहीं हुआ है. इनमें से पहला आरओबी टाटीसिलवे थाना क्षेत्र के आरागेट, दूसरा टाटीसिलवे पश्चिम केबिन और तीसरा आरओबी सिल्ली-पतराहातू मार्ग के रेलवे क्रॉसिंग पर बन रहा है. रेलवे अधिकारियों ने इन तीनों ब्रिज के जून 2018 तक बन जाने की बात कही थी, पर इसे पूरा होने में छह से आठ माह और लगने की संभावना है.
सभी आरअोबी का काम दो-तीन माह पहले तक ठीकठाक चल रहा था. बाद में इसके निर्माण कार्य में सुस्ती आ गयी. अभी आरागेट खास कर टाटीसिलवे में रेलगाड़ियों के गुजरते के वक्त रोजाना जाम लगता है.
सिर्फ रांची से खुलने वाली यात्री ट्रेनों की संख्या 30 से अधिक हो जाने तथा रांची-मुरी सेक्शन में मालगाड़ियों के लगातार आवागमन से रेलवे गेट बार-बार बंद करना पड़ता है. ट्रैफिक लोड अधिक होने से रेलवे गेट के अलावा दूसरी जगह भी बार-बार होने वाले जाम से लोगों को काफी परेशानी होती है.
सड़क चौड़ीकरण लंबित व रिंग रोड भी अधूरा : रांची-पुरुलिया रोड का चौड़ीकरण राज्य की सीमा (मुरी) तक किया जाना है. यह सड़क फोर लेन बननी है.
चौड़ीकरण के लिए कटने वाले पेड़ चिह्नित कर लिये गये हैं तथा जमीन की मापी भी पूरी हो गयी है. डेढ़ साल पहले ही इसका निर्माण शुरू होना था, लेकिन आज तक शुरू नहीं हुआ है. उधर, रिंग रोड के फेज-एक (करमा-टाटीसिलवे) तथा फेज-दो (टाटीसिलवे-रामपुर) का काम आधा से अधिक बचा है. कुल 25.55 किमी लंबे इस फेज को पूरा करने की समय सीमा अब तक दो बार फेल हो चुकी है.
पहले जून 2015 तथा फिर दिसंबर 2017 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य था. एनएच-33 (रांची-हजारीबाग रोड) की लूप लाइन की तरह काम करने वाले रिंग रोड के इस सेक्शन के पूरा न होने का खामियाजा आम राहगीर तथा दोपहिया वाहन चालक भुगत रहे हैं.
गौरतलब है कि नामकुम-टाटीसिलवे के बीच भारी ट्रैफिक लोड रहने तथा सभी बड़े वाहनों के इसी मार्ग से आने-जाने के कारण अब तक 50 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें करीब 22 लोगों की मौत हो चुकी है.
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