रांची : आपूर्ति शुरू होते ही गायब हो गया अंडा, पोषाहार भी नदारद

Updated at : 09 Jul 2018 8:01 AM (IST)
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रांची : आपूर्ति शुरू होते ही गायब हो गया अंडा, पोषाहार भी नदारद

संजय राज्य गठन के बाद से अब तक केंद्र प्रायोजित पूरक पोषाहार कार्यक्रम पर करीब 4000 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं रांची : राज्य भर के 38,432 आंगनबाड़ी केंद्रों के तीन से पांच वर्ष तक के करीब 9.27 लाख बच्चों को जून से पूरक पोषाहार के रूप में सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार […]

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संजय
राज्य गठन के बाद से अब तक केंद्र प्रायोजित पूरक पोषाहार कार्यक्रम पर करीब 4000 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं
रांची : राज्य भर के 38,432 आंगनबाड़ी केंद्रों के तीन से पांच वर्ष तक के करीब 9.27 लाख बच्चों को जून से पूरक पोषाहार के रूप में सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को अंडा मिलना शुरू हुआ है. लेकिन, पहले माह में ही अंडा आपूर्ति में गड़बड़ी भी शुरू हो गयी है. राज्य के विभिन्न प्रखंडों में जून के अंतिम तथा जुलाई के पहले सप्ताह में अंडा नहीं पहुंचा. यही नहीं कई केंद्रों पर सड़े अंडों की आपूर्ति की भी सूचना है.
उधर, छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाअों को मिलने वाला रेडी-टू-इट पोषाहार (पंजीरी व उपमा) भी दो महीने से नहीं मिला है. इससे राज्य भर में चल रहे पूरक पोषाहार कार्यक्रम का हाल पता चलता है.
अांगनबाड़ी केंद्रों का जायजा लेने पर हुआ खुलासा : छह जुलाई को अनगड़ा प्रखंड के चतरा गांव, नामकुम प्रखंड के टाटी पूर्वी व पश्चिमी तथा कांके प्रखंड के लालगंज व पेरतोल के अांगनबाड़ी केंद्रों का जायजा लेने पर यह खुलासा हुआ है. आंगनबाड़ी केंद्र चतरा की सेविका सावित्री, लालगंज वन की सेविका मीना तिर्की, लालगंज-टू की सहायिका सबिता व पेरतोल की सेविका बबली ने बताया कि इस सप्ताह अंडा नहीं पहुंचा है.
लिहाजा बच्चों को सोमवार व बुधवार के बाद शुक्रवार को भी अंडा नहीं मिला. उधर, खूंटी के बुरूडीह गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में जुलाई के अंतिम सप्ताह में अंडा नहीं पहुंचा था. सेविका सुमैली मुंडू ने कहा कि इस बार बच्चों को अंडा नहीं दे पाये. सेविका व सहायिका ने यह भी कहा कि अंडा न सिर्फ बहुत छोटा रहता है, बल्कि कई अंडे सड़े भी होते हैं, जिन्हें फेंकना पड़ता है.
समाज कल्याण निदेशालय की अोर से निकली निविदा के बाद अंडा आपूर्ति व वितरण का काम सालेम, तमिलनाडु के किसान पॉल्ट्री फार्म को मिला है. इसके बाद संबंधित फर्म को एक वर्ष के लिए अंडा आपूर्ति का आदेश सशर्त निर्गत किया गया. निविदा की शर्तों के मुताबिक आपूर्तिकर्ता को अंडा आंगनबाड़ी तक पहुंचाना है, जहां बच्चों को सप्ताह में तीन दिन अंडा मिलेगा. अंडे की आपूर्ति में किसी तरह की बाधा नहीं होनी चाहिए. पर कार्यक्रम के शुरू होते ही बाधा भी शुरू हो गयी है.
पोषाहार मिल रहा है या नहीं इसकी मॉनिटरिंग भी नहीं हो रही
आपूर्तिकर्ता कंपनी को आंगनबाड़ी में अभी निबंधित 9.27 लाख बच्चों के लिए हर सप्ताह लगभग 28 लाख अंडा उपलब्ध कराना है. पर बच्चों को अंडे व अन्य पोषाहार सहित गर्भवती व धात्री महिलाअों को पोषाहार मिल रहा है या नहीं, इसकी मॉनिटरिंग नहीं हो रही है.
कई आंगनबाड़ी भी नहीं खुल रहे हैं. राज्य गठन के बाद से अब तक केंद्र प्रायोजित पूरक पोषाहार कार्यक्रम पर करीब 4000 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं. इसके बावजूद ग्रास रूट पर कुपोषण बरकरार है. इससे आंगनबाड़ी केंद्रों, उनकी कार्य प्रणाली, सेविका व सहायिका की कार्यशैली सहित महिला पर्यवेक्षिका, सीडीपीओ, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी तथा निदेशालय व विभाग के मॉनिटरिंग सिस्टम पर भी सवाल खड़े होते रहे हैं.
दुर्भाग्य
42 लाख के करीब बच्चे हैं पांच वर्ष तक के राज्य में, जिनमें से करीब 20 लाख कुपोषित
65 लाख लड़कियां हैं 18 वर्ष से कम उम्र की राज्य में, जिनमें से 67 फीसदी कुपोषित
08 लाख बच्चों का जन्म होता है हर वर्ष, जिनमें से चार लाख बच्चे होते हैं कुपोषित
(आंकड़े नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4) : 2015-16, रैपिड सर्वे अॉफ चिल्ड्रेन : 2013-14 तथा यूनिसेफ के हैं)
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