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झारखंड विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश नहीं होगी गड़बड़ियों से जुड़ी सिविल ऑडिट रिपोर्ट

Updated at : 18 Jul 2018 7:25 AM (IST)
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झारखंड विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश नहीं होगी गड़बड़ियों से जुड़ी सिविल ऑडिट रिपोर्ट

शकील अख्तर रिपोर्ट में सरकार के साल भर के कामकाज का ब्योरा रांची : झारखंड विधानसभा के माॅनसून सत्र में भी सीएजी की सिविल ऑडिट रिपोर्ट पेश नहीं होगी. यह रिपोर्ट सामान्यत: बजट सत्र के दौरान ही पेश की जाती है. इसी रिपोर्ट में सरकार के विभिन्न विभागों में हुई अनियमितताओं का विस्तृत उल्लेख होता […]

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शकील अख्तर
रिपोर्ट में सरकार के साल भर के कामकाज का ब्योरा
रांची : झारखंड विधानसभा के माॅनसून सत्र में भी सीएजी की सिविल ऑडिट रिपोर्ट पेश नहीं होगी. यह रिपोर्ट सामान्यत: बजट सत्र के दौरान ही पेश की जाती है. इसी रिपोर्ट में सरकार के विभिन्न विभागों में हुई अनियमितताओं का विस्तृत उल्लेख होता है. माॅनसून सत्र में रेवेन्यू रिपोर्ट, एप्रोप्रिएशन अकाउंट और फाइनांस अकाउंट पेश किया जायेगा. विधानसभा में पेश की जानेवाली रेवेन्यू रिपोर्ट में टैक्स चोरी करनेवालों के नाम का उल्लेख नहीं होगा.इससे पहले तक रेवेन्यू रिपोर्ट में टैक्स चोरी करनेवाले व्यापारियों और कंपनियाें का ब्योरा होता था.
क्या है सिविल ऑडिट रिपोर्ट व रेवेन्यू रिपोर्ट
राज्य की वित्तीय स्थिति और सरकार द्वारा किये गये खर्चों पर नजर रखने और उसमें होनेवाली अनियमितता, गबन आदि की जानकारी सदन को देने की संवैधानिक जिम्मेदारी सीएजी की है.
सीएजी की ओर से हर साल सदन में अलग-अलग रिपोर्ट पेश की जाती है. इनमें सिविल ऑडिट रिपोर्ट, रेवेन्यू रिपोर्ट, फाइनांस अकाउंट, एप्रोप्रिएशन अकाउंट और सरकारी लोक उपक्रमों से संबंधित रिपोर्ट शामिल है. इनमें से सिविल ऑडिट रिपोर्ट और रेवेन्यू रिपोर्ट को सर्वाधिक महत्वपूर्ण है.
सिविल ऑडिट रिपोर्ट में सरकार द्वारा बनाये गये नियम के आलोक में खर्च किये गये पैसों की उपयोगिता, गबन, अनियमितता का उल्लेख होता है. वहीं, रेवेन्यू रिपोर्ट में राजस्व के लक्ष्य के मुकाबले वसूली व राजस्व की चोरी या नुकसान के ब्योरे का उल्लेख होता है.
बजट सत्र में पेश होता है सिविल ऑडिट रिपोर्ट
सिविल ऑडिट रिपोर्ट सामान्यत: बजट सत्र के दौरान ही पेश किया जाता है, लेकिन जनवरी 2018 में संपन्न हुए बजट सत्र के दौरान 31 मार्च 2017 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष का सिविल ऑडिट रिपोर्ट पेश नहीं किया गया.
चर्चा है कि 31 मार्च 2017 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए तैयार रिपोर्ट में ऊर्जा, डेयरी, शिक्षा, वन सहित, पथ निर्माण विभाग में हुई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है. रेवेन्यू रिपोर्ट सरकार द्वारा राजस्व के लिए निर्धारित लक्ष्य, वसूली, कम टैक्स लगाना, व्यापारियों द्वारा टैक्स की चोरी करने आदि का उल्लेख है. इस रिपोर्ट के अंत में परिशिष्ट नहीं है. इससे इस बात की जानकारी नहीं मिल सकेगी कि टैक्स की चोरी किन-किन व्यापारियों या कंपनियों ने की.
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