रांची : स्वच्छता रैंकिंग में रांची 21वां, पर लोगों को ढोना पड़ रहा सिर पर मैला

Updated at : 15 Aug 2018 6:49 AM (IST)
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रांची : स्वच्छता रैंकिंग में रांची 21वां, पर लोगों को ढोना पड़ रहा सिर पर मैला

उत्तम महतो आजादी के 72 वर्ष बाद भी राजधानी के माथे पर कलंक है रांची : स्वच्छ सर्वेक्षण- 2018 में राजधानी देश भर में 21वें स्थान पर है़ राजधानी में साफ-सफाई पर हर महीने दो करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो रहे है़ं स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनाना सरकार की प्राथमिकता में शामिल […]

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उत्तम महतो
आजादी के 72 वर्ष बाद भी राजधानी के माथे पर कलंक है
रांची : स्वच्छ सर्वेक्षण- 2018 में राजधानी देश भर में 21वें स्थान पर है़ राजधानी में साफ-सफाई पर हर महीने दो करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो रहे है़ं स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनाना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है़
लेकिन आजादी के 72 साल बाद भी रांची के कई मोहल्लों में आज भी सिर पर मैला ढोने की मजबूरी है़ यह मजबूरी व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रही है़ ऐसे लोगों का दर्द और विवशता जानने के लिए प्रभात खबर की टीम तुलसी नगर पहुंची. इस मुहल्ले के 40 से अधिक लोग सिर पर मैला ढोकर गुजारा करते हैं. मोहल्ले की कांति देवी, लक्ष्मी देवी, शारदा देवी, बिंदो देवी, रीता देवी, आचकी देवी, मैना देवी (बदला हुआ नाम) सहित कई महिलाएं मजबूरी में यह काम करती हैं.
2016 में निगम ने किया था सर्वे : समय- समय पर ऐसे मामले प्रकाश में आते हैं, तो निगम की नींद खुलती है़ सिर पर मैला ढोनेवाले लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वर्ष 2016 में नगर निगम की टीम मोहल्ले में आयी थी. टीम ने मैला ढोनेवाले लोगों की सूची भी तैयार की थी. अधिकारियों ने कहा था कि आप लोग इस काम को छोड़ दें. सभी को नगर निगम में काम दिया जायेगा. निगम की टीम दुबारा उस मुहल्ले में झांकने तक नहीं गयी. बेरोजगारी के कारण मजबूरी में महिलाएं फिर से इस काम में लग गयी़ं
मानवता को शर्मसार करता यह काम, मैला ढोनेवालों काे नहीं
मिल रहा रोजगार, निगम भी नहीं कर पाया कोई व्यवस्था
राष्ट्रीय सफाई आयोग के निर्देश भी धरातल पर नहीं उतरे
देश के सफाई कर्मचारियों के हितों के लिए गठित राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष ने भी दो मई को निगम अधिकारियों के साथ बैठक की.
उन्होंने निगम अधिकारियों को निर्देश दिया था कि अगर इस कार्य से जुड़े कोई लोग हैं. तो उनको 15 दिन के अंदर एमएस एक्ट के तहत 40 हजार का अनुदान राशि उपलब्ध कराया जाये. साथ ही उन्हें एनयूएलएम के तहत ट्रेनिंग दी जाये. ऐसे लोगों के बच्चों के लिए कल्याणकारी योजना चलायी जाये. उन्होंने सभी को आवास उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया था. इस बस्ती में रहनेवाले लोगों को बसाने की योजना राज्य सरकार ने दो साल पहले बनायी थी. लेकिन आज तक इनको आवास नहीं मिला.
जाति प्रमाण पत्र भी नहीं बन रहा
कॉलोनी के जहां 40 से अधिक लोग मैला ढोने का काम करते हैं. वहीं भूमिहीन होने के कारण इनका जाति प्रमाण पत्र भी नहीं बन रहा है. मैला ढोने का काम कर रहे इन लोगों की मानें तो जाति प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण इनके बच्चों के नामांकन में भी परेशानी आ रही है.
मैला ढोनेवाले लोगों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से लेकर मुख्यमंत्री व कई केंद्रीय मंत्रियों को ज्ञापन सौंपा गया. लेकिन किसी ने इस पर गंभीरता नहीं दिखाई. इन सफाई कर्मचारियों के हितों के लिए जिस राष्ट्रीय सफाई आयोग का गठन किया गया है. उसमें भी राज्य का प्रतिनिधित्व नहीं है. राज्य में तो इसका गठन भी नहीं हुआ है. इस कारण ऐसे लोगों के बेहतरी पर कार्य नहीं हो रहा है:
भगत वाल्मीकि, प्रदेश अध्यक्ष वाल्मीकि महासभा
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